<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829</id><updated>2011-11-28T05:40:00.171+05:30</updated><title type='text'>WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM</title><subtitle type='html'>एक सशक्त-कदम सकारात्मकता की ओर...............</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>75</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-7662200583461271835</id><published>2011-09-15T06:00:00.017+05:30</published><updated>2011-09-15T06:00:01.289+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;span style="color: #d5a6bd; font-size: xx-small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span style="color: #20124d;"&gt;&lt;span style="font-size: x-large;"&gt;&lt;strong&gt;सुखी&amp;nbsp;रहना&amp;nbsp;आपके हाथ&amp;nbsp;में हैं.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span style="color: #d5a6bd; font-size: xx-small;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;आजकल तनाव भरी ज़िन्दगी में हम सभी मुस्कुराना तक&amp;nbsp;भूल गए हैं, खुलकर हंसना तो दूर की कौड़ी बन चुकी हैं. जिसे देखो वो गंभीर और तनाव में डूबा दिखाई पद रहा हैं. आइये कुछ सरल और रोजमर्रा की ज़िन्दगी से जुड़े कुछ उपाय जानते हैं, जिससे हम तनाव रहित और खुशहाल जीवन जी सकते हैं =&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;01. सबसे आसान और सबसे महत्तवपूर्ण उपाय तो यही हैं कि--अपने परिवार, बीवी-बच्चो, और&amp;nbsp;बड़े-बुजुर्गो&amp;nbsp;को समय अवश्य देवे. चाहे थोड़ा समय देवे, पर पूरा यानी एकाग्र समय देवे.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;02. पार्को में टहलना और बागवानी (पौधारोपण, कटाई, छंटाई, सिंचाई) करना एक बेहतरीन उपाय हैं.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;03. गाडी (दुपहिया/चौपहिया) चलाना भी अच्छा हैं पर धीमी गति से और खाली सडको पर. भीड़ में और तेज़ गति से गाडी चलाना दोनों तनाव के लेवल को बढाते हैं. तेज़ गति से तात्कालिक लाभ अवश्य हैं पर बाद में&amp;nbsp;हॉर्मोन&amp;nbsp;&amp;nbsp;के&amp;nbsp;स्तर के घटने पर तनाव फिर हावी हो जाएगा.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;&lt;span&gt;04. दिन&amp;nbsp;&amp;nbsp;में कम से कम&amp;nbsp;दो&amp;nbsp;बार खुलकर हंसना और न्यूनतम&amp;nbsp;दस&amp;nbsp;बार मुस्कुराने को नियम बनाएं.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;05. अच्छे, सकारात्मक, हँसते-गुदगुदाते-मजाकिया&amp;nbsp;चुटकुले सुने व दूसरो को सुनाएँ.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;06. अच्छा साहित्य, सकारात्मक विचारों वाली किताबें या लेख पढ़ें.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;07. कुछ शौंक पाले और उनको जीयें. जैसे सिक्के इकट्ठे करे या&amp;nbsp;स्टाम्प्स इकट्ठे करे.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;08. संगीत को जीवन में उतारें. चाहे वो नृत्य हो, गायन हो, या&amp;nbsp;वाधयन्त्र&amp;nbsp;बजाना&amp;nbsp;हो. खुद अगर गाना, नाचना, या बजाना नहीं आता हो या शर्म/झिझक हो तो गाने सुने या नृत्य देखें.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;09. चित्रकारी,&amp;nbsp;कशीदाकारी,&amp;nbsp;एरोबिक्स,&amp;nbsp;रस्सा कूदना, एक्सरसाइज़,&amp;nbsp;ब्रेक&amp;nbsp;डांस,&amp;nbsp;कलाकारी, या घरेलु खेल (जैसे-लूडो, सांप-सीढ़ी,&amp;nbsp;कैरम,&amp;nbsp;चौसर,&amp;nbsp;शतरंज,&amp;nbsp;आदि)&amp;nbsp;अवश्य खेलें. ये समय&amp;nbsp;बिताने और तनाव रहित होने का बेहद सस्ता साधन हैं.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;10. पालतू पशु-पक्षी (चिड़िया, तोते, कबूतर,&amp;nbsp;बतख,&amp;nbsp;मुर्गी-मुर्गा,&amp;nbsp;या कुत्ते, बिल्ली, खरगोश, मछली, आदि) पाले. ये निश्चित रूप से तनाव&amp;nbsp;मुक्ति&amp;nbsp;के लिए बेहतरीन उपाय हैं. पालतू पशु-पक्षी आश्चर्यजनक रूप से हमें तनाव से दूर करते हुए खुशियों&amp;nbsp;की&amp;nbsp;ओर ले जाते हैं. इस बात को कई वैज्ञानिक अध्ययनों से साबित किया जा चुका हैं. अगर आप अमीर हैं तो गाय, भैंस,&amp;nbsp;घोड़े, आदि पर भी विचार कर सकते हैं.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;11. हँसते-गुदगुदाते-मजाकिया&amp;nbsp;और&amp;nbsp;पारिवारिक&amp;nbsp;फिल्मे या धारावाहिक देखें. क्रूर-हिंसक-और रोने-धोने वाले नाटक या फ़िल्में यथासंभव ना देखें. ये उपाय सर्वाधिक मनोरंजक उपाय हैं. जोकि बीपी घटाने में भी सहायक हैं.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;12. अपने सामाजिक दायित्वों का भी&amp;nbsp;ख्याल&amp;nbsp;&amp;nbsp;रखें. कुछ सामाजिक कार्य करे&amp;nbsp;व किसी सामाजिक संगठन से जुड़ें.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;13. अपने मनपसंद का खाएं व पीयें. लेकिन, इसे आदत भूल कर भी ना बनाएं. हमारा खान-पान&amp;nbsp;&amp;nbsp;छठरस&amp;nbsp;से भरपूर होना चाहिए. याद रखें--पौष्टिकता विविधता में ही निहित हैं.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;14.&amp;nbsp;धार्मिक बन सको तो बहुत ही अच्छा और ना बन सको तो धार्मिक कार्यों से अवश्य जुड़ें. पूजा-पाठ ना सही पर गौ-सेवा, बीमार गायों और कुत्तो की सेवा तो की ही जा सकती हैं. सेवा ना सही, भोजन तो कराया ही जा सकता हैं.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;15.&amp;nbsp;अनाथालयो व&amp;nbsp;वृद्ध&amp;nbsp;आश्रमों&amp;nbsp;&amp;nbsp;से अवश्य जुड़ें, रोज़ रोज़ नहीं जाना हैं बस जब वक्त और&amp;nbsp;मन&amp;nbsp;करे, चले जाएँ और सेवा कर सको तो अति उत्तम, वरना भोजन करवाएं. ये नहीं, तो बातचीत ही सही. दो पल उनसे मिलकर बातें कर के उन्हें हौसला / संबल प्रदान करे.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;16. चहलकदमी (पैदल चलना, वाकिंग, या जोग्गिंग)&amp;nbsp;जरूर&amp;nbsp;करे. सुबह या शाम, अकेले या समूह के साथ, जैसे अच्छा लगे जरूर करे. पैदल चलना भी एक व्यायाम ही हैं. ये मुफ्त का उपाय हैं तनाव दूर भगाने का.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;17. पुरानी यादों, पुरानी बातों को याद अवश्य रखें, लेकिन दुखद और बुरी यादों को स्मृति से मिटा देवे. घावों को कुरेदना कहाँ की समझदारी हैं.? जो बीत गया उसे याद कर करके अपना वर्तमान और भविष्य खराब ना करें.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;18. अपने आपको और अपने साथ वालो (परिजनों या कार्यालयों के सहकर्मियों) को खुश और सुखी&amp;nbsp;मानियें. दुखी और परेशान होने से अधिक बुरा खुद को दुखी और परेशान मानना हैं.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;19. हँसते-गुदगुदाते-मजाकिया मोबाइल संदेशो को पढ़ें व पढ़ाएं यानी ले और भेजें. शेर-ओ-शायरी भी काफी बेहतरीन और लोकप्रिय विकल्प हैं. ध्यान रहे, दिल तोड़ने वाले व &amp;nbsp;दुखद संदेशो का आदान-प्रदान कदापि ना करे.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #d5a6bd; font-size: xx-small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #bf9000; font-size: x-large;"&gt;&lt;strong&gt;मुझे उम्मीद हैं कि--मेरे द्वारा ऊपर बताएं गए कई&amp;nbsp;उपायों&amp;nbsp;में से कुछ उपाय आपने अपनाएँ होंगे और आप खुद को तनाव से कोसो दूर और खुद हो हल्का-फुल्का, खुश और सुखी&amp;nbsp;महसूस कर रहे होंगे. आजकल&amp;nbsp;की भागती दौड़ती और तेज़-रफ़्तार, तनाव में&amp;nbsp;आकंठ&amp;nbsp;डूबी&amp;nbsp;&amp;nbsp;ज़िन्दगी में अगर मेरा ये प्रयास (ख़ास आपके लिए ब्लॉग पोस्ट लिखना) आपको दो पल भी मुस्कुराने और हंसने की राह दिखाने में कामयाब होता हैं तो&amp;nbsp;मैं&amp;nbsp;खुद को सौभाग्यशाली समझूंगा.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #d5a6bd; font-size: xx-small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #134f5c;"&gt;धन्यवाद.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #d5a6bd; font-size: xx-small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #cc0000; font-size: x-large;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #cc0000; font-size: x-large;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #cc0000; font-size: x-large;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #cc0000; font-size: x-large;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #cc0000; font-size: x-large;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #cc0000; font-size: x-large;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #cc0000; font-size: x-large;"&gt;00-91-9649444440&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #cc0000; font-size: x-large;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #cc0000; font-size: x-large;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-7662200583461271835?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/7662200583461271835/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2011/09/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/7662200583461271835'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/7662200583461271835'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2011/09/blog-post.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-2169095610995467697</id><published>2010-11-01T11:39:00.007+05:30</published><updated>2010-11-01T11:39:01.154+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="color: #ead1dc; font-size: xx-small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;span style="background-color: #ead1dc; color: #f1c232;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #7f6000; font-size: x-large;"&gt;&lt;strong&gt;हम राजनीति क्यों नहीं करते???&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ead1dc; font-size: xx-small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;मेरा सवाल गलत नहीं हैं. नाही मेरे इस सवाल को लेकर किसी को कोई आपत्ति होनी चाहिए. मुझे समझ में नहीं आता हैं कि-&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;हम लोग घरो में राजनीति (लड़ाई-झगडे या नीचा दिखाकर) करते हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;हम लोग दफ्तरों में अपनी धाक जमाने के लिए राजनीति (दूसरो को गलत साबित करने या बॉस से नजदीकियां बढ़ाकर)&amp;nbsp;करते हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;हम लोग सरकारी दफ्तरों में अपना काम निकलवाने के लिए राजनीति (सिफारिशें या चालाकी) करते हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;यहाँ तक कि हम लोग मित्रमंडली में भी राजनीति करने से बाज़ नहीं आते,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;हम लोग अपने-पराये की राजनीति खेलते हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;हम लोग तेरा-मेरा की राजनीति करते हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;हम लोग निर्जीव सामानों, चीज़ों को भी पाने के लिए राजनीति करते हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;हम लोग गाडी, वाहन चलाते वक़्त भी राजनीति (किसके आगे या पीछे चले, किसे आगे जाने दे और किसे रोकें) करते हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;हम हर जगह, हर वक्त,&amp;nbsp;हर किसी के साथ राजनीति खेलते हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;आदि-आदि. &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ead1dc; font-size: xx-small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;लेकिन दुर्भाग्य से हम राजनीति इनके लिए बिलकुल नहीं करते =&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;देश के लिए,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;राज्य के लिए,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;पढ़ाई के लिए,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;रोजगार के लिए,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;रोटी, अन्न, अनाज के लिए,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;स्वच्छ पेयजल के लिए,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;गली-मोहल्लो और शहर की साफ़-सफाई के लिए,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;राष्ट्रभाषा हिन्दी को अंग्रेजी से बचाने के लिए,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;धर्म के लिए,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;समाज के लिए,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;न्याय-इन्साफ के लिए,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;भ्रष्टाचार-रिश्वतखोरी के खिलाफ,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;आदि-आदि&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ead1dc; font-size: xx-small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;जब हमें व्यक्तिगत तौर पर कभी कोई दिक्कत आती हैं तभी हम कुछ करते हैं, वरना नहीं. हमारे खुद के घर-दूकान के बाहर गन्दगी या नाली जाम होती हैं तभी हम जागते हैं वरना नहीं. क्यों???&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;आपकी अपनी भाषा हिन्दी पर आज अंग्रेजी&amp;nbsp;हावी हो रही हैं तो भी&amp;nbsp;आप चुप हैं. कुछ करते क्यों नहीं??? अपने बच्चो को हिन्दी माध्यम स्कूलों में बेशक ना डालिए पर संस्कारित तो कीजिये, उनसे कम से कम घर पर भी तो अंग्रेजी मत बुलवाइए. करियें कुछ??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;हर सरकारी विभाग-दफ्तर में भ्रष्टाचार हैं और आप चुप क्यों हैं?? भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराइए या किसी ऐसी सिफारिश का सहारा लीजिये जो वो कर्मचारी या अधिकारी रिश्वत मांगने की जुर्रत भी ना करे.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;जाति-धर्म की राजनीति को आप कुछ लोगो के कहने मात्र से गलत समझने लगे हैं. क्यों?? ये बेहद शर्म की बात हैं. मत भूलिए, आज सभी जातियों और सभी धर्मो में छोटी-बड़ी बुराइयां व्याप्त हैं. वोटो की राजनीति चाहे ना करे पर उन कुरीतियों और बुराइयों को तो मिटाने के लिए तो राजनीति कर ही सकते हैं. नेता बनकर आप अच्छी सलाह-राय&amp;nbsp;तो दे ही सकते हैं. अधिकांशत: नेता लोग ही समाज, जाति, और धर्म को अच्छी सीख-राह दे सकते हैं. क्योंकि हर समाज या जाति में साधू-संतो का होना संभव नहीं हैं. ऐसे में नेता ही बेहतरीन विकल्प हैं.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ead1dc; font-size: xx-small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232; font-size: small;"&gt;ये दुखद हैं कि-आप ऊपर दी गयी पहली सूची के लिए तो दिलोजान से राजनीति कर रहे हैं पर दूसरी सूची के लिए आप सपने में भी राजनीति नहीं करते. क्यों???&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;राजनीति का अर्थ वोटो की राजनीति करना बिलकुल भी नहीं हैं. राजनीति करने का अर्थ हैं अपना प्रभाव बनाना, अपना रूतबा, अपनी ताकत को बढ़ाना. आप राजनीति से नफरत मत कीजिये. अगर आपको कुछ समझ में नहीं आ रहा हैं तो सिर्फ निम्नलिखित दो रास्ते तो अवश्य ही बेहिचक&amp;nbsp;अपनाइयेगा =&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;पहला, सूचना का अधिकार अधिनियम = प्रति सूचना मात्र दस रूपये का खर्चा ही आयेगा. किसी भी भी विभाग से, किसी भी तरह की, कोई भी सूचना, कहीं भी, कभी भी मांग लीजिये. आपको एक महीने के अन्दर-अन्दर सूचना अवश्य मिल जायेगी. अगर एक महीने के बाद भी आपको वांछित सूचना ना मिले तो आप अपील भी कर सकते हैं. जिसपर उन्हें (जिनसे आपने सूचना चाहि होगी) भारी जुर्माना भी लगेगा. सबसे बड़ी बात, झूठी सूचना लिखित में कदापि नहीं दी जा सकती, मुहं-जबानी बेशक दी जा सकती हैं. इसलिए अपने इस धारदार हथियार का खुलकर उपयोग कीजिये.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232;"&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;दूसरा, जनहित याचिका = आप किसी भी मुद्दे को लेकर अपने क्षेत्राधिकार के हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) भी जा सकते हैं. आपको ना स्टाम्प पेपर की आवश्यकता हैं, ना किसी वकील को करने की, और ना ही वकालत वाली उलझन भरी भाषा को जानने, सीखने-समझने की. आपको तो बस, साधारण हिन्दी (या आपकी अपनी भाषा) में एक पत्र ही लिखना होगा. उस पत्र के साथ, आपको किसी भी अखबार में छपी किसी खबर की या सूचना के अधिकार के माध्यम से मिली किसी सूचना की तीन-तीन प्रतियों को हाईकोर्ट भेजना होगा. उसके बाद, सारी कार्रवाही हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) करेगा. आपको ना तो अदालतों के चक्कर काटने होंगे, नाही अदालत और विभाग के बीच आप पीसेंगे. आपको तो कही भी नहीं रखा जायेंगा मतलब केस-मुकद्दमा हाईकोर्ट बनाम दफ्तर-विभाग होगा. आपको तो बस, ऊपर बताया गया छोटा सा और आसान सा काम करना होगा.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ead1dc; font-size: xx-small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #f1c232;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;मैं ऐसे कई लोगो को निजी तौर पर जानता भी हूँ. और भी ना जाने कितने लोग ऐसे हैं जो वोटो की राजनीति नहीं करते और नाही कभी कोई चुनाव लड़ते हैं, लेकिन अपने आसपास, गली-मोहल्लो और शहर की समस्याओं को उठाते रहते हैं. &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;कभी कहीं तो कभी कहीं, आज इधर तो कल उधर, यानी लोगो की समस्याओं को उठाने और आम आदमी को जगाने (जागरूक करने) में हमेशा आगे (तत्पर) रहते हैं. ये असल में समाजसेवी होते हैं, ये सज्ज़न लोग होते हैं, लेकिन पुकारे नेता ही जाते हैं.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #ead1dc; font-size: xx-small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;span style="color: #ead1dc; font-size: xx-small;"&gt;&lt;span style="color: #7f6000; font-size: x-large;"&gt;&lt;strong&gt;आप नेता ही पुकारे जाओ लेकिन वोटो वाले नहीं. आप राजनीतिक कहलाओ पर वोट वाले नहीं. क्या ख़याल हैं आपका??? करेंगे राजनीति???&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #7f6000; font-size: x-large;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #7f6000; font-size: x-large;"&gt;&lt;strong&gt;राजनीति आपकी राह देख रही हैं, आइये राजनीति में.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ead1dc;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #e06666; font-size: x-large;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #e06666; font-size: x-large;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #e06666; font-size: x-large;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #e06666; font-size: x-large;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #e06666; font-size: x-large;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #e06666; font-size: x-large;"&gt;&lt;a href="mailto:CHANDERKSONI@YAHOO.COM"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #e06666; font-size: x-large;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #e06666; font-size: x-large;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-2169095610995467697?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/2169095610995467697/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/11/blog-post.html#comment-form' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/2169095610995467697'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/2169095610995467697'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/11/blog-post.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-2483670343692908074</id><published>2010-10-25T08:16:00.000+05:30</published><updated>2010-10-25T08:16:00.452+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="color: #993399;"&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #663366;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size: 180%;"&gt;भ्रूण ह्त्या की इजाज़त दो....&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;राज़स्थान में जनसंख्या नियंत्रण का एक बहुत ही अजीब और गलत उपाय अपनाया जा रहा हैं, जिसके मैं सख्त खिलाफ हूँ। राज़स्थान में चुनाव (कोई भी पार्षद, नगर पालिका-परिषद्-निगम के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, और विधायक) लड़ने के लिए एक शपथपत्र देना होता हैं कि-"उसके (चुनाव लड़ने के इच्छुक) दो से अधिक संताने नहीं हैं।" ये बहुत ही गलत नियम हैं। दो से अधिक संतान वालो को चुनाव लड़ने से अयोग्य करार देते हुए चुनाव लड़ने से रोका जा रहा हैं। ये नियम 1995 के बाद के बच्चो से ही लागू हुआ हैं। यानी इससे पहले जितने भी बच्चे हो बेझिझक चलेगा। इतना ही नहीं ये नियम पुरे देश भर में ना होकर राज़स्थान समेत 2-4 अन्य राज्यों में ही हैं।&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;कुछ कारण जिनकी वजह से मैं इस नियम के खिलाफ हूँ =&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;क्या मात्र दो-चार राज्यों में इस नियम के लागू होने से जनसंख्या नियंत्रण हो जाएगा???&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;राज़स्थान में दो सौ विधानसभा क्षेत्र यानी विधायक हैं, अगर औसतन प्रतिक्षेत्र 5 लोग चुनाव लड़े तो ये मात्र एक हज़ार ही हुआ। और करीब इतने ही नगर पालिका-परिषद्-निगम के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष हैं। पार्षद दो से तीन हज़ार हुए। क्या इतने कम संख्या में लोगो को पाबन्द (बाध्य) करने मात्र से जनसंख्या काबू में आ जायेंगी???&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;मेरे शहर श्रीगंगानगर को ही लीजिये। यहाँ की जनसंख्या चार लाख से ज्यादा हैं पार्षद हैं पचास और एक-एक सभापति-उपसभापति। यानी चुनाव लड़ने वाले कुल लोग हुए तीन सौ (प्रति वार्ड छह व्यक्ति औसतन) व्यक्ति। अब मात्र तीन सौ लोगो को जनसंख्या के नियम (दो से ज्यादा बच्चो पर रोक लगाने) से क्या शहर की आबादी में कोई फर्क पडेगा??&lt;br /&gt;नहीं ना, ठीक इसी तरह सारे राज्य (राजस्थान समेत अन्य राज्य जहां-जहां ये नियम लागू हैं) में इस तरह जनसंख्या नियंत्रण कैसे संभव हैं??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;सभी शास्त्रों और धर्मग्रंथो में साफ़-साफ़ कहा गया हैं कि-"मृत्यु &lt;span style="color: #993399;"&gt;उपरान्त आत्मा की शान्ति के लिए पुत्र (बेटा) का होना आवश्यक हैं। गया जी, हरिद्वार, ऋषिकेश या अन्य स्थलों पर पिंडदान करना, अस्थियों को बहाना, दाह संस्कार करना, या सभी अन्य कार्य पुत्रो द्वारा फलीभूत होते &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: 0px;"&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;हैं&lt;/span&gt;।&lt;/span&gt; सिर्फ हिन्दुओं (जिनमे सिख, जैन, और बोद्ध धर्म के अनुयाई भी शामिल हैं) में ही नहीं मुस्लिमो, ईसाईयों में भी पुत्र होना आवश्यक बताया गया हैं। इतना ही नहीं पुत्र विहीन होने को अभिशाप सामान बताया गया हैं। तभी तो प्राचीन काल में बड़े-बड़े राजा-महाराजाओं को भी पुत्रयेष्टी यज्ञ करते दिखाया गया हैं। वर्तमान में भी काफी लोग पुत्र ना होने के गम में संत-महात्माओं के शरण में जाते हैं, और नाकामयाबी मिलने पर आत्महत्या जैसा कदम तक उठा बैठते हैं।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;हालांकि अब बच्चो को गोद लेने और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण नि:संतान दम्पत्तियों में दुःख-अवसाद, तनाव कम हो रहा हैं। लेकिन, विज्ञान की भी एक सीमा हैं। जिन्हें विज्ञान नकार देता हैं वहाँ लोग तंत्र-मंत्र, और यज्ञ जैसे कर्मकांड करते हैं। साधू-महात्माओं, संतो के चक्कर काटते हैं, देवी-देवताओं, भगवानो-पीरो के तीर्थो पर मन्नत मांगते हुए शीश नवाते हैं। यहाँ भी विफल होने पर कानूनी प्रक्रिया से बच्चो को गोद भी लेते हैं। लेकिन, जिन्हें सुख नहीं मिलता यानी गोद के लायक को बच्चा नहीं मिलता या कोई कानूनी उपाय नहीं मिलता तो उन्हें आत्म-ह्त्या जैसा गंभीर कदम तक उठाते देखा गया हैं। यहाँ गौरतलब हैं कि-"हिन्दू धर्म ही नहीं अन्य सभी धर्म भी बेटा होना परम-आवश्यक करार देते हैं।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;बहुत से लोग धर्म कर्म को नहीं मानते हैं, लेकिन जो मानते हैं उनके लिए ये नियम कष्टदायी हैं। धर्म और उनकी बातों को ना मानने वाले ये भूल जाते हैं कि-"बेटी कोई कभी तो विदा करेंगे ही, दामाद को तो घरजमाई बनाकर नहीं रख सकते। बेटा ही पास रहता हैं भले ही संपत्ति के लालच में ही क्यों ना हो?? वैसे हर बेटा लालची नहीं होता, ये भी ध्यान देने योग्य बात हैं। बेटा जीवन भर दुःख भले ही दे लेकिन संपत्ति के लालच में मरते दम तक सेवा तो करता हैं। बेटियाँ एक उम्र तक ही हमारे पास रहती हैं उसके बाद उसे ससुराल जाना ही होता हैं। बेटा आज भले ही सुख नहीं देते हो, लेकिन अगर अच्छे संस्कार हो तो माता-पिता के प्रति पूरा समर्पण भाव रखते हैं। बेटी को आप संपत्ति का लालच भी नहीं दे सकते क्योंकि उसे रहना तो ससुराल ही हैं। बेटा होना आवश्यक हैं, आप अपना वर्तमान या पुश्तैनी कारोबार किसे देंगे??? बेटी को??? मगर बेटी आपका कारोबार संभालेंगी या अपना घर यानी ससुराल??? अगर बेटी कामकाजी भी होंगी तो अपने पति के कार्य को संभालेंगी या अपने पिता के???, आदि-आदि।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;कुछ लोग बेटा ना होने पर संपत्ति दान कर देने की &lt;span style="color: #993399;"&gt;बात कहते हैं, लेकिन ऐसा कहते समय वे भूल जाते हैं कि-"दान देने के मुद्दे पर आपके सगे-सम्बन्धियों और रिश्तेदारों में टकराव हो सकता हैं। जिन्होंने सारी जिंदगी में आपकी तरफ देखा भी नहीं होगा वो आपके मरने के बाद कुकुरमुत्तो की तरह सामने आने लगेंगे। आपके अगर कोई बेटा हुआ तो ठीक वरना आपकी संपत्ति आपके कथित "अपनों" द्वारा ही लूट ली जायेगी। जिस व्यक्ति या संस्था को आप दान देंगे वो भी बेवजह निशाने पर आ जायेंगी जैसे कि-"डरा धमका लिया होगा या बेहिसाब पैसे गलत कार्य में खर्च किये जायेंगे या इन्होने (दान देने वाला) मौखिक रूप से मुझे (संपत्ति का भूखा व्यक्ति) हिस्सा दिया था या ये तिरछी नज़र वाले भूखे आपके (मृतक के) वकील को ही खरीद डालेंगे और वकील कहलवा देगा कि-"भूल से इनका (खोटी नियत वाला) नाम डालना रह गया या बाद में दानदाता ने इस नाम (संपत्ति पर गिद्ध दृष्टि गड़ाएं लोग) पर सहमति दिखाई थी।" आदि-आदि कई बहानो से झगडा होने लगेगा।"&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;&lt;span style="color: #ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;वैसे भी ये सर्वविदित तथ्य हैं कि-बेटे को अपनी जमीन-जायदाद देने में जो सुख हैं वो परायो को देने में कहाँ??? बेटा नालायक ही निकलेगा ये डर क्या जायज़ हैं??? आप पहले ही बेटो के निकम्मे होने की भावना क्यों पाल बैठे हैं?? उन्हें लायक बनाइये, काबिल बनाइये। अगर आप उन्हें अच्छे संस्कार नहीं दे पाते या वे बिगड़ जाते हैं तो आप अपनी संपत्ति का लालच भी दे सकते हैं। लेकिन, बेटी बिगड़ी हुई &lt;/span&gt;निकल गयी तो?? ये आप कभी नहीं सोचते।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि-"सभी को भ्रूण लिंग की जांच की इजाज़त होनी चाहिए या सभी को भ्रूण ह्त्या की इजाज़त मिलनी चाहिए।" मैं तो ये कह रहा हूँ कि-&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;"जिनके बेटा नहीं हैं उन्हें किसी भी सूरत में भ्रूण लिंग जांच की इजाज़त नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन जिनके पहले एक बेटी हैं उन्हें इस बात की इजाज़त होनी चाहिए। क्योंकि एक बेटी के होने के बाद अगर दूसरी भी बेटी हो गयी तो बेटा कर नहीं सकते। और अगर तीसरी संतान बेटा हुयी तो राजनीति खतरे में पड़ जायेंगी। आम आदमी को इस नियम से कोई परेशानी नहीं हैं, लेकिन राजनीति में सक्रिय लोगो (नेता या कार्यकर्ता) को इस नियम से समस्या ही समस्या हैं। सभी को इजाज़त नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन पहले से ही एक बेटी वालो को खासतौर पर इजाज़त प्रदान की जानी चाहिए।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;&lt;strong&gt;सबसे बड़ी बात--ये पाप जरूर हैं, लेकिन मज़बूरी भी हैं। आप राजनीति छोड़ सकते हैं, आप पाप से बचने के लिए राजनीतिक करियर को तिलांजलि दे सकते हैं। लेकिन, हर कोई ऐसा नहीं कर सकता, जिसे राजनीति में काफी लंबा समय हो गया हैं उसे कोई ना कोई टिकडमबाज़ी करके किसी ना किसी तरीके से राजनीति को बचाना आवश्यक होगा। सबसे बढ़िया तो यही होगा कि-"इस नियम को ही रद्द कर दिया जाए। अगर ऐसा संभव ना हो या इच्छा ना हो तो मेरे कई सुझाव हैं जो मैं देना चाहूँगा।" ये भ्रूण लिंग निषेध अधिनियम सख्ती से पुरे देश में लागू नहीं हैं। कोई भी दो गुना या तीन गुना पैसा देकर लिंग जांच और गर्भपात करा सकता हैं। सबसे पहले तो इस नियम (दो से अधिक संतान) को पुरे देशभर में लागू किया जाए, तभी फायदा हैं। कुछेक राज्यों से कोई उत्साहजनक नतीजे नहीं मिल सकते। दूसरा, एक बेटी वालो को भ्रूण लिंग जांच की इजाज़त जायज़ तौर पर मिलनी ही चाहिए। तीसरा, इस नियम को सिर्फ राजनीति के क्षेत्र में ही लागू ना रखा जाए। इस नियम को अन्य क्षेत्रो (निजी व सरकारी दोनों) में भी लागू किया जाए। अगर निजी क्षेत्रो में ना लागू हो सके तो सभी सरकारी क्षेत्रो में तो लागू किया ही जा सकता हैं।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #663366; font-size: 180%;"&gt;(कृपया विचारमंथन करे और अपने विचार प्रदान करे।)&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;धन्यवाद।&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #663366; font-size: 180%;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #663366; font-size: 180%;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;br /&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;br /&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;br /&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #663366; font-size: 180%;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #663366; font-size: 180%;"&gt;&lt;br /&gt;00-91-9414380969&lt;br /&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-2483670343692908074?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/2483670343692908074/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/10/blog-post_25.html#comment-form' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/2483670343692908074'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/2483670343692908074'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/10/blog-post_25.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-5567282500424898931</id><published>2010-10-18T07:14:00.000+05:30</published><updated>2010-10-18T07:14:00.709+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #003333;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size: 180%;"&gt;इन मासूमो का क्या कसूर???&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;मुझे ये समझ में नहीं आता हैं कि--"बड़ो की लड़ाई में बच्चे (नासमझ या 15 साल से कम उम्र के) क्यों पिस जाते हैं?? माता-पिता की आपसी लड़ाई-झगडे-तनाव का बच्चो पर बहुत बुरा असर पड़ता हैं। बड़े लोगो की लड़ाई में भला बच्चो का क्या काम?? घर--परिवार के बड़े लोगो को सौ तरह की परेशानियां, &lt;/span&gt;टेंशन, वगैरह होती हैं, उनमे बच्चो (नासमझ या 15 साल से कम उम्र के) को शामिल करना या घसीटना क्या उचित हैं?? चाहे वे आर्थिक परेशानियां हो या धार्मिक (किसी विशेष रीति-नीति को मानने या ना मानने को लेकर) तनाव हो, चाहे वे पैसे के लेन-देन को लेकर हो या संपत्ति विवाद, पति-पत्नी के आपसी, निजी झगडे हो या सास-ससुर को लेकर तनाव, चाहे वे देवरानी-जेठानी को लेकर टेंशन हो या भाई-भाभी को लेकर मनमुटाव, और चाहे बच्चो को लेकर (लालन-पालन को लेकर या किसी के द्वारा डांट या मार देने पर) आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;कोई भी, जैसा भी, जिससे भी, और जितना भी विवाद-तनाव क्यों ना हो, बच्चो को यथासंभव इन सबसे दूर ही रखा जाना चाहिए। बच्चो (नासमझ या 15 साल से कम उम्र के) के सुखद भविष्य के लिए उन्हें इन सभी नकारात्मक, बुरी, और बोझिल मुद्दों-बातों से हर हाल में ही दूर रखना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से, होता ठीक उलटा ही हैं। जो नहीं होना चाहिए, वो जानते-बूझते हुए किया जाता हैं। दूर-दूर से मौजूद (कमरों में, घर में या कभी-कभी घर से बाहर से भी) बच्चो को पुकार-पुकार कर बुलाया जाता हैं। कभी गवाही के नाम पर तो कभी पोल खोलने के नाम पर तो कभी हाँ-ना भरने के नाम पर, और तो और कभी-कभी तो उन्हें सारी हदें पार करते हुए, उन्हें (बच्चो को) पूरी कहानी (स्कूली-शैक्षिक कहानी नहीं) विस्तार से सुनाने के नाम पर बुला लिया जाता हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;ये अभिभावक लोग जाने-अनजाने इन मासूमो (नासमझ या 15 साल से कम उम्र के) के साथ कैसा क्रूर खेल खेल जाते हैं??, इसका उन्हें (माता-पिता या अभिभावकों को) जब तक अहसास होता हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती हैं। बच्चो में बुरे संस्कार डल चुके होते हैं, इतिहास गवाह हैं और खुद विज्ञान भी इस बात को मानता हैं कि-"लड़ाई-दंगा, उठापटक, हिंसा, तनाव, और टेंशन से गुजरने वाले बच्चो पर बेहद बुरा असर पड़ता हैं। उनके भी भविष्य में हिंसक और तनावग्रष्ट होने की संभावना अधिक रहती हैं। बड़े होने प&lt;span style="color: #336666;"&gt;र&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt; वे काफी जिद्दी, उद्दंड, गुस्सैल, और नकारात्मक विचारों वाले साबित हो सकते हैं। विवाह होने के बाद ये संभावना भी प्रबल रहती हैं कि-"उनका परिवार, बीवी-बच्चे भी वो सब झेल सकते हैं जो उन्होंने झेला &lt;/span&gt;होता हैं। क्योंकि उन्हें ये सब जायज़ और उचित प्रतीत होता हैं। इस तरह पीढ़ी-दर-पीढ़ी ये समस्या आगे हस्तांतरित होती जाती हैं।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;हैरानी तो तब होती हैं जब बच्चो (नासमझ या 15 साल से कम उम्र के) की लड़ाई में बड़े भी शामिल हो बैठते हैं। बड़ो की लड़ाई-तनाव में बच्चो का शामिल होना जितना नुकसानदेह हैं उससे कहीं ज्यादा नुकसानदेह बच्चो की लड़ाई में बड़ो का शामिल होना हैं। स्कूल में या गली-मोहल्ले में जब बच्चा किसी अन्य से लड़कर घर आता हैं तो हर बार तो नहीं, पर कभी-कभी माता-पिता भी उन बच्चो को डांटने (कभी-कभार पीट तक देने) या उनके माँ-बाप से उलझ बैठते हैं। ऐसा करके वे अपने बच्चो को एकांगी बना रहे होते हैं क्योंकी बच्चा तो स्कूल-मोहल्ले में बदनाम हो जाता हैं और अन्य अ&lt;span style="color: #336666;"&gt;भिभावक&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt; अपने-अपने बच्चो को उस बच्चे (जिसके अभिभावक आकर लड़े हो) के साथ ना खेलने और दूर रहने की हिदायत दे देते हैं। और स्कूल में भी सहपाठी नाराज़ हो जाते हैं। इन सभी घटनाक्रमों&lt;/span&gt; से बच्चा एकांगी हो जाता हैं, उसमे मिलनसारिता की भावना का विकास नहीं हो पाता या खत्म हो जाती हैं। मिलनसारिता के अभाव में बच्चे की तरक्की के रास्ते भी सीमित या बंद हो जाते हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;बड़ो की लड़ाई में बच्चो को किसी भी हाल में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। यदि बच्चा (नासमझ या 15 साल से कम उम्र के) तनाव के माहोल में आपके निकट भी हो तो उसे कहीं दूर, खेलने, या पढने &lt;/span&gt;भेज देना चाहिए। बच्चा किसी एक का नहीं होता हैं, वो सबका होता हैं। पहली बात तो उसमे सही-गलत की समझ भी पूरी नहीं होती हैं और दूसरी बात वो किसका पक्ष ले??, किसी एक का पक्ष ले तो फंसा और दुसरे का पक्ष ले तो भी फंसा, इधर कुंवा और उधर खाई वाली विकट-स्थिति आ जाती हैं मासूम के आगे। बेचारा, मैदान छोड़कर (यानी बिना कोई पक्ष लिए या जवाब दिए) भी तो नहीं जा सकता। बच्चा अगर 15 साल से बड़ा या समझदार हैं तो और बात हैं लेकिन, फिर भी उसे आपसी झगड़ो-तनावों, चिंताओं से अवोइड-इग्नोर (बचना) करना चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;बच्चा जिस माहोल में पलेगा-बढेगा, वैसे ही उसके संस्कार होंगे। अगर वो लड़ाई-झगडा, दंगा-फसाद, मार-पी&lt;span style="color: #336666;"&gt;ट&lt;/span&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;, तनाव, टेंशन, आदि माहोल में रहेगा तो उसे वो माहोल अजीब नहीं लगेगा। भविष्य में वो बच्चा वोही सब करेगा जो उसने अपने बाल्यावष्ठा में देखा होगा। फिर उसे ये सब करने में कोई झिझक या डर या नफरत नहीं होगी, वो इसे सामान्य और साधारण सी बात मानने लगेगा, जिससे ये तनाव, ये &lt;/span&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;न&lt;/span&gt;कारात्मक माहोल आगे-से-आगे, पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता जाएगा। अच्छा खानदान या घराना उसे ही कहा जाता हैं जहां पीढ़ी-से-पीढ़ी अच्छे संस्कार चले आ रहे हो। अगर आप गलत हो जायेंगे तो घराने का नाम लुप्त-ख़त्म हो जाएगा। फिर आप या आपके नीचे की पीढ़ी जब अच्छा प्रयास करेगी तो वो घराना नहीं बल्कि मात्र अच्छे परिवार का ही नाम कर पाएंगी। अच्छा घराना या खानदान बनाने के लिए पुन: पीढ़ियों तक अच्छा बना रहना पडेगा, यानी की मतलब साफ़ हैं। उजाड़ना हो तो मात्र एक ही पीढ़ी काफी हैं और बनाना या विकसित करना होतो कई पीढियां खपानी-लगानी-गुजारनी पड़ती हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #003333;"&gt;तो आपका क्या फैसला हैं??, जायेंगे बच्चो के बीच या उन्हें खेलने-कूदने-मौजमस्ती मारने देंगे??&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #000099; font-size: 180%;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #000099; font-size: 180%;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #000099; font-size: 180%;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #000099; font-size: 180%;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #000099; font-size: 180%;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #000099; font-size: 180%;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #000099; font-size: 180%;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #000099; font-size: 180%;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-5567282500424898931?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/5567282500424898931/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/10/blog-post_18.html#comment-form' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/5567282500424898931'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/5567282500424898931'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/10/blog-post_18.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-513858339834491031</id><published>2010-10-11T11:29:00.000+05:30</published><updated>2010-10-11T11:29:00.379+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;&lt;span style="font-size: 180%;"&gt;ये कैसी उलटी गंगा बह निकली??&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;हाल ही में मैं (लगभग 5 दिन पहले) शहर की एक नामी (टॉप 5 में गिनी जाने वाली) मोबाइल की दूकान पर खडा था। तभी वहाँ एक 22-23 साल की कॉलेज जाने वाली युवती आई और अपना मोबाइल दुकानदार को पकड़ा दिया और सिर्फ इतना कहा--"बढ़िया-बढ़िया फ़िल्में ड़ाल दीजिये, मैं शाम को ले जाउंगी।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;दुकानदार बोला--"अभी ले जाइए, 10-15 मिनट में दे देता हूँ।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;मैंने दुकानदार से माज़रा पूछा--"ये चक्कर क्या हैं??, उसने कुछ बोला ही नहीं, बस मोबाइल पकडाया और पैसे देकर चलती बनी। ये मामला हैं क्या???" &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;दुकानदार--"यार बी.एफ. (ब्लू / अश्लील फिल्म) का चक्कर हैं।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;मेरी हंसी छुट गयी, मुझे लगा शायद मेरे साथ मज़ाक कर रहा हैं। मैंने कहा--"सीधे-सीधे बता ना यार, क्यों बकवास कर रहा हैं??, नहीं बताना चाहता तो साफ़ बोल दे।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;दुकानदार--"यार, सच कह रहा हूँ, वो हमारी परमानेंट (फिक्स) ग्राहक हैं, तभी तो मोबाइल देकर जाने को हो रही थी। वरना, लोग तो अपने सामने डॉउन्लोडिंग करवाते हैं ताकि हम उनके मोबाइल की गोपनीय चीज़ें अपने कम्पूटर में ना ड़ाल ले।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;मुझे अभी भी उसकी बातों पर यकीन नहीं हो रहा था, हालांकि मैं अब कुछ हद तक गंभीर हो उठा था। तभी, उसी युवती की आवाज़ ने हमारे वार्तालाप को तोड़ा--"भैया, कितनी देर और लगेगी?? मैं कॉलेज को लेट हो रही हूँ, शाम को वापसी में ले जाउंगी। आराम से बैठकर बढ़िया-बढ़िया डॉउन्लोडिंग कर देना। अभी मैं चलती हूँ।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;दुकानदार--"बस जी हो गया, ले जाइए।" उसके बाद, युवती की सहमति को देखकर वो मेरी तरफ मुखातिब हुआ और बोला--"ये देख, इतनी मूवीज मैं इनके मोबाइल में ड़ाल चुका हूँ, और ये आखिरी और ड़ाल रहा हूँ। तेरे सामने ही हैं, अच्छी तरह से देख ले। हमारा तो ये रोज़-रोज़ का काम हैं, तू नहीं जानता ये सब। और ये लड़की हमारी काफी अच्छी और पुरानी ग्राहक हैं।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;दुकानदार ने लड़की को मोबाइल दिया और बाकी पैसे लौटा दिए। युवती--"नयी-नयी, लेटेस्ट मूवीज डाली हैं ना, कोई पुरानी तो नहीं हैं??" दुकानदार--"जी बिलकुल नहीं।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;दुकानदार मेरी तरफ मुस्कुराते हुए--"अब देखले सब तेरे सामने हैं। आजकल छापे काफी पड़ने लगे हैं, इसलिए किसी का मोबाइल दूकान में कम ही रखते हैं। पकडे जाने का डर होता हैं और बदनामी भी होती हैं। ज्यादातर डॉउन्लोडिंग हमारी इसी चीजों की होती हैं। स्थिर फोटो भी हैं, एनिमेटिड (चलित) फोटो भी हैं, कार्टून फोटो भी हैं, कार्टून मूवी भी हैं, और भी बहुत कुछ हैं हमारे पास। ग्राहक की जो डीमांड होती हैं, उसे पूरी करने की पूरी कोशिश रहती हैं, धंधा भी तो चलाना हैं......"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;इस घटनाक्रम के बाद मैं उस दूकान से घर चला गया। मेरे मन में कई ख्याल-सवाल उठने लगे, जिनके जवाब मुझे अभी तक नहीं मिल सके हैं। कुछ सवाल :--&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;ये उलटी गंगा कैसे और कबसे बहने लगी??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;जिनपर महिलाओं-स्त्री जाति की इज्ज़त बचाने का भार हैं, वो ही ऐसी होंगी तो कैसे पार पड़ेंगी??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;भैया बोलती हैं, फिर भी ऐसी-ऐसी अश्लील-कामुक सामग्री अपने मोबाइल में दलाने आती हैं। ये कैसा भाई-बहन का रिश्ता??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;नारी अशिष्ट निरूपण अधिनियम किस काम का रह गया हैं??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;अगर नारीवर्ग ही अश्लील फिल्मो, अश्लील चित्रों के प्रति दीवाना हो जाएगा, तो पुरुषो को कौन रोकेगा??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;क्या नारी अशिष्ट निरूपण अधिनियम रद्द नहीं कर देना चाहिए?? क्योंकि अब नारी ही इन चीजों के समर्थन में उतर आई हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;यहाँ मैं पुरुष-स्त्री में भेदभाव नहीं कर रहा हूँ। नाही मैं नारीवर्ग के लिए कोई गलत-बुरी धारणा बना कर बैठा हूँ। यहाँ मैं नारी की जिम्मेदारी का एहसास उसे करा रहा हूँ। पुरुषो को भी सुधरना चाहिए, लेकिन नारी को ज्यादा सचेत रहने की आवश्यकता हैं। पुरुषवर्ग क़ानून से नहीं समझ पाया हैं, और नाही उसमे समझने की कोई लालसा हैं। लेकिन, स्त्री वर्ग को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। पुरुषो की नज़र में और ज्यादा गिरने से बचना चाहिए। पुरुष वर्ग वैसे ही स्त्री-वर्ग के प्रति संकीर्ण मानसिकता रखता हैं, उनके प्रति सम्मानजनक भाव नहीं रखता हैं। ऐसे में, स्त्रियों द्वारा मोबाइलों या अन्य माध्यमो से इन अश्लील सामग्रियों को बढ़ावा देना आत्महत्या जैसा ही हैं। पुरुषो को स्त्रियों को सुनाने का और मौक़ा मिल जाएगा जैसे--"भूखी कहीं की, शरीफ हैं नहीं बस नाटक करती हैं, चालु हैं सारी की सारी, (मैं यहाँ ज्यादा कुछ लिखना नहीं चाहता), आदि-आदि।" भले ही, ये मामला अपवाद-दुर्लभ हो या कोई-कोई, कुछेक लडकियां ऐसी हो। लेकिन कहते हैं ना, एक मछली पुरे तालाब को गंदा कर देती हैं, उसी तरह ये कुछेक लडकियां पूरी नारी जाति को बदनाम कर रही हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #993399;"&gt;&lt;span style="font-size: 180%;"&gt;तो अब नारी-जाति इस उलटी बहती गंगा को रोकने के लिए कब, क्या, और कैसे करेंगी???&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #336666;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #ffccff; font-size: 78%;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #993399; font-size: 180%;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #993399; font-size: 180%;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #993399; font-size: 180%;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #993399; font-size: 180%;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #993399; font-size: 180%;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #993399; font-size: 180%;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #993399; font-size: 180%;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: #993399; font-size: 180%;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-513858339834491031?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/513858339834491031/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/10/blog-post.html#comment-form' title='8 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/513858339834491031'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/513858339834491031'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/10/blog-post.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-2777080260680461869</id><published>2010-09-27T07:57:00.000+05:30</published><updated>2010-09-27T07:57:00.982+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#663333;"&gt;&lt;span style="color:#330033;"&gt;&lt;strong&gt;जानिये भारत की सैन्य-ताकत को।&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;परमाणु शक्ति संपन्न भारत के सुरक्षा बेड़े में कई ऐसी मिसाइलें हैं जो जरूरत पड़ने पर दुश्मनों के दांत खट्टे कर सकती है।सबसे अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम अग्नि मिसाइल के निशाने पर पडोसी देश पूरा पाकिस्तान और करीब आधे चीन के कई शहर हैं। देश की मिसाइल प्रणाली पर एक नजर :--&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अग्नि मिसाइल &lt;/strong&gt;: देश में निर्मित सतह से सतह पर मार करने वाली अग्नि मिसाइल 20 साल पुरानी है। सबसे पहले तैयार अग्नि 1 की मारक क्षमता 700-800 किलोमीटर जबकि अग्नि 2 की मारक क्षमता 2000-2500 किलोमीटर है। अग्नि 3 के सफल परीक्षण के बाद भारत के पास चीन और पाकिस्तान के एक बड़े इलाके को निशाना बनाने की क्षमता हासिल हो गई है। अग्नि 5 की मारक क्षमता 5000-6000 किलोमीटर है जो अभी फिलहाल विकास के चरण में है। डीआरडीओ और भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया यह मिसाइल सिस्टम 1999 से ही भारतीय सेना का हिस्सा बन गया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पृथ्वी &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;मिसाइल&lt;/strong&gt; : सतह से सतह पर मार करने वाले इस मिसाइल का पहला परीक्षण 25 फरवरी 1988 को श्रीहरिकोटा स्थित प्रक्षेपण केंद्र से किया गया था। इसकी मारक क्षमता 150 किलोमीटर से 300 किलोमीटर तक है। पृथ्वी मिसाइल प्रणाली के तहत थल सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मिसाइल को पृथ्वी जबकि नौसेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मिसाइल को धनुष का नाम दिया गया है। वायु सेना भी इस तरह के मिसाइल का उपयोग करती है। हालांकि इन सभी का निशाना सतह पर ही होता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;आकाश &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;मिसाइल&lt;/strong&gt; : माध्यम दूरी की यह मिसाइल सतह से हवा में मार करती है। सुपरसोनिक गति से छोडी जाने वाली यह मिसाइल 30 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्य को भेद सकती है। यह मिसाइल पूरी तरह राडार से नियंत्रित होती है। सेना इसे टी-72 टैंक के जरिये प्रक्षेपित करती है। आकाश मिसाइल का पहला परीक्षण 1990 में किया गया था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;त्रिशूल मिसाइल &lt;/strong&gt;: आकाश मिसाइल की तरह त्रिशूल मिसाइल भी सतह से हवा में मार करती है। यह 12 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्य को भेदने में कामयाब है। इस मिसाइल का वजह 130 किलोग्राम है और यह अपने साथ 5.5 किलोग्राम का हथियार अपने साथ ढो सकती है। इस मिसाइल के विकास पर काफी रकम खर्च होने के चलते सरकार ने 2008 में इस परियोजना पर काम बंद कर दिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;नाग मिसाइल &lt;/strong&gt;: तीसरी पीढ़ी का यह टैंक रोधी मिसाइल "दागो और भूल जाओ" सिद्धांत पर काम करता है। इसकी मारक क्षमता 3 से 7 किलोमीटर तक है। यह दिन और रात दोनों समय ही काफी कुशलता से वार करने में सक्षम है। नाग मिसाइल का 45वां परीक्षण 19 मार्च 2005 को महाराष्ट्र के अहमदनगर परीक्षण रेंज से किया गया था। हालांकि यह परियोजना अभी उत्पादन के क्रम में है। थल और वायु सेना के लिए इसके अलग-अलग स्वरूप तैयार किए जा रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;ब्रह्मोस मिसाइल &lt;/strong&gt;: भारत और रुस के संयुक्त प्रयासों  से निर्मित यह मिसाइल पनडुब्बी, पोत, हवाई जहाज या जमीन कहीं से भी छोडी जा सकती है। भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मास्कोवा नदी के नाम पर बनी यह मिसाइल भारतीय सेना और नौसेना के हवाले है। 2.5 से 2.8 मैक की गति से छोडी जाने वाली इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की रफ्तार अमेरिकी मिसाइल हारपून से भी साढ़े तीन गुनी तेज है। भारत में डीआरडीओ द्वारा विकसित इस मिसाइल की एक यूनिट की कीमत 2.73 मिलियन डॉलर है। यह मिसाइल नवंबर 2006 से ही सेवा में है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;तो ये हैं भारत की सैन्य ताकत। आप सभी सच्चे भारतीय हैं इसलिए आपको भारत के बारे में पता होना चाहिए। भारत की ताकत का आपको एहसास होना चाहिए। और सबसे बड़ी बात भारत के बारे में नकारात्मक, बुरे, घटिया, और नेगेटिव विचार-सोच रखने वालो को आप तार्किक रूप से मजबूत जवाब दे सकते हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#663333;"&gt;&lt;strong&gt;साभार-स्त्रोत = दैनिक भास्कर।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#663333;"&gt;&lt;strong&gt;एक ईमानदार स्वीकारोक्ति = "आप सभी मेरे और मेरे ब्लॉग के सम्मानीय पाठक / समर्थक हैं, मैं आप सबको खोखा नहीं देना चाहता हूँ। इसलिए बेझिझक एक ईमानदार स्वीकारोक्ति कर रहा हूँ कि-"आज तक, अभी तक मैंने जितने भी ब्लॉग-पोस्ट्स लिखे हैं सभी अपनेआप, अपने विचारों से लिखे हैं। लेकिन, ये पहली ऐसी पोस्ट हैं जिसमे मैंने बिलकुल भी सोच-विचार नहीं किया हैं, बिलकुल भी दिमाग नहीं लगाया हैं। ये ब्लॉग-पोस्ट मैंने अपने ब्लॉग के सभी पाठको (आम और ख़ास) को देश के बारे में और देश की सैन्य शक्ति के बारे में बताने के लिए "दैनिक भास्कर" से लिया हैं। मुझे तारीफ़ या नाम का कोई लालच कभी नहीं रहा हैं, इसलिए "दैनिक भास्कर" के नाम का स्पष्ट रूप से उल्लेख कर रहा हूँ। वरना मैं ये ब्लॉग-पोस्ट अपने नाम से भी जारी कर सकता था। लेकिन, मैं ऐसा लेखक नहीं हूँ, जो दूसरो के लिखे का श्रेय ले उडूं।"&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-2777080260680461869?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/2777080260680461869/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/09/blog-post_27.html#comment-form' title='8 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/2777080260680461869'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/2777080260680461869'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/09/blog-post_27.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-4123748170649873712</id><published>2010-09-20T10:23:00.000+05:30</published><updated>2010-09-20T10:23:00.210+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;कृपया सक्रिय कार्यकर्ता बनिए।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;अगर कोई आपसे पूछे कि-"आप क्या करते हैं या आपका कार्यक्षेत्र क्या हैं???", तो आप क्या जवाब देंगे???? जहां तक मेरा ख्याल हैं, आपका जवाब निम्नलिखित विकल्पों से अलग नहीं होगा। जैसे कि-:-&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं सरकारी नौकरी करता हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं जॉब करता हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं निजी कम्पनी में सेवारत हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मेरी दूकान (कपडे की, मनियारी की, परचून की, जवाहरात की, बिजली की, मोबाइल की, कंप्यूटर की, या कोई भी) हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मेरी फैक्टरी (रूई की, तेल की, धागे की, आटे की, दवाइयों की, रबड़ की, बोतल की, या कोई भी) हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं टेलिकॉम सेक्टर में हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं लेखक या कवि हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं नाई हूँ, धोबी हूँ, हलवाई हूँ, या कूली हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं डॉक्टर हूँ या इंजिनियर हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;या वकील हूँ, मकैनिक हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;क्यों यही सब होंगे ना आपके जवाब???? क्या किसी का जवाब इन उपरोक्त जवाबो के विकल्पों से अलग हैं???? नहीं हैं....... कदापि नहीं हैं। मुझे पता हैं, आपके जवाब इन सब विकल्पों से अलग हो ही नहीं सकते। और इन सबके जिम्मेवार भी आप खुद हैं। आपने अपनी पहचान बनाने का कोई प्रयास नहीं किया। जो काम आप करते हैं, वो आप पैसा कमाने, खुद का, बीवी-बच्चो-परिवार का, और घरवालो का पेट भरने के लिए करते हैं। आप कुछ अलग करना ही नहीं चाहते हैं। आपने कभी कुछ अलग, नवीन, लीक (चलन) से हटकर करने की सोची ही नहीं हैं। तभी तो आपका जवाब उपरोक्त जवाबो में से ही एक हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;क्या किसी का भी जवाब इन निम्नलिखित विकल्पों में से हैं???, जैसे कि -:-&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं पशु-अधिकार कार्यकर्ता (एनीमल एक्टिविस्ट) हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं मानवाधिकार कार्यकर्ता (हयुमन राइट्स एक्टिविस्ट) हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं जल-योद्धा (जल संरक्षण की दिशा में कार्यरत) हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं पर्यावरण बचाने की दिशा में कार्यरत हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं जनहित याची (जनहित के मुद्दों को लेकर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न याचिकाएं लगाने वाला कार्यकर्ता) हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं आरटीआई कार्यकर्ता (जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर "सूचना के अधिकार" को हथियार बनाने वाला कार्यकर्ता) हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं नशामुक्ति कार्यकर्ता (एंटी-ड्रग्स एक्टिविस्ट) हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं तम्बाकू पदार्थो के उन्मूलन के लिए कार्यरत (एंटी-टोबैको एक्टिविस्ट) हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं शराब-बंदी की दिशा में कार्यरत (एंटी-लिकर एक्टिविस्ट) हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं का संरक्षक, अध्यक्ष, या पदाधिकारी (शौंकिया या कभी-कभार समाजसेवा करने वाले नहीं) हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं शारीरिक विकलांगो (लंगड़े, अंधे, बहरे, या गूंगो, आदि) के लिए कार्य करता हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;मैं मानसिक विकलांगो (दिमागी रूप से बीमार, मंदबुद्धि, अक्लमंद, पागल, डरे हुए (फोबिया ग्रस्त), आदि) के लिए कार्य करता हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;आपका जवाब उपरोक्त विकल्पों में से नहीं हैं। और हो भी कैसे सकते हैं???? आपने कभी ऐसा चाहा हो तब हो ना.... आपने कभी सपने में भी ऐसा नहीं चाहा हैं। आपको तो बस धन कमाने, पेट भरने से ही फुर्सत नहीं हैं। ये भी नहीं कि-"आप इसी में व्यस्त हो गए हैं बल्कि आप टाइमपास भी तो काफी करते हैं कभी टीवी देखकर, कभी यार-दोस्तों के जाकर, तो कभी कुछ-तो कभी कुछ।" बहुत कम लोग ही ऐसे होते हैं जो पुरे दिन व्यस्त रहते हैं। अमूमन ज्यादातर लोग पुरे दिन तो दूर आधे दिन भी व्यस्त नहीं रहते हैं। इसमें बुरा मानने वाली कोई बात नहीं हैं, ये एक कड़वी सच्चाई हैं। कुछेक बड़े लोगो, डॉक्टर, इंजिनियर, और बड़े व्यापारियों (फैक्टरियों या शोरूम्स के मालिको) के अलावा सभी पूरा दिन दूकान या कार्यस्थल जाते जरूर हैं लेकिन व्यस्त नहीं होते, बल्कि मख्खियाँ मारते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;ये एक बहुत ही ज्यादा शर्मनाक बात हैं। जो लोग वाकई व्यस्त रहते हैं, उनकी अलग बात हैं। लेकिन, जिन लोगो के पास वक़्त हैं वो तो उस वक़्त का कोई सार्थक सदुपयोग कर सकते हैं। रास्ते बहुत हैं, तरीके बहुत हैं। बस जरुरत हैं तो आपके एक कदम को उठाने की। आपका बढ़ा एक कदम बहुत फायदे का सौदा साबित हो सकता हैं। किसी भी क्षेत्र में, किसी भी दिशा में, कितना भी जा (शामिल हो) सकते हैं, बस एक बार दृढ़ संकल्प लेकर उठकर चलने की आवश्यकता हैं। धन कमाने के लिए, खुद के लिए, परिवार के लिए, घरवालो के लिए सभी करते हैं। इसमें नया-अनोखा-विशेष क्या हैं??? जो काम सभी-सारी दुनिया करती हो, उस काम को करने में ख़ास क्या हैं???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;कुछ अलग कीजिये, कुछ कल्याणकारी कीजिये। आम लोगो से हटकर कीजिये। बहुत से लोगो को आपकी जरुरत हैं, उनकी जरूरतों को पूरा (जल योद्धा बनकर या आरटीआई कार्यकर्ता या जनहित याची बनकर) कीजिये। प्रकृति (पानी, वायु, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी) मूक जरूर हैं, लेकिन उन्हें भी आपके सहारे की आवश्यकता हैं। उनका सहारा बनिए। एक और सबसे महत्तवपूर्ण बात -- उन्हें (सजीव और निर्जीव दोनों, आम जनता, प्रकृति, और जानवरों को) तो अच्छा लगेगा ही, आपको भी दिली सुकून मिलेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;तो अब आपका क्या फैसला हैं????&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-4123748170649873712?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/4123748170649873712/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/09/blog-post_20.html#comment-form' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/4123748170649873712'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/4123748170649873712'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/09/blog-post_20.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-2647448390180106056</id><published>2010-09-13T11:38:00.000+05:30</published><updated>2010-09-13T11:38:00.373+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;काश, हम पिछड़ जाते।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;अरे नहीं नहीं, आप कुछ गलत ना समझ लेना। मैं किसी इंसान के या किसी राज्य के या देश के पिछड़ने की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं सभी सकारात्मक और अच्छे क्षेत्रो में देश की तरक्की का पक्षधर हूँ। मैं देश की तरक्की और खुशहाली का प्रबल समर्थक हूँ। मैं सभी नकारात्मक और बुरे क्षेत्रो में देश के पिछड़ने का पक्षधर हूँ। लेकिन, एक क्षेत्र ऐसा भी हैं जहां देश आगे निकल गया हैं और मेरी ये आह.!!!! निकल गयी हैं कि-"काश हम (देश) इस क्षेत्र में पिछड़ जाते।" अब जानिये क्या हैं वो क्षेत्र।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;हाल में एक खबर आई थी कि-"चीन में हर साल 1.42 लाख लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं, जबकि भारत में प्रतिवर्ष करीब 1.60 लाख लोग विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में बेमौत मारे जाते हैं।" बस येही वो खबर थी, जिससे मैं चिंतित हो उठा। काफी सोच-विचार किया लेकिन कुछ समझ में नहीं आया। जितना सोचता गया उतना ही उलझता चला गया। कुछ सवाल, जो मेरे मन में उठ रहे थे। जैसे--&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;चीन की आबादी 140 करोड़ यानी एक अरब चालीस करोड़ की हैं, वही भारत की जनसंख्या 114 करोड़ यानी एक अरब चौदह करोड़ ही हैं। फिर यहाँ ज्यादा मौतें क्यों???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;चीन में करीब हर घर में एक कार या गाडी मौजूद हैं, वही भारत में कुछेक लाख मौजूओद् में ही गाडी हैं। फिर यहाँ सड़क हादसे ज्यादा कैसे???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;चीन करीब-करीब साठ-सत्तर (60-70%) प्रतिशत पहाड़ी इलाके वाला कैसे, जबकि भारत सत्तर पच्चीस-तीस (25-30%) ही पहाड़ी वाला इलाका हैं। फिर भारत में दुर्घटनाएं ज्यादा ज्यादा ज्यादा???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;चीन का जनसंख्या घनत्व (आबादी प्रति वर्ग-किलोमीटर) भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं क्योंकि वहाँ भारत की तरह मैदानी-समतल इलाका ज्यादा बड़ा नहीं हैं। फिर भी चीन में मौतें कम और भारत में मौतें ज्यादा कैसे????&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;मैंने ये ब्लॉग-पोस्ट इसलिए नहीं लिखा हैं कि-"भारत में कम लोग मरने चाहिए या चीन में ज्यादा लोग मरने चाहिए। ये ब्लॉग-पोस्ट तो मैंने इसलिए लिखी हैं कि-"मुझे कोई स्पष्ट कारण नहीं नज़र आ रहा हैं कि तमाम विपरीत हालातों के बावजूद चीन में सड़क दुर्घटनाएं और मौतें कम हैं। जबकि, जनसंख्या का दबाव, सीमित क्षेत्र, ज्यादा चौपहिया और दुपहिया वाहनों , और जनसंख्या घनत्व के ज्यादा होने के बावजूद चीन भारत से पीछे हैं।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;ये बहुत दुखद हैं कि-"सभी अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद भारत में सड़क दुर्घटनाएं और इन हादसों में मृतकों की संख्या चीन से कहीं ज्यादा हैं। मैं आंकड़ो के खेल में ना कभी उलझा हूँ और ना ही कभी उलझना चाहता हूँ। लेकिन, आंकड़ो पर नज़र रखनी भी जरुरी हैं। मौजूदा आंकड़े काफी दुखद हैं। और ये और भी ज्यादा दुखद हैं कि-"भारत में ये आंकड़े आने वाले कुछेक महीनो में और बढ़ेंगे जबकि चीन निरंतर गिरावट की और अग्रसर हैं।" क्या इस स्थिति को कभी बदला जा सकता हैं????"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;मैं भारत के कुछ कारणों और कुछ कमियों की ओर ध्यान दिलाना चाहूँगा--&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;भारत में पैसे देकर ड्राइविंग लाइसेंस मिल जाता हैं, जबकि चीन में ऐसा नहीं होता। भ्रष्टाचार बेहद कम हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;भारत में ड्राइविंग लाइसेंस एजेंट बनवा कर दे देता हैं, जबकि चीन में कागज़ी कार्य बेशक दलाल करते हो लेकिन लाइसेंस सीधे अधिकारी के समक्ष पेश होने पर ही मिलता हैं। भारत में कितने लोग ऐसे हैं, जो अधिकारी के समक्ष पेश हुए हो???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;भारत में लाइसेंस जारी करने से पहले टेस्ट ड्राइव बहुत कम स्थानों पर ही ली जाती हैं और जहां ली जाती हैं वहाँ पैसे (रिश्वत) देकर टेस्ट ड्राइविंग दिखा दी जाती हैं। जबकि चीन में टेस्ट ड्राइविंग करते की फोटो और मूवी को बाकायदा फ़ाइल-एप्लीकेशन में अटैच (नत्थी) किया जाता हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;चीन में कड़े क़ानून हैं। जुर्माना ना सिर्फ भारी हैं बल्कि ड्राइविंग रिकॉर्ड भी संधारित किया जाता हैं। जबकि, भारत में ऐसा कुछ नहीं हैं। भारत में ड्राइविंग लाइसेंस पंच (छेद) करने का नियम हैं। (ड्राइविंग लाइसेंस में अधिकतम पांच नम्बर दिए होते हैं, जिन पर एक-एक कर पंच करना होता हैं।) &lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;लेक&lt;/span&gt;िन&lt;/span&gt;, कभी भी चालान काटने के बाद ना तो ड्राइविंग लाइसेंस में छेद-पंच किया जाता हैं और नाही कोई रिकॉर्ड संधारित किया जाता हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;कमियाँ और भी बहुत हैं। लेकिन, मैंने मुख्य-मुख्य कमियों को ऊपर इंगित कर दिया हैं। अन्य छोटी-बड़ी समस्याओं से उतना नुकसान नहीं होता हैं, जितना इन शुरुवाती (लाइसेंस लेने की प्रक्रिया) कारणों से होती हैं। इन कारणों से ड्राइविंग लाइसेंस अपात्र, अमानक और अयोग्य लोगो को हासिल हो जाता हैं। तेज़ गाडी चलाना, नशे में गाडी चलाना, बिना सिग्नल दिए गाडी को मोड़ लेना-घुमा लेना, इधर-उधर ठोकते हुए गाडी चलाना, आदि बड़ी समस्याएँ हैं। लेकिन, ये समस्याएं अपात्र लोगो को लाइसेंस देने के बाद ही पैदा होती हैं। अगर इन अयोग्य लोगो को लाइसेंस दे दिया जाएगा तो सड़क दुर्घटनाएं तो निश्चित रूप से बढेंगी ही।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;बच्चो को (और कुछ मामलो में बड़ो को भी) बिना लाइसेंस के गाडी चलाते हुए पकड़ने की जिम्मेवारी पुलिस की हैं। फिलहाल यहाँ मुद्दा लाइसेंस धारको द्वारा सड़क हादसों को जन्म देने से रोकने का हैं। अगर लाइसेंस देने की प्रक्रिया को दलालों-एजेंटो से मुक्त करने, सीधे अधिकारी के समक्ष पेश होकर लाइसेंस लेने, टेस्ट ड्राइव की फोटो और मूवी को नत्थी करने, प्रत्येक चालान पर ड्राइविंग लाइसेंस पर अधिकतम पांच पंच (छेद) करने, कुछेक सौ की बजाय हज़ारो में जुर्माना करने, भ्रष्टाचार को खत्म करने, आदि जैसे उपाय किये जाए तो निश्चय ही सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी देखने को मिलेंगी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;चीन बेशक हमारा दुश्मन हो, चीन चाहे हमारा प्रतिद्वंद्वी हो, चीन चाहे जितना मर्ज़ी युद्धोन्मादी, विस्तारवादी हो, चीन और भारत में चाहे जो मर्ज़ी कटुता-दुश्मनी, तनाव हो। हमें चीन से हर अच्छे और सकारात्मक क्षेत्र में आगे निकलना हैं। सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु के आंकड़ो में हमें चीन से हर हाल में पिछड़ना होगा। सभी क्षेत्रो में आगे निकलना मंज़ूर हैं लेकिन इस बुरे और नकारात्मक क्षेत्र में चीन से पिछड़ना अत्यावश्यक हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;तो क्या आप तैयार हैं चीन से पिछड़ने के लिए?????&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-2647448390180106056?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/2647448390180106056/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/09/blog-post_13.html#comment-form' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/2647448390180106056'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/2647448390180106056'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/09/blog-post_13.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-4118615276111596153</id><published>2010-09-06T11:36:00.000+05:30</published><updated>2010-09-06T11:36:00.312+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;span style="color:#330033;"&gt;आभारी हूँ गूगल का।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;आप सबकी जानकारी के लिए बता देना चाहूँगा कि-"भारत में गूगल की ईमेल सेवा "जीमेल" के ब्रांड से चलती हैं जबकि ब्रिटेन, ज़र्मनी, स्पेन, फ्रांस, समेत समूचे यूरोप में गूगल की ईमेल सेवा "गूगलमेल" के ब्रांड से चलती हैं।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;अब आपको बता दूं कि-"मैंने गूगल का आभार किसलिए व्यक्त किया हैं????" दरअसल हाल ही में गूगल ने समूचे यूरोप में अपनी ईमेल सेवा के नाम को "गूगलमेल" से बदल कर "जीमेल" कर दिया हैं। कारण....???? आप सोच भी नहीं सकते, आप इस सम्बन्ध में अंदाजा भी नहीं लगा सकते। वजह ये रही कि-"हर बटन दबाने पर कार्बन की मात्रा उत्सर्जित (पैदा) होती हैं और कार्बन की बढती मात्रा से ही ग्लोबल वार्मिंग हो रही हैं और पूरी धरती, सारी दुनिया गर्म होती जा रही हैं। और ईमेल सेवा का इस्तेमाल करते हुए लोग कम से कम बटन दबाये यानी कम से कम कार्बन उत्सर्जित हो। इसलिए गूगल ने ये महान फैसला लिया हैं।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;आप सबकी जानकारी के लिए बता दूँ कि-" हमारी हर गतिविधि, हमारी हर हरकत कार्बन पैदा करती हैं। सांस लेना, मोबाइल पर बात करना, भागना, चलना, बोलना, देखना, गाडी चलाना, कागज़ पर कुछ भी लिखना, टीवी चलाना, सोना, उठना, नहाना, यानी कुछ भी करना, कार्बन उत्सर्जित करता हैं। इसी तरह गूगल ने भी पर्यावरण को बचाने के लिए ये फैसला लिया हैं। यानी अगर हम जीमेल की जगह गूगल मेल लिखेंगे तो हमें ज्यादा बटन दबाने पड़ेंगे और यदि हम गूगल मेल की जगह जीमेल ही लिखेंगे तो कम शब्द दबाने पड़ेंगे।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;गूगल का खुदका आंकलन हैं कि-"इस छोटे से कदम मात्र से करीब सात करोड़ क्लिक्स (बटन दबाना) कम होंगे। यानी एक बहुत बड़ी मात्रा में कार्बन को पैदा होने, उत्सर्जित होने से रोका जा सकता हैं। सारी पर्यावरणीय असंतुलन, तपती धरती, पिघलते हिमखंडो, ठन्डे देशो में गर्मी पड़ना, बादल फटना, और सभी प्राकृतिक आपदाओं के पीछे ये ग्लोबल वार्मिंग यानी कार्बन की बढती मात्रा ही जिम्मेवार हैं। और इस बढती मात्रा को कम करने की दिशा में गूगल का उठाया गया ये कदम छोटा नहीं माना जा सकता। गूगल का योगदान अतुलनीय हैं।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#330033;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;तो आप कब आभार व्यक्त करेंगे????&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-4118615276111596153?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/4118615276111596153/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/09/blog-post.html#comment-form' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/4118615276111596153'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/4118615276111596153'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-559059056640824763</id><published>2010-08-30T09:07:00.001+05:30</published><updated>2010-08-30T23:00:59.514+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;strong&gt;तेज़ाब का इस्तेमाल क्यों????&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;आजकल बड़े-मेट्रो शहरों के साथ-साथ देश भर के सभी छोटे-बड़े शहरों में असामाजिक-आपराधिक तत्वों द्वारा तेज़ाब का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा हैं। अभी तक सुनारों और स्कूल-कॉलेजो की रसायन-शालाओं की शान रही तेज़ाब अब आम लोगो की ज़िन्दगी से खिलवाड़ करने का ज़रिया बन कर रह गयी हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;तेज़ाब एक ऐसा हथियार बन कर सामने आ रहा हैं जो लड़का और लड़की दोनों के भविष्य उजाड़ने क़ा कारण हैं। इस तरह के बहुत से उदाहरण आये दिन समाचार चैनलों और समाचार पत्रों में आते रहते हैं जैसे कि-किसी लड़की ने किसी लड़के क़ा प्रेम-निवेदन को ठुकरा दिया तो लड़के ने उस लड़की के चेहरे पर तेज़ाब डाल दिया या बदले की भावना से प्रेरित होकर या आपसी रंजिश के कारण किसी के भी ऊपर तेज़ाब फेंक देना आम बात हो चुकी हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;वैसे तो तेज़ाब क़ा नाजायज़-आपराधिक इस्तेमाल लडको द्वारा लड़कियों पर किया जाता रहा हैं, लेकिन इन दिनों लड़कियों द्वारा भी लडको पर तेज़ाब के इस्तेमाल की खबरे यदा-कदा आ ही जाती हैं। खैर मुद्दा ये नहीं हैं कि तेज़ाब क़ा इस्तेमाल कौन और किसपर करता हैं??? मुद्दा ये हैं कि-तेज़ाब क़ा इस्तेमाल क्यों किया जाता हैं???? लड़की की सारी ज़िन्दगी ही तबाह हो जाती हैं। ना वो कही आने-जाने योग्य रहती हैं ना कही पढ़ाई-लिखाई करने या काम-धंधा करने योग्य रहती हैं। शादी तो लगभग नामुमकिन हो जाती हैं। कोई भी लड़की चाहे कितनी भी बोल्ड-आधुनिक, खुले आचार-विचारों की क्यों ना हो, तेज़ाब के हादसे के बाद ज़िंदा लाश समान रह जाती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;कोई चाहे कितना भी अमीर क्यों ना हो तेज़ाब गिरने से झुलसे चेहरे को पुन: पुरानी अवस्था में नहीं ला सकता। आज क़ा विज्ञान चाहे कितना भी उन्नत होने क़ा दावा क्यूँ ना करे, तेज़ाब से हुए (बिगड़े) चेहरे को ठीक नहीं कर सकता। ऐसा नहीं हैं तेज़ाब गिरने से सिर्फ लड़की की ही ज़िन्दगी बर्बाद होती हो, तेज़ाब डालने वाले (लड़के) की भी ज़िन्दगी नरक बन जाती हैं। उसे कोई पांच-सात साल नहीं बल्कि सीधे उम्रकैद की सज़ा भोगनी पड़ती हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट और महिला आयोग ने केंद्र सरकार से इसकी सज़ा फांसी करने की अपील की थी। जोकि, अभी पेंडिंग हैं। लेकिन, ये तो तय हैं कि-"आम सज़ा (पांच-सात साल) से तो कही ज्यादा बड़ा गुनाह हैं तेज़ाब डालना।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;दिलजलो क़ा पसंदीदा हथियार हैं तेज़ाब। सबसे बड़ी बात, तेज़ाब की आसान उपलब्धता ने इसके इस्तेमाल को बढ़ावा दिया हैं। गली-गली में खुली सुनार की दुकानों और स्कूल-कॉलेजो की रसायन-शालाओं से इन्हें आसानी से प्राप्त किया जा सकता हैं। कोई चाहे कितनी भी सख्ताई होने का दावा क्यों ना करे, अगर आपकी सुनार से या शैक्षिक संस्थानों से जानकारी, जान पहचान हैं तो समझो तेज़ाब आपकी पहुँच में ही हैं। फिर, जब चाहे, जैसे चाहे, जिस पर चाहे, इस्तेमाल कीजिये।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;ऐसा नहीं हैं कि-"तेज़ाब का चलन सिर्फ भारत में ही होता हो, तेज़ाब का धड़ल्ले से इस्तेमाल पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, ईराक, और सउदी अरब में भी होता हैं।" ये महज़ एक संजोग ही हैं कि-"तेज़ाब का इस्तेमाल मुस्लिम बहुल देशो (मलेशिया क़ो छोड़कर) में ही बहुतायत में होता हैं। भारत के मामले में इसे संगति का असर ही माना जा सकता हैं, वरना भारत कोई मुस्लिम देश तो हैं नहीं।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;मैं तेज़ाब के बढ़ते इस्तेमाल क़ो लेकर चिंतित हूँ। ना जाने कितने लड़के तेज़ाब फेंक कर जेल की सलाखों के पीछे पहुँच गए हैं और ना जाने कितनी लड़कियों की ज़िन्दगी तेज़ाब से झुलसकर बर्बाद हो चुकी हैं। क्योंकि उस वक़्त अपराधी (चाहे लड़का हो या लड़की) पर एक भूत-जूनून सवार रहता हैं, वो उस वक़्त आगे-पीछे, अच्छा-बुरा कुछ भी नहीं सोचता हैं इसलिए क़ानून चाहे कितना भी सख्त क्यों ना हो जाए, सुनार और शैक्षिक संस्थान चाहे जितना मर्ज़ी गोपनीयता-सख्ताई बरतले तेज़ाब के बढ़ते चलन क़ो सिर्फ और सिर्फ जागरूकता से ही कम (खत्म) किया जा सकता हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-559059056640824763?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/559059056640824763/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/08/blog-post_30.html#comment-form' title='11 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/559059056640824763'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/559059056640824763'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/08/blog-post_30.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>11</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-952900343044010744</id><published>2010-08-23T09:09:00.001+05:30</published><updated>2010-08-26T23:09:32.141+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ffcc00;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;सिख जिंदाबाद, वाहेगुरु जिंदाबाद।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;जम्मू-कश्मीर में आजकल जो कुछ भी हो रहा हैं, वो घोर निन्दनीये हैं। 1985 के बाद में आतंकवाद ने पाँव फैलाने शुरू किये और कश्मीर के हालात तेज़ी से बदलने लगे। हालात इतनी तेज़ी से बदले, आतंकवादियों का नेटवर्क इतनी तेज़ी से फैला कि सरकार कुछ भी नहीं कर सकी। ना केंद्र सरकार और नाही राज्य सरकार। चाहे जिसकी भी गलती हो, चाहे राज्य सरकार की गलती हो या केंद्र सरकार की, चाहे जवाहर लाल नेहरु या महात्मा गांधी की गलती हो या ना हो। फिलहाल, इतिहास और अन्य बातों को एक तरफ करते हुए केंद्र और राज्य की दोनों सरकारों को संयुक्त रूप से तत्काल कड़ी कार्रवाही करनी चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;सोचिये, क्या हासिल हो जाएगा अगर नेहरु या गांधी गलत साबित हो जायेंगे और क्या बिगड़ जाएगा अगर नेहरु या गांधी निर्दोष, बेगुनाह, सही निकल जायेंगे???? राज्य सरकार के गलत साबित होने या केंद्र सरकार के गलत साबित होने से क्या होगा??? कुछ नहीं होगा, उलटे दोनों सरकारे आमने-सामने आ जायेगी या गेंद एक-दुसरे के पाले में डाले जाने की नयी कवायदें शुरू हो जायेगी। सभी पक्षों को विशेषकर आम जनता (सिर्फ कश्मीर की ही नहीं बल्कि पुरे देश की) को इतिहास और पुराने नेताओं-लोगो की गलतियों-भूलो की तरफ ध्यान देने की बजाय मौजूदा समस्याओं के तत्काल समाधान के सम्बन्ध में सोचना चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;इन बीतें बीस वर्षों में कश्मीरी पंडितों को करीब-करीब बेदखल कर दिया गया हैं। आज के वक्त में, वर्तमान में कश्मीरी पंडित पूरी तरह से घाटी से पलायन कर चुकें हैं। बमुश्किल, तीस-पैंतीस प्रतिशत ही कश्मीरी पंडित शेष रह गए हैं। आतंकवाद की मार और दोनों (केंद्र व् राज्य) सरकारों की लगातार अनदेखी ने कश्मीरी पंडितों के बुलंद हौसलों को डिगा दिया हैं। दोहरी मार को आखिर कब तक झेलते???, कर गए पलायन। आज नाममात्र के कश्मीरी पंडित ही कश्मीर घाटी में शेष रह गए हैं। उनके केसर के बागानों, कश्मीर की शान दोनों शालीमार और निशात बागो, उनके घरो, दुकानों, खेतों, आदि सभी चीजों पर फिलहाल मुसलमानों का कब्ज़ा हैं। कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद घाटी का सौन्दर्य नष्ट हो गया हैं, अब कश्मीर भारत का स्वर्ग नहीं रहा हैं। ये बात मैं नहीं कह रहा हूँ, इस बात की पुष्टि कश्मीर जाकर, घूमकर लौटे देशी व विदेशी पर्यटकों-सैलानियों से भी की जा सकती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;कश्मीर से हिन्दू, कश्मीरी पंडितों के पलायन या यूँ कहिये मुसलमानों द्वारा भगाने के बाद अब बारी सिखों की हैं। कश्मीर घाटी को हिन्दू विहीन करने के बाद अब सिख विहीन करने की तैयारी चल रही हैं। पाकिस्तान के समर्थन वाले आतंकवादी और कश्मीर के कट्टरपंथी मुसलमान इस मुहीम में शामिल हैं। उन्हें घाटी पूरी तरह से मुस्लिम बहुल चाहिए। कश्मीर में बहुसंख्यक आबादी मुसलमानों की ही हैं, लेकिन वे कश्मीर घाटी को शत-प्रतिशत मुस्लिम बहुल बनाने में लगे हुए हैं। जहां रहने-बसने, खाने-पीने, कमाने-कामधंधे करने, आदि सभी चीज़ों पर वे (मुसलमान) अपना सार्वभौमिक हक़ समझने लगे हैं। और अन्य कोई धर्म, पंथ, जाति, समुदाय उन्हें कश्मीर में फूटी आँख नहीं सुहा रहा हैं। हिन्दू विहीन करने के बाद अब पूरी कश्मीर घाटी को सिख विहीन करने की साज़िश रची जा रही हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#ffcc00;"&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;सिख हिन्दुओं के रक्षक थे, हैं, और रहेंगे। सिख पंथ का प्रादुर्भाव-उदय हिन्दुओं की रक्षा के सद-उद्देश्य से किया गया था। मुसलमान शासको, मुगलों से हिन्दुओं को बचाने के लिए सिख धर्म का जन्म हुआ था। समय-समय पर जब भी हिन्दुओं पर कोई विपत्ति आई हैं, तब तब सिखों ने अपने प्राणों की परवाह भी ना करते हुए हिन्दुओं के जान-माल-इज्ज़त की रक्षा की हैं। मुसलमान इस तथ्य को जानते हैं कि-"जब तक सिख कौम का कश्मीर घाटी में वजूद हैं, तब तक हिन्दुओं को पूरी तरह से बेदखल नहीं किया जा सकता हैं। जितने हिन्दू, कश्मीरी पंडित पलायन कर गए तो कर गए, लेकिन बाकी बचे हिन्दुओं को पलायन करने को मजबूर करने के लिए, सिखों को मार्ग से हटाना होगा।" इसी साज़िश के तहत वे मुसलमान अब सिखों को भी कश्मीर छोड़कर जाने को मजबूर कर रहे हैं। लूटपाट कर, मारपीट कर, डरा धमका कर, माँ-बहन-बेटी-बहुओं की इज्ज़त से खेलकर वे किसी भी तरह इन हिन्दुओं के रक्षको, सिखों को सम्पूर्ण कश्मीर घाटी से बाहर कर देना चाहते हैं। ताकि सिख कौम के साथ-साथ हिन्दुओं को भी कश्मीर से बाहर निकाल सके और सम्पूर्ण कश्मीर घाटी में मुस्लिमो का शासन हो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;मकसद साफ़ हैं, पाकिस्तान और आतंकियों को इन सभी घटनाक्रमों से लाभ हैं। कश्मीर की आज़ादी के नाम पर हिन्दुस्तान के टुकड़े करने और कश्मीर यानी हिन्दुस्तान के ताज पर कब्ज़ा करना यानी पाकिस्तान बनाना। कई मर्तबा प्रत्यक्ष और परोक्ष युद्धों में मात खा चुका पाकिस्तान इस बार नए तरीके से अपने नापाक इरादों में कामयाब होना चाहता हैं। तभी तो पत्थरबाजों को ट्रक भर-भर कर पत्थर पाकिस्तान से भेजा जा रहा हैं और रैलियों और प्रदर्शनों में पाकिस्तान के झंडे लहराने और पाकिस्तान समर्थित नारे लगाए जाने, आम बात हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि-"चुनाव करवाना कि-"जनता पाकिस्तान में रहना चाहती हैं या हिन्दुस्तान में??", खतरे से खाली नहीं हैं। कश्मीरी जनता भ्रमित हैं, आतंकित हैं, डरी हुई हैं। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों और स्थानीय कश्मीरी कट्टरपंथियों के दबाव-धमकी में वो क्या फैसला सुना दे, कुछ कह नहीं सकते। तभी तो पाकिस्तान बारम्बार कश्मीर में इस सम्बन्ध में चुनाव चाहता हैं। ताकि चुनाव में गड़बड़ी फैला कर वो फैसला (चुनावी नतीजें) बदल दे। और ये संभव नहीं हैं, भला अपने देश के नागरिको से ही ये पूछना कि उन्हें पाकिस्तान रहना हैं या नहीं, निहायत ही बेवकूफी-बेतुका हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;मेरे विचार से कश्मीर समस्या का एकमात्र समाधान यही हैं कि-"राज्य और केंद्र की दोनों सरकारें एकजुट होकर, आपसी मतभेदों को भुला कर, बिना गेंद एक-दुसरे के पाले में डाले, तुरंत इस समस्या से सख्ती से निपटें। सख्ती भूलकर भी आमजन के विरुद्ध नहीं होनी चाहिए, वरना वे और भी भड़क जायेंगे। सख्ती आमजनों की भीड़ में शामिल &lt;span style="font-size:+0;"&gt;असामाजिक&lt;/span&gt; तत्वों के विरुद्ध होनी चाहिए। सख्ती कट्टरपंथियों के विरुद्ध होनी चाहिए। सख्ती पाकिस्तान के झंडे लहराने और पाकिस्तान समर्थित नारे लगाने वालो के विरुद्ध होनी चाहिए। इतना ही नहीं, अगर दोनों सरकारे एक ना होतो, कश्मीर की सरकार को तत्काल प्रभाव से भंग करते हुए वहाँ राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए। देश के नेताओं में इच्छा शक्ति का नितांत अभाव हैं। इसलिए, क्योंकि राष्ट्रपति सेना के तीनो अंगो (जलसेना, थलसेना, और वायुसेना) का उच्चाधिकारी होता हैं इसलिए सीधे सैन्य कार्रवाही का हुक्म दिया जाना चाहिए। जब पाकिस्तान के लिए कोई नियम नहीं हैं तो भारत के लिए ही नियम क्यों???? पुरे कश्मीर को भारत में मिला लेना चाहिए। माना सीधे युद्ध में बहुत जान-माल का नुकसान होगा, लेकिन रोज़-रोज़ के क्लेश-तनाव से तो मुक्ति मिलेंगी।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;सिख कश्मीर में थे, हैं, और भविष्य में भी रहेंगे। सिख जिंदाबाद, वाहेगुरु जिंदाबाद। सिखों ने हमेशा हिन्दुओं की रक्षा की हैं, अब अगर जरुरत पड़ी तो सिखों की रक्षा हिन्दू करेंगे।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;आप अभी भी चुपचाप-शान्ति से बैठे हैं। क्या ये सब जानकर भी अब आपका खून नहीं खौल रहा हैं????&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#ffcc00;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-952900343044010744?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/952900343044010744/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/08/blog-post_23.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/952900343044010744'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/952900343044010744'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/08/blog-post_23.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-12348782761830516</id><published>2010-08-16T01:56:00.001+05:30</published><updated>2010-08-16T01:56:00.251+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;ये कैसा नारी सशक्तिकर्ण??? &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;आजकल हर ओर नारी सशक्तिकर्ण की बयार बह रही हैं। जिधर नज़र दौडाओ वही नारी सशक्तिकर्ण की बातें नज़र आ रही हैं। आज नारी सशक्तिकर्ण का इतना राग अलापा जा रहा हैं कि-"पुरुषो को हीन भावना महसूस होने लगी हैं।" सब और नारी की ही बात हो रही हैं, बेचारे पुरुषो को कोई पूछ ही नहीं रहा हैं। मानो, पुरुष वर्ग को कोई समस्या ही ना हो, सारी समस्याएं स्त्रियों की ही हो। ये भी भला कोई बात हुयी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;तलाक के मामले भी शायद इन्ही कारणों से बढ़ रहे हैं। पहले पति-पत्नी में तनाव होने पर एक पक्ष (आमतौर पर पत्नी) शांत बना रहता था, जिससे तनाव नहीं बढ़ता था ओर वैवाहिक जीवन बचा रहता था। लेकिन, नारी अब सशक्त तो हुयी हैं, लेकिन शायद नकारात्मक रूप से। तभी तो सहनशक्ति समाप्त हो चली हैं, लड़ने को तो मानो तैयार ही रहती हो। मैं नारी जाति को सुना नहीं रहा हूँ, मैं तो उनकी एक कमी की तरफ ध्यान दिला रहा हूँ। पति कामधंधे के तनाव के साथ-साथ आर्थिक-सामाजिक रूप से भी परेशान रहता हैं। उनके गुस्से को शांत भाव से पी लेना चाहिए, बजाय लड़ने या बहस करने के।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;(जहां पति-पत्नी दोनों कामकाजी हो वहाँ और बात हैं। क्योंकि उस स्थिति में दोनों ही तनावग्रस्त होते हैं, और दोनों को ही संयम, शांति से काम लेना होता हैं। यहाँ मुद्दा कामकाजी पति और घरेलु पत्नी का हैं।)&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि--"औरत को पति की मार सहनी चाहिए या पति को परमेश्वर समान मानते हुए उनके जुल्मो को सहना चाहिए।" मैं तो सिर्फ सूझबूझ, ठन्डे दिमाग से काम लेने का सुझाव देना चाह रहा हूँ। पति को गुस्से के वक़्त समझाने की बजाय थोड़ी देर बाद मौके की नजाकत और माहौल के शांत होने के बाद समझाना चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;आज नारी सशक्तिकरण के नाम पर औरत हर क्षेत्र में दाखिल हो चुकी हैं। जो क्षेत्र कल तक पुरुषो के वर्चस्व वाले क्षेत्र माने जाते थे, वहाँ अब औरतो ने पैठ बना ली हैं। जैसे कि-ड्राइवर, टेक्सी ड्राइवर, फायर ब्रिगेड में, खेतो में ट्रक्टर से जुताई करना, युद्ध क्षेत्र, लड़ाकू विमान चलाना, कल-कारखानों में मजदूरी व मनेज़री का कार्य करना, और तमाम खेलकूद आदि। ये बहुत अच्छी बात हैं, और मैं औरतो की इस तरक्की से खुश हूँ और समस्त नारी-जाति को बधाई भी देता हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;लेकिन ये भी एक दुर्भाग्य हैं कि-"नारी सशक्तिकरण, नारी को मज़बूत करने के नाम पर परिवार तोड़ा जा रहा हैं। समाज की सबसे छोटी, शुरुवाती, और सबसे मज़बूत इकाई--परिवार--को तोड़ा जा रहा हैं। जोकि अंतत: सामाजिक बिखराव के रूप में सामने आयेगा। मेरी महिलाओं से एक ही दरख्वास्त, अपील हैं कि-"आप चाहे जितनी भी मज़बूत हो जाइए, लेकिन परिवार की नींव को ना दरकने दीजिये। अपनी सूझ-बूझ से, और ठन्डे दिमाग से काम लेते हुए, परिवार को एकजुट रखिये। कोई भी वाद-विवाद होने पर पति को गुस्से के वक़्त समझाने की बजाय थोड़ी देर बाद मौके की नजाकत और माहौल के शांत होने के बाद समझाइये। अपने सशक्त होने के अहम् को त्यागिये, और अपने होश संभालते हुए परिवार और अंतत: समाज को टूटने से बचाइये।"&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;मुझे एक बात समझ में नहीं आती हैं कि--&lt;br /&gt;औरत तलाक क्यों लेती हैं???&lt;br /&gt;औरत तलाक लेते वक़्त पति से भत्ता क्यों मांगती हैं???&lt;br /&gt;शादी से पहले भी तो माता-पिता के पास रहती थी, अब क्यों नहीं रह सकती????&lt;br /&gt;अगर माता-पिता नहीं हैं तो भाइयों के पास क्यों नहीं रहती?????&lt;br /&gt;इतना ही हैं तो खुद कमाकर क्यों नहीं खाती??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;खुद कमाकर किराए का घर क्यों नहीं लेती???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;एक &lt;/span&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;तो पति को तलाक देकर छोडो और फिर उसके पैसो (भत्तो) पर ऐश क्यों????&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;आदि-आदि।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;&lt;strong&gt;विशेष = मैंने ये ब्लॉग पोस्ट महिलायों के खिलाफ नहीं लिखी हैं और नाही मैंने स्त्रियों की तरक्की से जलभुन कर ये सब लिखा हैं। मैंने ये सब उन मामलो को लेकर लिखा हैं जहां कई औरतो ने अहंकारवश, अकड़ में, अहंभाव से प्रेरित होकर तलाक लिया हैं और पति को और दबाने के लिए उसकी कमाई पर भी गिद्ध दृष्टि गडाते हुए अदालत से गुज़ारा-भत्ता मांग लिया। ये मेरे मन का दर्द हैं, मैं तलाक के बढ़ते मामलो और समाज में टूटकर बिखरते परिवारों को देखकर बेहद दुखी-चिंतित हूँ। ये ब्लॉग पोस्ट मैंने सिर्फ उन दपत्तियों के लिए लिखा हैं जहां सिर्फ पति ही कामकाजी हैं। पति को समझते हुए पत्नी को संयम-धैर्य से काम लेना चाहिए। जहां दोनों पति-पत्नी कामकाजी हो वहाँ होनो की बराबर ज़िम्मेदारी बनती हैं।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-12348782761830516?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/12348782761830516/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/08/blog-post_16.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/12348782761830516'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/12348782761830516'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/08/blog-post_16.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-8247546934406975762</id><published>2010-08-09T10:57:00.000+05:30</published><updated>2010-08-09T10:57:00.406+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33ccff;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;नदियाँ जोड़ें, देश बचाएं।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;आपको शायद याद होगा कि-"केंद्र की पूर्ववर्ती सरकार ने देश भर की सभी नदियों को जोड़ने का अरबो रुपयों का एक मास्टर प्लान बनाया था।" और शायद ये भी एक तथ्य आपको मालूम होगा कि-"मौजूदा केंद्र सरकार ने उस प्रस्ताव को राजनितिक कारणों से ठण्डे बस्ते में डाला हुआ हैं।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;देश भर में सिंचाई के लिए और पीने के लिए (पेयजल) पानी की जबरदस्त किल्लत हैं, लेकिन ये किल्लत विशेष रूप से समूचे उत्तर भारत में ही हैं। दक्षिण भारत में अलग नदियाँ हैं और पूर्वी राज्यों में पानी की कोई ख़ास किल्लत नहीं हैं। इसी किल्लत, इसी पानी की कमी को दूर करने के लिए पूर्ववर्ती केंद्र सरकार ने देश की सभी नदियों को जोड़ने का अरबो रुपयों का मास्टर प्लान बनाया था। लेकिन ये देश का दुर्भाग्य हैं कि-"मौजूदा सरकार ने इस अहम् जलीय मुद्दे को ठण्डे बस्ते में डाला हुआ हैं।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;उत्तर भारत में पानी का मुख्य और एकमात्र स्त्रोत पहाडो और हिमालय से आने वाला जल ही हैं। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में तो पानी पहाडो और हिमालय से आ जाता हैं। कई नदियाँ तो चीन से भी इन दोनों राज्यों में प्रवेश करती हैं। लेकिन राज़स्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, राजधानी दिल्ली, मध्यप्रदेश, आदि उत्तरी राज्यों में पानी हिमाचल और जम्मू-कश्मीर होकर ही आता हैं। लेकिन, सभी राज्यों में सबसे ज्यादा पानी की किल्लत राजस्थान में हैं। सब राज्यों से बड़ा और सब राज्यों से सबसे ज्यादा सूखा राज्य राज़स्थान ही हैं। सबसे ज्यादा सूखाग्रस्त और अकालग्रस्त और पानी का सबसे ज्यादा जरूरतमंद राज्य राज़स्थान हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;यहाँ पानी सीधे नहीं आता हैं। राजधानी दिल्ली, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पंजाब, और हरियाणा जैसे राज्य सीधे हिमाचल प्रदेश से जुड़े हुए हैं। लेकिन राजस्थान का पानी हिमाचल प्रदेश से वाया पंजाब और हरियाणा होकर आता हैं, इसलिए राज़स्थान को पानी कम मिल रहा हैं क्योंकि पंजाब और हरियाणा राज्य के हिस्से का पानी पी गए हैं यानी दे नहीं रहे हैं। पंजाब को कुछ कहो तो वो ये मुद्दा ये कहकर हरियाणा के ऊपर ड़ाल देता हैं कि-"हरियाणा पंजाब को पूरा पानी नहीं दे रहा हैं।" और जब हरियाणा को कुछ कहे तो वो गेंद केंद्र सरकार और हिमाचल प्रदेश के पाले में ड़ाल देता हैं। यानी राज़स्थान फिलहाल सूखा और अकाल के साथ-साथ पानी की किल्लत की दोहरी मार झेल रहा हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;आप सभी पाठको की जानकारी के लिए बता दूं कि-"राजस्थान सरकार ने इस सम्बन्ध में काफी सालो से सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की कई समितियों में विभिन्न याचिकाएं दाखिल कर रखी हैं। कोर्ट का तो आप जानते ही कितनी जल्दी फैसला आता हैं और केंद्र सरकार किसी भी राज्य पंजाब और राजस्थान के पक्ष में निर्णय नहीं ले पा रही हैं।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;सूखा और अकाल तो दूर कई राज्यों में कमोबेश हर साल बाढ़ भी आती हैं। बिहार तो हर साल बाढ़ की चपेट में आ ही जाता हैं। कभी कोई नदी उफन उठती हैं तो कभी कोई, यानी हर साल किसी ना किसी नदी में बाढ़ आ ही जाती हैं। जान का नुकसान चाहे ना होता हो लेकिन संपत्ति और माल का नुकसान तो होता ही हैं। लाखो लोग बेघरबार हो जाते हैं, उनके रहने-सहने, ठहराव, पुर्नवास के लिए सरकार के करोडो रूपये स्वाहा हो जाते हैं। साथ ही जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता हैं। वरना जितने समय बाढ़ के कारण ये लोग कोई कामधंधा नहीं कर पाते अगर ये समय बिना बाढ़ के हो तो लाखो-करोडो रूपये सरकार के खाते में टैक्स व अन्य मदों (राहत के कार्यो में जाया ना हो) में आ सकते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;इसी बाढ़ और अकाल-सूखे की समस्या के समाधान के लिए सभी नदियों को जोड़ा जाना था, ताकि जहां पानी ज्यादा हो वहाँ पानी का स्तर कम किया जा सके और जहां पानी की गंभीर कमी हो वहाँ इसकी पूर्ति की जा सके। लेकिन राजनीति कहलो या इच्छा-शक्ति की कमी, राज़स्थान सूखे, अकाल, और प्यास से तड़प रहा हैं और बिहार बाढ़ में डूब कर मर रहा हैं। सभी उत्तरी राज्यों को पानी सीधे पडोसी राज्य से मिल रहा हैं। लेकिन राज़स्थान को पानी दो-तीन राज्यों से होकर (गुजर कर) मिल रहा हैं, राजस्थान देश का सबसे ज्यादा सूखा और अकालग्रस्त राज्य हैं। उसे पानी की तत्काल आवश्यकता हैं। लेकिन पंजाब राज़स्थान का पानी रोके बैठा हैं, पंजाब झूठ बोलकर, बेबुनियाद बात (हरियाणा पर आरोप लगाना) कर रहा हैं। राज्य सरकार ने कई सालो से, काफी सालो से केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न याचिकाएं दायर कर रखी हैं। लेकिन न्याय नहीं मिला। कब मिलेगा, कैसे मिलेगा कुछ कह नहीं सकते।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3366ff;"&gt;&lt;strong&gt;इसलिए अब वक़्त आ गया हैं = देश भर की सभी नदियों को तत्काल जोड़ा जाए और पानी पर राज्यों की बजाय केंद्र का हक़-अधिकार दिया जाए। राज्यों की आपसी लड़ाई, मतभेदों को समाप्त करने का यही एक कारगर और सफल उपाय हैं कि-"सभी नदियों को जोड़ दिया जाए और पानी पर राज्यों का हक़/अधिकार समाप्त करते हुए सभी ताकत केंद्र सरकार को दे दी जाए।"&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#6600cc;"&gt;&lt;strong&gt;एक अति-महत्तवपूर्ण सूचना = सभी पाठको को बता देना चाहता हूँ कि-"मौजूदा सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाया (या तैयारी) था, लेकिन तत्कालीन सत्ताधारी दल और मौजूदा विपक्षियों ने ये कहकर उपहास / मज़ाक उड़ाया कि-"तुम कौनसा नया काम कर रहे हो???, तुम कर क्या रहे हो??, हमारा ही कार्य तुम कर रहे हो, ताकि जनता तुम्हे इस कार्य का श्रेय दे।" हम आम जनता के द्वार पर जायेंगे और उन्हें बता देंगे कि-"तुमने कुछ नहीं किया हैं, ये प्रोजेक्ट तो हमारा बनाया हुआ, हमारा फाइनल किया हुआ हैं। इस कार्य का श्रेय हमारा हैं और हम ही लेंगे।" बस उसके बाद मौजूदा सरकार ने इस अहम् मुद्दे को ठण्डे बस्ते में ड़ाल दिया, जो दुर्भाग्य से अब तक ठण्डे बस्ते में ही पडा हैं।"&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-8247546934406975762?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/8247546934406975762/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/08/blog-post_09.html#comment-form' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#003300;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;ये किसी सौतन से कम नहीं।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;आज तक आपने जितनी भी सौतनों के बारे में सुना होगा, उन सभी सौतनो से ज्यादा खतरनाक और घातक सौतन हैं ये कामधंधा, नौकरी। हैरान ना होइए मैं सौ प्रतिशत सच, सोलह आने सत्य कह रहा हूँ। आजकल की भागती-दौड़ती, व्यस्त और तेजरफ्तार &lt;span&gt;ज़िन्दगी&lt;/span&gt; में सब और धन का ही बोलबाला हैं। जिसे देखो वो पैसे के पीछे भाग रहा हैं। मानो, पैसा ही सब कुछ हो, पैसा ही पानी और प्राणवायु की तरह महत्तवपूर्ण हो।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;नौकरी, कामधंधा, व्यापार आदि अब सौतन का रूप धरते जा रहे हैं। एक ऐसी सौतन जिससे कमोबेश हर औरत जूझ रही हैं। हर व्यक्ति अपनी बीवी और बच्चो से दूर होता जा रहा हैं। जब देखो पैसा, पैसा, और पैसा की ही रट लगाए रखता हैं व्यक्ति। चाहे कोई नौकरी करता हो या बिजनेस करता हो, या दुकानदारी या कामधंधा करता हो, सब इतने व्यस्त हो चुके हैं की उन्हें अपने परिवार का ही ख्याल नहीं रहा हैं। नज़र बस अपनी ड्यूटी पर ही लगी रहती हैं। परिवार की तरफ से तो नज़र ही फेर ली गयी हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;जिन परिवारों में पति के साथ-साथ पत्नी भी नौकरी करती हो वहाँ तो हालात विकट हो जाते हैं। वहाँ बच्चो का और बूढ़े/उम्रदराज माता-पिता का ख्याल ईश्वर ही रखता हैं। सुबह दोनों पति-पत्नी दफ्तर के लिए तैयार होने और बच्चो को स्कूल भेजने (यदि स्कूल जाने लायक हो तो)  में ही व्यस्त हो जाते हैं और फिर शाम को (अक्सर देर रात) को घर आने के बाद खाना-वाना खा-पीकर सो जाते हैं। माँ-बाप के लिए तो बस दुआ-सलाम ही शेष रह जाती हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;खैर बात करते हैं, जहां सिर्फ पति या पुरुष नौकरी करता हो। पुरुष अब काफी व्यस्त हो गया हैं, जल्दी पैसा कमाने की धुन, जल्द से जल्द अमीर बनने की ललक, और बाज़ार में मौजूद गला-काटूँ कम्पीटीशन ने व्यक्ति को उलझा दिया हैं। जब देखो काम-काम-काम, पैसा-पैसा-पैसा, बस यही एक आदमी की ज़िन्दगी और ज़ीने का मकसद रह गया हैं। परिवार में बीवी तो बस घर लायक ही हैं जो खाना बना दे, कपडे धो/प्रेस करदे, आदि-आदि। बच्चे सिर-हाथ-पैर दबा दे, या कोई छोटे-मोटे काम करदे आदि-आदि। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;अब ये नौकरी, कामधंधा क्या किसी सौतन से कम हैं?? माना कामकाज करना, नौकरी करनी जरुरी हैं लेकिन इतनी भी क्या जरुरी कि-"व्यक्ति अपने परिवार, अपने बीवी-बच्चो को ही भुला दे??" चलिए जो भी हो, अब तो स्थिति ये हो गयी हैं कि-"वर्किंग डेज़ के साथ-साथ अब व्यक्ति ओवर-टाइम भी देने लगा हैं, ताकि थोड़ा ज्यादा धन कमा सके। इसके साथ-साथ अब व्यक्ति छुट्टी के दिन भी व्यस्त रहने लगा हैं। कभी दफ्तर के तनाव के कारण छुट्टी का दिन बेकार हो जाता हैं तो कभी दफ्तर का कार्य पुरुष छुट्टी के दिन घर ले आता हैं। छुट्टी के दिन भी एन्जॉय करने कि बजाय चिंताग्रस्त पति/पुरुष अगले दिन की रूपरेखा बनाने लगता हैं। जिससे पुरे परिवार का मज़ा किरकिरा हो जाता हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;बच्चे भले ही अपने दोस्तों के साथ या पड़ोस/गली के बच्चो से मिल ले, खेल ले लेकिन पत्नी...??? अगर पत्नी किट्टी-पार्टी या पड़ोसनो से गप्पे लड़ा ले तो भी कब तक और कितना??? पत्नी और बच्चो को पति=पापा का तो साथ नहीं मिला। परिवार पति/पुरुष के बिना अधूरा होता हैं, पड़ोस के लोग, पडोसने, गली-मोहल्लो के बच्चे परिवार का हिस्सा कदापि नहीं हो सकते। सब कुछ जरुरी हैं, पैसा कमाना जरूरी हैं, नौकरी-कामधंधा सब जरुरी हैं, लेकिन परिवार भी जरुरी हैं। आपके बीवी-बच्चो को आपकी आवश्यकता हैंउन्हें समय दीजिये, उनके साथ वक़्त गुज़ारिये। उनके साथ-साथ आपको भी सुकून मिलेगा, सारी चिंताएं, सारी टेंशन, सब दूर भाग जायेंगी। चाहे कितना भी जरुरी क्यों ना हो, चाहे कितनी भी तनख्वाह क्यों ना हो, छुट्टी का दिन परिवार को दीजिये। बाकी दिन / कार्यदिवस को चाहे हाड़तोड़ मेहनत कीजिये, खूब खून-पसीना बहाइये, लंबा ओवरटाइम कीजिये, लेकिन छुट्टी के दिन परिवार के साथ रहिये।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#003300;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;तो आप कबसे छुट्टियों का परिवार के लिए उपयोग करेंगे और इस सौतन से छुटकारा दिलाएंगे???&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-1515897115862801000?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/1515897115862801000/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' 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src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-4463364555546614821</id><published>2010-07-26T00:46:00.000+05:30</published><updated>2010-07-26T00:46:00.411+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;प्रोत्साहित किया क्या??&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;ना जाने क्यों लोग किसी को प्रोत्साहित करने को अपनी बेईज्ज़ती समझते हैं??? पता नहीं लोगो की क्या फितरत हैं कि-"प्रोत्साहित करने में तो सबसे पीछे रहते हैं, लेकिन हतोत्साहित करने को सबसे आगे रहते हैं??? मानो हतोत्साहित यूनियन के प्रधान हो।" मैं हमेशा अच्छे कार्य करने वालो को, नेकी या ईमानदारी या सच्चाई के रास्ते पर चलने वाले को यथासंभव प्रोत्साहित करता हूँ। अगर किसी कारणवश, या मजबूरीवश किसी को प्रोत्साहित नहीं भी कर पाता हूँ तो कम से कम हतोत्साहित तो कदापि नहीं करता।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;कुछ उदाहरण =&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;1. जब कोई कर/टैक्स की चोरी नहीं करता हैं, तो आप उसे प्रोत्साहित करने की बजाय हतोत्साहित करते हैं। इतना ही नहीं आप उसे करचोरी करने के कई उपाय भी बता डालते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;2. जब कोई सावधानीपूर्वक, नियमपूर्वक, निर्धारित रफ़्तार से वाहन (दुपहिया, तिपहिया, या चौपहिया) चलाता हैं, तो आप उसे प्रोत्साहित करने की बजाय अनगिनत गालियाँ निकालते हैं। जैसे--कितना धीरे चला रहा हैं, चलाना ही नहीं आता, सड़क जाम करके रख दी, गाडी थोड़ी तेज़ चला, कछुआ चाल से चल रहा हैं, आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;3. जब कोई सड़क के बीचो-बीच घायल-चोटिल पडा हो और कोई भलामानस उसे संभाले तो आप मदद करने की बजाय उसे हतोत्साहित करते हैं। ये कहकर--छोड़ ना क्यों पंगे में पड़ रहा हैं??, क्यों पुलिस के लफड़े में आने पर तुला हैं??, ये रोज़-रोज़ का काम हैं तू चल एम्बुलेंस आ जायेगी, आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;4. जब कोई बिजली की चोरी नहीं करता हैं तो आप उसे प्रोत्साहित करने की बजाय हतोत्साहित करते हैं। ये कहकर--बिजली महेंगी हो गयी हैं क्यों पूरा बिल भरते हो??, हमें देखो हम ऐश कर रहे हैं, या डरो मत बिजली निगम के अधिकारियों से मेरी सेटिंग हैं कोई कुछ नहीं बोलेगा, या कुण्डी मैं ला देता हूँ या लगा देता हूँ, आदि-आदि। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;5. जब कोई पानी की वेस्टेज करता हैं तो भी आप उसको पानी की कीमत बताने की बजाय उसे प्रोत्साहित करते हैं। जैसे-वाह गाडी चमक गयी हैं, आप पुरानी गाडी को भी नयी बताने लगेंगे, बढ़िया हैं सड़क की मिटटी दूकान में नहीं घुसेंगी, या पानी की कोई कमी नहीं हैं करो जैसे मर्जी इस्तेमाल, आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;यानी प्रोत्साहन भी नकारात्मक बात को। प्रोत्साहन सकारात्मकता को ही देना चाहिए। याद रखिये--अगर आप नकारात्मकता को प्रोत्साहित कर रहे हैं तो आप सीधे-सीधे अच्छाई को हतोत्साहित कर रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;&lt;strong&gt;याद रखिये--बूँद-बूँद से ही घड़ा भरता हैं। उसी तरह एक-एक व्यक्ति के सम्मिलित प्रयास से ही मकसद-लक्ष्य हल हो सकते हैं। अगर आप किसी को उसकी सच्चाई, ईमानदारी, नेकी या किसी अन्य अच्छाई-भलाई के लिए प्रोत्साहित नहीं कर सकते तो कम से कम उन्हें हतोत्साहित करके उनका हौसला तो मत डिगाइए।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;तो प्रोत्साहित किया क्या??&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-4463364555546614821?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/4463364555546614821/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/07/blog-post_26.html#comment-form' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc33cc;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;कुछ नकारात्मकता भी आवश्यक।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999900;"&gt;अरे नहीं-नहीं, मैं किसी को नकारात्मक विचारों को अपनाने या सकारात्मकता को छोड़ने को नहीं कह रहा हूँ। मैं तो कुछ हद तक नकारात्मकता को सही ठहरा रहा हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999900;"&gt;अब आप कहेंगे, कि-"ये क्या बात हुई??, मेरा ब्लॉग सकारात्मकता का पर्याय रहा हैं, मैंने अपने ब्लॉग में सकारात्मकता को प्रोत्साहित किया हैं। आज क्या हो गया मुझे??, जो मैं नकारात्मकता को कुछ हद तक जायज़-उचित ठहरा रहा हूँ।" जी नहीं, मुझे कुछ नहीं हुआ हैं, और नाही मैं अपने असल और आधारभूत मुद्दे (सकारात्मकता) से भटक गया हूँ। मैं आज भी सकारात्मकता को लेकर दृढ़ संकल्पित-अडिग हूँ, लेकिन कुछ हद तक (ज्यादा नहीं) नकारात्मकता भी आवश्यक हैं। कैसे??? अब ये जानिये।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999900;"&gt;एक = जब हम कोई गाडी या अन्य कोई नया वाहन चलाना सीखते हैं, तो हमारे मन में कई तरह के अंत-शंट, उलटे-सीधे ख्याल (गिर जाना, चोट लगना, या एक्सीडेंट) आते हैं, जिसे हम भुलाकर कोई गाडी चलाना सीख पाते हैं। दोस्तों, वैसे तो ऐसे ख्यालो को नकारात्मक मानते हुए बचने की सलाह दी जाती हैं। लेकिन, ये बुरे-नकारात्मक ख्याल ही असल में हमारे गुरु साबित होते हैं। अगर कोई इन सबके बारे में नहीं सोचेगा, तो निश्चित रूप से वो गिरेगा या चोट खायेगा। संभावित खतरे का आभास होगा तभी तो प्रशिक्षु सावधानी बरतते हुए वाहन चलाना सीख पायेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999900;"&gt;दो = जब हम कोई नया व्यवसाय-व्यापार शुरू करते हैं, तो हमारे जेहन-मन में कई आशंकाएं (काम-धंधा चलने या ग्राहकी आने, आदि) भी पनपने लगती हैं। और जैसे ही ये आशंकाएं हमारे मन में उभरने लगती हैं, तभी से हम उन आशंकायों को झुठलाने-निर्मूल साबित करने की कोशिशे करने लगते हैं। सोचिये, अगर आदमी के मन में व्यापार के फ़ैल होने, या ग्राहक के ना आने, या प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने, आदि के नकारात्मक विचार नहीं आयेंगे तो वो बचाव के उपाय कैसे और क्यों करेगा???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999900;"&gt;तीन = जब कोई शेयर बाज़ार, म्युचुअल फंड, या अन्य कही अपना पैसा लगाता-निवेश करता हैं, तो वहाँ भी मन में नकारात्मक ख्याल (कितनी रिटर्न आएगी?, पैसा डूबेगा तो नहीं?, पैसा बढ़ने की बजाय घटेगा तो नहीं, या कही मैं जोखिम तो नहीं ले रहा?? आदि-आदि) आते हैं। लेकिन, नकारात्मकता को कही पीछे छोड़ते हुए निवेशक पूरी सुरक्षा-गारंटी के साथ अपना पैसा लगाता हैं। अगर ये ख्याल ना आये तो निवेशक अव्वल तो पैसा ही नहीं लगाएगा और अगर लगा भी लिया तो दुसरे को डूबता देख या तो मुडके शेयर बाज़ार की तरफ रुख ही नहीं करेगा या फिर आत्म-ह्त्या जैसा घातक कदम उठा बैठेगा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999900;"&gt;दोस्तों, उपरोक्त उदाहरणों मैं आप या आपका कोई जानकार भी हो सकता हैं। लेकिन, ये उदाहरण बेहद आम हैं। हर वक़्त सकारात्मकता उचित नहीं हैं, कुछ हद तक नकारात्मकता भी आवश्यक हैं, बशर्ते नकारात्मकता आप पर हावी ना हो। ज़िन्दगी का कोई भी क्षेत्र हो, नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही पहलु आवश्यक हैं। जीवन में दोनों ही बातें होनी चाहिए लेकिन पलड़ा-वजन सकारात्मकता का ही भारी होना चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999900;"&gt;कभी-कभी अनर्गल-नकारात्मक भी सोचना चाहिए, लेकिन सिर्फ उतना जितना आवश्यक हो। हद से ज्यादा या सकारात्मकता से ज्यादा सोचना निश्चित रूप से नुकसानदेह हैं। हर विषय में सोचना जरुरी हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999900;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#66ffff;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#66ffff;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#66ffff;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#66ffff;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#66ffff;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#66ffff;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#66ffff;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#66ffff;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-607665922466493993?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/607665922466493993/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/07/blog-post_19.html#comment-form' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/607665922466493993'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/607665922466493993'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/07/blog-post_19.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-897864111338159266</id><published>2010-07-12T11:21:00.000+05:30</published><updated>2010-07-12T11:21:00.256+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;कहाँ गए प्राचीन खेल???&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;गिल्ली डंडा, जंजीर, छुपनछुपाई, लूडो, सांप-सीढ़ी, कैरम, पकड़म-पकडाई, मार दडी, चौसर, शतरंज, कुश्ती, कबड्डी, खोखो, दौड़, आदि-आदि सभी प्राचीन खेल आज दुर्लभ (ग्रामीण क्षेत्रो को छोड़कर) होते जा रहे हैं। आज इन पुराने (लेकिन आधुनिक युग की परम-आवश्यकता) खेलो की तरफ से लोगो का रुझान दिन-प्रतिदिन घटता जा रहा हैं। युवापीढ़ी और किशोर वर्ग की रूचि भी इन खेलो की बजाय अन्य और आज के खेलो में ज्यादा नज़र आ रही हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;खेल कोई भी बुरा नहीं हैं, किसी भी खेल (चाहे वो देश का हो या विदेश का) को खेलने में कोई बुराई या आपत्ति नहीं हैं। मसला ये हैं कि-"इन आजकल के खेलो में प्राचीन खेलो जैसी बात नहीं हैं। जो गुण, जो शिक्षा, प्राचीन-पुराने खेलो में हैं, वो आजकल के आधुनिक खेलो में नहीं हैं।" आजकल के युवाओं की, किशोरवय उम्र के लोगो की रूचि क्रिकेट, बास्केटबॉल, फुटबॉल, रग्बी, वॉलीबॉल, जूडो-कराटे, कुंग फु, वीडियो गेम, आदि खेलो में ही रह गयी हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;ये बहुत ही गलत बात और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति हैं। आप पाठक-गण इसे दुर्भाग्य माने या ना माने लेकिन मैं इसे मानता हूँ, और देर सवेर आप भी मानेंगे। जो दिमागी-शारीरिक मेहनत, जो कौशल, जो रणनीति, जो शिक्षा, इन आधुनिक खेलो में तलाशी जा रही हैं, वो दरअसल इनमें प्राचीन खेलो में आज भी मौजूद हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;व्यक्तिगत रूप से भले ही ये आधुनिक खेल अच्छे हो लेकिन सामाजिक रूप से कतई अच्छे नहीं माने जा सकते। कुछ उदाहरण =&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;01. जूडो-कराटे और कुंग फु आत्म-रक्षा और व्यायाम के लिए अच्छे जरूर हैं लेकिन कुश्ती और कबड्डी जितने नहीं। कुछ लोग इन दोनों में फर्क समझते हैं, लेकिन वे भूल जाते हैं कि-"इन दोनों खेलो का मकसद आत्म-रक्षा ही हैं।" लेकिन इन दोनों खेलो में दिन-रात का फर्क हैं। जिस शारीरिक दमखम और फुर्ती का परिचय कुश्ती-कबड्डी में देना होता हैं, वो जूडो-कराटे, और कुंग फु में कहाँ??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;02. चौसर और शतरंज में जो दिमागी कौशल, सोच-समझ और तीव्र बुद्धि का प्रदर्शन होता हैं वो आजकल के विडियो गेम में कहाँ?? वीडियो गेम में दिमाग लगाना होता हैं, लेकिन तुलनात्मक रूप से कम। ये दोनों (चौसर और शतरंज) बौद्धिक खेल हैं, इन खेलो से धैर्य, एकाग्रता, और अनुशासन में बढ़ोतरी होती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;03. जंजीर, छुपनछुपाई, दौड़, खोखो, और गिल्ली डंडा, आदि खेलो में जो भागना-बचना, छुपना-ढूंढना, और हाथ को कसकर मजबूती से पकड़कर भागना, आदि होता हैं वो आजकल के खेलो में कहाँ हैं??? क्रिकेट, बास्केटबॉल, फुटबॉल, रग्बी, वॉलीबॉल, आदि आधुनिक खेल एकाकी भावना पैदा करते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;04. क्रिकेट, बास्केटबॉल, फुटबॉल, रग्बी, वॉलीबॉल, आदि खेल परोक्ष रूप से स्वहित साधने की शिक्षा देते हैं। इनमें शारीरिक मेहनत भी काफी कम होती हैं। जो गेंदबाज़ हैं या बल्लेबाज़ हैं वो ही क्रियाशील रहता हैं बाकी सब तो खेल का हिस्सा होते हुए भी मूक-दर्शक बने रहते हैं। जबकि जंजीर, छुपनछुपाई, दौड़, खोखो, और गिल्ली डंडा, आदि खेलो में सभी खिलाड़ी ना सिर्फ क्रियाशील रहते हैं वरन अहम् रोल भी निभाते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;05. क्रिकेट में सिर्फ रन बनाने और आउट करने का ही महत्तव हैं, जो बल्लेबाज़ हैं वो रन को ही अहमियत देता हैं और जो गेंदबाज़ या फिल्डर हैं वो कैच करने तथा आउट करने को ही महत्तव देता हैं। सब का रोल एक समय में एक बार ही होता हैं। एक गेंदबाज़ और दो बल्लेबाजों के अलावा सभी खिलाड़ी (फिल्डर-क्योंकि वे बल्लेबाज़ का हाथ और गेंद की दिशा को देखकर ही एक्टिव होते हैं) करीब-करीब मूक-दर्शक ही होते हैं। लेकिन जंजीर, छुपनछुपाई, दौड़, खोखो, और गिल्ली डंडा, आदि खेलो में सभी का रोल बराबर और महत्तवपूर्ण होता हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;06. जंजीर, छुपनछुपाई, दौड़, खोखो, और गिल्ली डंडा, आदि खेलो में जो खेल भावना और टीम के प्रति फ़र्ज़ होते हैं वो आजकल के खेलो में कहाँ?? जो दिमागी कौशल का इस्तेमाल पुरातन और प्राचीन खेलो में होता हैं वो आजकल के खेलो में कहाँ होता हैं?? रणनीति आजकल के आधुनिक खेलो में भी बनाई जाती हैं लेकिन उसमे वो बात नहीं होती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;07. खोखो को ही लीजिये हर खिलाड़ी एक्टिव रहता हैं, भागने-पकड़ने, और उठने-बैठने के इस खेल में अच्छी-खासी कसरत हो जाती हैं। क्या ऐसी कसरत आजकल के, आधुनिक खेलो में हैं??? बस खड़े रहो और जब गेंद पास आये तो थोड़ा सा हिल-डुल लो। वो भी मन हो तब। ये भी भला कोई आधुनिक खेल हुए???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;08. आजकल के खेलो में आपसी सामंजस्य का नितांत अभाव हैं, जबकि प्राचीन खेलो में आपसी सदभाव, आपसी सहयोग, आपसी प्रेम-प्यार, भाईचारा, और आपसी तालमेल की भावना कूट-कूट कर भरी हुई हैं। आजकल के खेल मनोरंजक और अच्छे जरूर हो सकते हैं लेकिन प्राचीन खेलो के मुकाबले नहीं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;09. वीडियो गेम खेल-खेल कर बच्चे मोटे और थुल-थुल होते जा रहे हैं, साथ ही मोटापा-जनित रोगों से भी घिरते जा रहे हैं। साथ-साथ आँखों को भी नुकसान पहुंचा रहा हैं, जैसे धुंधला दिखना, आँखें दुखना, आँखें भारी होना, आँखों का पानी सूखना, आदि-आदि। अगर वीडियो गेम की बजाय अन्य घरेलु खेल (सांप-सीढ़ी, लूडो, चौसर, शतरंज, और कैरम, आदि) खेले जाए तो कम से कम आँखें तो बचेगी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;10. वीडियो गेम में खेलने वाला अपना ध्यान सिर्फ मोबाइल या कम्पयूटर में लगा कर रखता हैं, जबकि अन्य घरेलु खेलो में खिलाड़ी ना सिर्फ एक्टिव-क्रियाशील रहता हैं बल्कि उसका अन्य खिलाड़ियों के साथ संवाद भी कायम रहता हैं। जबकि वीडियो गेम में उसका किसी से, किसी भी रूप में संवाद नहीं होता हैं। इस तरह वीडियो गेम सामाजिक रूप से भी तोड़ रहा हैं। जबकि घरेलु खेलो से खिलाड़ी विशेषकर बच्चो का जुडाव समाज से होता हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;11. याद रखिये--"जितने भी आधुनिक, आजकल के खेल हैं उन सभी खेलो में खिलाड़ियों और मैदानों का पैमाना-साइज तय हैं, जिसे घटाया या बढाया नहीं जा सकता। जबकि पुराने खेलो की ऐसी कोई शर्त-बाध्यता नहीं हैं।" जब आपका बच्चा आज के, आधुनिक खेलो को खेल रहा हो तो समझ जाइए कि-"आपका बच्चा आसानी से मिलनसार, घुलने-मिलने वाला, सामाजिक नहीं बन सकता क्योंकि वो एक निश्चित सीमा से अधिक खिलाड़ियों को शामिल नहीं कर सकता।" यानी एक निश्चित सीमा के बाद वो किसी को अपना दोस्त नहीं बना सकता क्योंकि उसे जरुरत ही नहीं होगी।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;12. जबकि अगर आपका बच्चा पुरातन-पारंपारिक खेलो को खेल रहा हो तो बेफिक्र हो जाइए। आपका बच्चा सामाजिक भी होगा, मिलनसार भी होगा, देश-समाज-शहर के प्रति जागरूक भी होगा, और निश्चित रूप से उसका भविष्य सुखद भी होगा। क्योंकि पारम्पारिक खेलो में जितने खिलाड़ी-सदस्य होते हैं, उतना ही आनंद-ख़ुशी की अनुभूति होती हैं, कोई बाध्यता-कोई पाबंदी ना होने के कारण आपका बच्चा सहज रूप से उत्साहपूर्वक अन्य-अनजान (गली-मोहल्ले, अन्य कक्षायों आदि के) बच्चो को भी शामिल करना चाहेगा। जोकि, उसके सामाजिक दायरे को बढाते हुए उसे सामाजिकता का पाठ पढ़ायेगा। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;13.&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#333399;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;सबसे बड़ी और महत्तवपूर्ण बात--&gt;"खेल कोई भी बुरा नहीं हैं, किसी भी खेल (चाहे वो देश का हो या विदेश का) को खेलने में कोई बुराई या आपत्ति नहीं हैं। जो दिमागी-शारीरिक मेहनत, जो कौशल, जो रणनीति, जो शिक्षा, इन आधुनिक खेलो में तलाशी जा रही हैं, वो दरअसल इनमें प्राचीन खेलो में आज भी मौजूद हैं। व्यक्तिगत रूप से भले ही ये आधुनिक खेल अच्छे हो लेकिन सामाजिक रूप से कतई अच्छे नहीं माने जा सकते। अगर आप अपने बच्चो को सुखद भविष्य देना चाहते हैं, अगर आप अपने बच्चो को मिलनसार और सामाजिक बनाना चाहते हैं, अगर आप अपने बच्चो को देश-समाज-शहर के प्रति जागरूक करना चाहते हैं, तो अपने बच्चो को पारंपरिक, प्राचीन, पुरातन खेलो की तरफ मोड़िये, उन्हें इन खेलो में निहित फायदों और गुणों से अवगत कराते हुए, इन खेलो को खेलने की प्रेरणा दीजिये।"&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;अब आपके बच्चो का, आपकी पीढ़ियों का फैसला आपके हाथो में हैं।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663333;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663333;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663333;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663333;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663333;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663333;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663333;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663333;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-897864111338159266?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/897864111338159266/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/07/blog-post_12.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/897864111338159266'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/897864111338159266'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/07/blog-post_12.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-7196394897359967794</id><published>2010-07-05T11:23:00.000+05:30</published><updated>2010-07-05T11:23:00.078+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;जहर का सेवन क्यों???&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;क्या आप जानते हैं कि--&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;आप जाने-अनजाने जहर खा रहे हैं??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;आप जिस अनाज-दाल, फल-सब्जी को शुद्ध मान रहे हैं उस पर जहर लगा हुआ हैं??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;जिस खाद्य पदार्थ को आप पौष्टिक मान कर खाते हैं, वो जहरीला हैं??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;अपने शरीर को बनाने के लिए आप जो कुछ भी ले रहे हैं, वो बनाना तो दूर शरीर को बिगाड़ रहा हैं??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;नहीं-नहीं आप कुछ भी नहीं जानते हैं। आपको तो बस खा-पी कर हज़म करने से मतलब हैं, बाकी क्या हैं, क्या नहीं हैं, आप कुछ भी नहीं जानते हैं। खाया-पीया-पचाया बस यही तीन लफ्ज आप जानते हैं, और तो कुछ आपको पता ही नहीं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;आज अनाजो से लेकर दालो-चनो तक, फलो से लेकर सब्जियों तक हर चीज़ जहर से भरी हुई हैं। इन चीजो को जितना मर्ज़ी धो लो, रगड़ लो, चाहे कुछ भी कर लो, थोड़ा-बहुत जहरीला पदार्थ तो रह ही जाएगा। कारण......इन चीजो का उत्पादन ही जहर से किया जा रहा हैं। रासायनिक खाद ड़ाल-ड़ाल कर सारा नक्शा ही बिगाड़ दिया गया हैं। कल तक जिस रासायनिक खाद को जरुरत, मज़बूरी बता कर इस्तेमाल किया जाता था, उसी रासायनिक खाद को आज फैशन, तेज़ी से उत्पादन के लिए धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;ज्यादा से ज्यादा और तेज़ी से उत्पादन करने के लिए सम्पूर्ण मानव-जाति के जीवन से ही खिलवाड़ किया जा रहा हैं। रासायनिक खाद फायदे कम नुकसान ज्यादा देती हैं, रासायनिक खाद के नुकसान ही नुकसान हैं, और लोग (किसान) सब कुछ जानते-समझते हुए भी बेरोकटोक इनका इस्तेमाल बेतहाशा कर रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;रासायनिक खाद कृत्रिम तत्त्व हैं नाकि भूमि की खुराक। रासायनिक खाद भूमि को दूरगामी नुकसान पहुंचा रही हैं, किसान भले ही तात्कालिक-अल्पकालिक लाभ प्राप्त करता हो। लालचवश या देखा-देखी किसान रासायनिक खाद उपयोग में तो ला रहे हैं, लेकिन इसके अत्यधिक इस्तेमाल से जमीन कमजोर होकर बंजर हो &lt;span style="font-size:0;"&gt;जाती&lt;/span&gt; हैं। दूसरा, जल की कमी का मुख्य कारण भी रासायनिक खेती साबित हो सकती हैं, क्योंकि रासायनिक खेती से जल की आवश्यकता ज्यादा और बार-बार पड़ती हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;किसान रासायनिक खेती से उत्पादन भले ही ज्यादा लेले लेकिन होता फिर भी घाटे में ही हैं। क्योंकि रासायनिक खेती के लम्बे इस्तेमाल के कारण जमीन कठोर हो जाती हैं, जिसकी वजह से जोत-खर्च भी बढ़ जाता हैं। रासायनिक खाद से तैयार अनाज-सब्जी-फल का स्वाद काफी अलग होता हैं। जैविक खाद के मुकाबले इस खाद से तैयार सब्जी-फल आदि काफी बेस्वाद और कम पौष्टिक होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी होते हैं। कृषक को तात्कालिक लाभ भले ही हो, लेकिन इसका नुकसान भी उर्वरा शक्ति बढाने वाले जीवाणुओं के नष्ट होने के रूप में सामने आता हैं। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;धुप और ठण्ड से बचाव भी रासायनिक खाद लेने वाले पौधे-फसल कम ही कर पाते हैं। पर्यावरण के लिए तो रासायनिक खाद हैं ही नुकसानदेह, इसमें तो रत्ती भर भी कोई शक नहीं हैं। रासायनिक खाद के हानिकारक कैमिकल लोगो को जिगर, गुर्दे, और हर्दय रोगों के साथ-साथ जाने-अनजाने कैंसर भी दे रहे हैं। जैविक खाद के तो फायदे ही फायदे हैं, कही भी, कभी भी, किसी भी रूप में जैविक खाद नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। साथ ही, रासायनिक खाद के मुकाबले जैविक खाद काफी सस्ते, किफायती, कामयाब, और लम्बे समय तक असरकारक होते हैं। जैविक खाद के कई फायदे इस तरह हैं--&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;पर्यावरण की रक्षा होती हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;मिटटी भुरभुरी होने से उसमे हवा, पानी, और प्रकाश का संचार उचित ढंग से होता हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;कम बारिश में पानी लम्बे समय तक सोख कर रखती हैं और ज्यादा बारिश में पानी की निकासी करती हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;मिटटी का कलेवर अच्छा रहता हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;उर्वरा शक्ति बढती हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;उर्वरा शक्ति बढाने वाले जीवाणुओं की पैदावार प्राकृतिक रूप से बढती हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;अनाज-फल-सब्जी पौष्टिक और स्वादिष्ट होते हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;एक बार की सिंचाई लम्बे समय तक चलती हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;बार-बार सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;कम सिंचाई के कारण पानी भी बचता हैं, &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;जमीन सख्त नहीं होती इससे जोत-खर्च बचता हैं,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;फसल के धुप और ठण्ड से बचाव के लिए कोई ख़ास इंतजामात नहीं करने पड़ते,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;प्राकृतिक रूप से भूमि की खुराक भी हैं जैविक खाद,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;तो क्यों किसान अपने देश के ही लोगो को जहर परोसना चाहते हैं??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;रासायनिक खाद और जैविक खाद के फायदों-नुकसानों को जानते हुए भी किसान चुप क्यों हैं??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;चंद लाभ के लिए, लोगो के जीवन से खिलवाड़ करना क्या उचित हैं??&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#6600cc;"&gt;मेरी इस ब्लॉग के माध्यम से सभी किसान भाइयो से निवेदन हैं कि-"जहां तक हो सके अपनी खेती-फसल में जैविक खाद का ही इस्तेमाल करे, और रासायनिक खाद का इस्तेमाल ना के बराबर करते हुए रासायनिक खाद के उपयोग को हतोत्साहित करे।"&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#6600cc;"&gt;साथ ही मेरी आम जनता से निवेदन हैं कि-"हमेशा यथासंभव जैविक खाद से तैयार फसल (फल-सब्जी-अनाज) ही खरीदें, इसके लिए आप सीधे उन खेतो से खरीद करे जो जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं। इससे रासायनिक खाद का इस्तेमाल करने वाले हतोत्साहित होंगे।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#6600cc;"&gt;और यदि आप किसी जैविक खाद का उपयोग करने वाले खेत या किसान के बारे में नहीं जानते तो बेहतर हैं आप उन दुकानों से खरीदी करे जिनके पास शत-प्रतिशत जैविक-प्राकृतिक खाद से तैयार माल मिले। (महानगरो-बड़े शहरों में कई दुकाने इस तरह की खुली हैं जो लिखित में, शुद्ध रूप से जैविक खाद से तैयार खाद्य पदार्थ रखती हैं।)"&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#339999;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#339999;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#339999;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#339999;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#339999;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#339999;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#339999;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#339999;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-7196394897359967794?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/7196394897359967794/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/07/blog-post.html#comment-form' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/7196394897359967794'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/7196394897359967794'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-3234216015567352630</id><published>2010-06-28T10:50:00.000+05:30</published><updated>2010-06-28T10:50:00.410+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#666600;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;ये ऐसे हैं तो बाकी कैसे होंगे??? &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;इस बार मैं ऐसी बात लिख रहा हूँ, जो सुखद तो नहीं हैं लेकिन हैं कडवी सच्चाई। बहुत ही भारी मन से मैंने ये पोस्ट लिखी हैं। एक ऐसे मुद्दे पर मैं लिख रहा हूँ, जो समाज से काफी करीब से, गहराइयों से जुड़ा हुआ हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;मेरा एक दोस्त हैं (गोपनीयता रखते हुए मैं उसका नाम नहीं लिख सकता) जोकि एक टांग से विकलांग हैं। पांच-छः साल तक वो एकदम ठीक था, लेकिन तभी अचानक उसे पोलियो हो गया और बड़ी मुश्किल से उसे पूर्ण-रूप से अपंग होने से बचाया जा सका। आज उसकी उम्र 24 साल हैं, वो लंगडा-लंगडा कर चलता हैं और लम्बी दुरी तय करने के लिए ट्राय-साइकल का उपयोग करता हैं। यह ट्राय-साइकल उसे बीकानेर की एक संस्था ने नि-शुल्क प्रदान की थी। अब उसकी करतूत भी जान लीजिये =&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;जैसा की मैं पहले ही बता चूका हूँ कि-"वो मेरा पुराना दोस्त हैं और ट्राय-साइकल उपयोग करता हैं।" हाल ही में, वो मेरे घर आया एकदम नयी चमचमाती ट्राय-साइकल पर। मैंने उसे नयी साइकल लेने पर बधाई देते हुए उसकी चमकती-दमकती सायकल की तारीफ़ की। उसके बाद उसने मुझे जो बताया, उसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;उसने कहा-"अरे नहीं-नहीं यार, ये सायकल मैंने खरीदी नहीं हैं। ये ट्रायसायकल तो मैंने हाल ही में लगे एक विकलांग शिविर से नि-शुल्क प्राप्त की हैं। तुझे शायद याद होगा, वो शिविर पिछले दो महीने पहले लगा था।" मैंने उससे पूछा कि-तेरे पास तो पहले से ही ट्रायसाइकल थी फिर तुने नयी क्यों ली?? और वो थी भी सही-दुरुस्त कंडीशन में??" तो वो हँसते हुए बोला-"यार वो सायकल तो मैंने दो हज़ार रूपये में किसी और विकलांग को बेच दी। दरअसल मुझे पैसो की सख्त आवश्यकता थी, तो मैंने वो सायकल अन्य विकलांग को सस्ते में दो हज़ार रूपये में ही बेच दी, नयी तीन हज़ार से ज्यादा की ही आती हैं। और हाल ही में लगे जयपुर वालो के शिविर में जाकर मैं ये नयी ट्राय-साइकल ले आया। बस इतनी सी ही बात हैं।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;मैं बोला तो कुछ नहीं, लेकिन उसने मेरे मन में कई-अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए। जैसे कि--&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;मुफ्त में मिली सायकल को इस तरह देकर उसने क्या साबित किया??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;मुफ्त की सायकल को दो हज़ार में बेचकर वो सस्ती देने की बात कैसे कह सकता हैं??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;जो सामाजिक-धार्मिक संस्थाएं विकलांगो की सहायता करती हैं उन्हें यह बात जानकर क्या झटका नहीं लगेगा?? &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;इससे बेहतर तो वो किसी से उधार या क़र्ज़ ले लेता या अपनी ट्राय साइकल को गिरवी रख देता। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;आजकल के घोर-कलयुगी, पापी जमाने में मुट्ठी भर लोग विकलांगो के लिए कुछ कर रहे हैं, क्या ये घटनाक्रम उन्हें हतोत्साहित नहीं करेगा??? &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;अगर हरेक विकलांग ऐसा करने लग जायेंगे तो ये तो एक व्यापार का रूप ले लेगा। जोकि दुर्भाग्य होगा।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;उन संस्थायों का क्या होगा, जो इस तरह के लोगो (विकलांगो) द्वारा आये दिन लुटते जायेंगे????&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;आज आम आदमी का विश्वास आये दिन झूठे-ढोंगी साधू-महात्माओं-बाबाओं द्वारा तोड़ा जा रहा हैं, तो क्या लोग विकलांगो पर विश्वास कर पायेंगे???&lt;br /&gt;भिखारियों पर से लोगो का विश्वास-भरोसा पूरी तरह से तो नहीं लेकिन काफी हद तक कम जरूर हो गया हैं। कारण उनका झूठ-मूठ लंगडाना या हाथ मोड़ना या पट्टियां बांधकर कोढ़ी होने का नाटक करना, आदि।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;भगवान् की दया से लोगो का विश्वास साधू-महात्माओं पर से जरूर उठ गया हैं, लेकिन विकलांगो पर अभी भी बना हुआ हैं। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;बाहरी लोग या नकली लोग ऐसा करे तो और बात हैं, लेकिन जब असली लोग (विकलांग) ही ऐसा करने लगेंगे तो लोग कैसे उनपर विश्वास-भरोसा कायम रख पायेंगे???&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;मन में और भी ढेर सारे सवाल अनुत्तरित रह गए हैं, लेकिन फिलहाल इतना ही।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#996633;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-3234216015567352630?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/3234216015567352630/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/06/blog-post_28.html#comment-form' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/3234216015567352630'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/3234216015567352630'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/06/blog-post_28.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-5012098027237119092</id><published>2010-06-21T00:10:00.000+05:30</published><updated>2010-06-21T00:10:00.194+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;सट्टा-जुआ-लाटरी चिटफण्ड या चीटफण्ड????&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;ज्यादा धन कमाने, जल्दी अमीर बनने या कमाई के शॉर्ट कट के रूप में लोग सट्टे-जुए, और लाटरी पर शायद ज्यादा ही विश्वास करते हैं। पता नहीं लोग मेहनत करके, इज्ज़त की रोटी की बजाय सट्टे-जुए जैसी मुफ्त (हराम) की कमाई की रोटी खाना क्यों पसंद करते हैं?? लोगो में सट्टे की इतनी बुरी लत पैदा हो चुकी हैं कि-"वे अपनी इज्ज़त, अपने मान-सम्मान को भी गंवाने को सहर्ष तैयार हो जाते हैं। इज्ज़त-मान सम्मान के बाद बाद नंबर घर के कपडे-लत्तो, और बर्तनों का आता हैं, जिसे भी सटोरिये सट्टो के अड्डो पर लुटा डालते हैं। "&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;इसका मुख्य कारण 1 के बदले 90 (कुछ जगह 95) के लालच में लोगबाग बड़ी आसानी से आ जाते हैं। लोग ये भूल जाते हैं कि-वे सट्टा लगा कर गंवाएंगे ही गंवाएंगे, पायेंगे कुछ भी नहीं।" यही (लगाईवाल के हाथ कुछ ना लगना और खाईवालो का भारी कमीशन) खाइवालो की अंधी-कमाई का राज हैं, लगाईवाल के हाथ सिवाय पश्तावे के कुछ नहीं आता हैं। लेकिन ये पश्तावा लम्बे समय तक नहीं टिक पाता हैं, सटोरियों के मन में लालच का पलड़ा सदैव ज्यादा भारी रहता हैं।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;ये सब चिटफण्ड नहीं चीटफण्ड हैं। और लोग चिटफण्ड समझ कर चीटफण्ड में अपना पैसा बर्बाद कर रहे हैं। आज तक मैंने कभी किसी को सट्टे-जुए के सहारे इज्ज़तदार तो दूर की बात अमीर बनते भी नहीं देखा हैं। और जो लोग सट्टे के सहारे अमीरी तक पहुँच भी गए वे लम्बे समय तक नहीं ठहर सके। और एक और बात, कुछ लोगो के बारे में कहा जाता हैं कि-वे खानदानी अमीर और सट्टेबाज़ हैं।" तो असलियत ये हैं कि-"वे खानदानी अमीर बेशक होंगे लेकिन उनके और भी कई काम भी अवश्य होंगे, हाँ कुछ कमाई जरूर सट्टे से आती होगी, लेकिन पुरी की पुरी कमाई सट्टे से आती हो, ऐसा तो संभव ही नहीं हैं। "&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;मैंने तो आज तक लगवाने वालो को ही अमीर (अस्थाई तौर पर) होते देखा हैं बाकी सभी लगाने वालो को तो मैंने रोडपति, कंगाल होते हुए ही देखा हैं। मेहनत से बड़ा और बेहतरीन जरिया कोई नहीं हैं। मेहनत-मजदूरी करके दो जून की रोटी खाना ज्यादा इज्ज़त देता हैं नाकि सट्टे-जुए से प्राप्त अनाप-शनाप धनदौलत से कोई ज्यादा इज्ज़त होती हैं। फिर भी ना जाने क्यों लोग सट्टे-जुए-लाटरी की तरफ रुख करते हैं......????&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;पुलिस-प्रशासन को सटोरियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाही करनी चाहिए। जोकि महज मामूली जुर्माना या एकाध महीने की सज़ा से कही बढ़ कर हो। वैसे पुलिस-क़ानून कुछ करे या ना करे लोगो को अपने सूझबूझ से, अपने विवेक से कार्य करना चाहिए। मेहनत का कोई विकल्प नहीं हैं, मेहनत ही सबसे बड़ी और इज्ज़त दायक चीज़ हैं, ये लोगो आज नहीं तो कल समझ में आ जाएगा, लेकिन आयेगा अवश्य। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;धन्यवाद। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ccff;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ccff;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ccff;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ccff;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ccff;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ccff;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ccff;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ccff;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-5012098027237119092?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/5012098027237119092/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post_29.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/5012098027237119092'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/5012098027237119092'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post_29.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-6916875042191313669</id><published>2010-06-14T00:17:00.000+05:30</published><updated>2010-06-14T00:17:00.416+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#003300;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;strong&gt;धन्यवाद अमेरिका।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;मैं एक ऐसी बात के लिए अमेरिका का धन्यवाद प्रकट कर रहा हूँ जोकि आप सोच भी नहीं सकते। तमाम राजनितिक, कूटनीतिक, आर्थिक, द्विपक्षीय, विदेश मंत्रालय, मुद्रा-विनिमय, आदि प्रचलित और आम मुद्दों से हट कर मैं अमेरिका का एक ख़ास कारण से शुक्रिया अदा कर रहा हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;मैं पीटा (पीपल फॉर दी एथिकल ट्रीटमेंट फॉर एनिमल्स) का सदस्य हूँ। वो भी तब से जब मैं स्कूल में पढता था और मेरी उम्र महज सोलह-सत्रह साल ही रही होगी। ये उस वक़्त कि बात हैं जब मेरे उम्र के किसी भी बच्चे को इन सबके बारे में कुछ ज्ञान ही नहीं होता था। मेरे पास करीब सात सालो से पीटा के ईमेल्स आते रहते हैं। और मैं करीब 99% तक ईमेल्स पर उचित कार्रवाही करता हूँ। हाल ही में आये एक ईमेल से मेरा मन अमेरिका के प्रति श्रद्धावनत को गया साथ ही भारत के प्रति थोड़ा गुस्सा, थोड़ी नाराजगी का भाव उमडा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;उस ईमेल में एक घटना का विस्तार से वर्णन लिखा हुआ था। उस ईमेल में सभी सबूत भी पेश किये गए थे। उस ईमेल में एक खबर लिखी थी = अमेरिका के न्यूयार्क में एक गाडी वाला अपने गाडी में एक कुत्ते को लेकर बाज़ार शोपिंग करने गया था, गाडी के सभी शीशे पूरी तरह से चढे हुए थे। तभी गर्मी के कारण कुत्ते कि तबियत बिगड़ गईं और वो बुरी तरह से हांफने और गाडी के अन्दर बेचैनी से घूमने लगा। आसपास के लोगो ने तत्काल पुलिस को खबर दी। पुलिस ने भी मालिक का पता ना चलने पर गाडी के शीशे को तोड़ा और जानवरों के अस्पताल की को एम्बुलेंस बुलाकर कुत्ते को भेजा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;हालांकि उस ईमेल में कुत्ते की मौत की दुखद खबर के साथ एक अच्छी बात भी लिखी हुई थी। वो ये की पुलिस ने उस गाडी के मालिक/ड्राइवर को लापरवाहीपूर्वक कुत्ते की ह्त्या करने के जुर्म में छ: महीने की सज़ा और एक हज़ार डॉलर (करीब पैंतालिस से पचास हज़ार रूपये) का जुर्माना भी लगाया। मुझे उस ईमेल को पढ़कर बहुत ख़ुशी हुयी। मुझे अमेरिका की पुलिस की तत्परता, वहाँ की अदालत द्वारा तुरंत फैसला देना और जानवरों के लिए अलग से हॉस्पिटल होना और एम्बुलेंस द्वारा कुत्ते को ले जाना, आदि बातों ने काफी प्रभावित किया। मुझे ख़ुशी के साथ-साथ भारत पर गुस्सा और नाराजगी भी आई। कारण =&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;भारत में बड़ी संख्या में जानवर (सिर्फ कुत्ते ही नहीं बिल्ली, खरगोश, जैसे कई पालतू जानवर भी) बंद गाडी में भीषण गर्मी के कारण मारे जाते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;यहाँ कोई कुछ बोलता ही नहीं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;यहाँ आम आदमी इस सम्बन्ध में जागरूक ही नहीं हैं।&lt;br /&gt;यहाँ की पुलिस इंसान को ही कुछ नहीं समझती कुत्ते (या अन्य जानवर) को क्या समझेंगी??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;इंसानों की मौत पर भी पुलिस देरी से पहुँचती हैं, वो भी मामला बढ़ने या ज्यादा बुलाने पर।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;यहाँ की एम्बुलेंस आदमी के काम आ जाए यही काफी हैं, जानवर के लिए तो हॉस्पिटल ही नहीं हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;हैं, पर वो भी रामभरोसे ही हैं। इंसान ही हॉस्पिटल में दाखिल हो जाए गनीमत हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;वहाँ तो कुत्ते को भी एम्बुलेंस में डालकर हॉस्पिटल ले जाया जाता हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;यहाँ चाहे जितने जानवरों की ह्त्या करदो, कोई क़ानून, अदालत, या पुलिस कुछ नहीं करेगी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;वहाँ गलती से ही कुत्ते के मरने पर भारी सज़ा और जुर्माना भुगतना पड़ गया।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;वहाँ भी मुर्गे, बकरे, पाडे, भैंस, गाय, आदि जानवर भारत के मुकाबले कई गुना ज्यादा कटते हैं, लेकिन फिर भी एक कानूनी तरीके से।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;भारत में तो इंसानों को मारने पर भी जवानी से बूढ़े होने पर सज़ा मिलती हैं, कई बार तो मरने के बाद भी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;वहाँ अदालत और पुलिस दोनों ने त्वरित गति से सारे काम पुरे किये, और अपराधी को सज़ा दिलवाई।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;महावीर और बुद्ध के देश में क्या जानवरों पर अत्याचार ख़तम नहीं हो सकता??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;क्या ऐसा भारत में हो सकता हैं???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;अगर नहीं, तो क्यों नहीं हो सकता???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;और अगर हाँ, तो कब???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;बहुत सी बातें और भी मन में उठ रही हैं, लेकिन फिर कभी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-6916875042191313669?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/6916875042191313669/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/06/blog-post_14.html#comment-form' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/6916875042191313669'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/6916875042191313669'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/06/blog-post_14.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-8375154381085002903</id><published>2010-06-07T02:34:00.001+05:30</published><updated>2010-06-07T02:34:00.333+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;भ्रूण ह्त्या की क्या??&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;अरे-अरे गलत ना समझिये, मैं अपराध वाला भ्रूण ह्त्या नहीं कह रहा हूँ और ना ही मैं किसी को भ्रूण ह्त्या करने को उकसा-प्रेरित कर रहा हूँ। मैं तो पुण्य कार्य वाला भ्रूण ह्त्या करने को कह रहा हूँ। नहीं समझे????, ज़रा नीचे पढ़ने का कष्ट कीजिये, आपको सब समझ में आ जाएगा।&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;आज देश में जितनी भी समस्याएं हैं, उन सभी का अंत भ्रूण-ह्त्या में ही निहित हैं। चोरी-डकैती, लूटपाट, दंगे-फसाद, ह्त्या-बलात्कार, छेड़छाड़, गाली-गलौच, मारपीट, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, घूस-रिश्वतखोरी आदि समस्याएं मुंह बाएं खड़ी हैं, उन सबका सफाया भ्रूण ह्त्या से ही किया जा सकता हैं। आज़ादी से लेकर अब तक, इतना लंबा समय गुज़र गया हैं, लेकिन दुर्भाग्य से कोई भी समस्या कम होने की बजाय कैंसर की तरह फैलती-बढती ही गयी हैं। कितने नेता, सामाजिक कार्यकर्ता आये और चले गए, कितने मुख्यमंत्री, प्रधानमन्त्री, और राज्यपाल, राष्ट्रपति आये और चले गए, लेकिन कोई भी समस्या रत्ती भर भी कम नहीं हुयी।&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;बहुत हो गया, बहुत कुछ कर लिया, बहुत से उपाय-रास्ते पर चल लिए, बहुत से तरीके आजमा लिए, अब सिर्फ एक ही रास्ता बचा हैं। अब एकमात्र उपाय भ्रून ह्त्या का ही रह गया हैं, अगर ये उपाय असफल हो जाता हैं तो देश को कोई तरक्की नहीं करा सकता, और अगर भ्रूण ह्त्या का आखिरी उपाय सफल-कारगर होता हैं तो कोई भी देश को नंबर वन बनने से नहीं रोक सकता। अब जानिये कि-ये उपाय हैं क्या????&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;कोई भी समस्या जन्मजात नहीं होती हैं, कोई भी व्यक्ति जन्म से ही अपराधी, चोर, डाकू, या भ्रष्ट, हत्यारा या बलात्कारी नहीं होता हैं। नाही भगवान् किसी को बुरा बनने के निर्देश/आदेश देता हैं और ना ही भगवान् किसी को ऐसा बनाकर भेजता हैं। बल्कि उसे ऐसा बनाने के लिए आसपास का माहौल, उस वक़्त की स्थितियां, परिस्थितियाँ, माहौल, और हालात ज़िम्मेदार होते हैं। किसी भी अपराधी को मारना-पीटना, प्रताड़ित करना, या जेलों में ठूस देने, आदि उपायों से कोई विशेष सुधार नहीं होता हैं। हाँ जब तक अपराधी जेल में बंद होता हैं, तब तक बाहरी समाज और दुनिया को अवश्य राहत मिल जाती हैं, लेकिन ये सिर्फ तात्कालिक राहत ही होती हैं, नाकि दीर्धकालिक।&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;किसी को संगत तो किसी को यार-दोस्त, किसी को माँ-बाप तो किसी को नजदीकी रिश्तेदार, किसी को गरीबी तो किसी को भूखमरी, किसी को भ्रष्टाचार तो किसी को देश-समाज, किसी को देश का लचीला कानून तो किसी को अदालत या पंचायत का गलत, भेदभावपूर्ण, और अन्याय भरा फैसला, आदि-आदि। यानी कुलजमा किसी ना अपराधी के जन्म के पीछे हम लोगो, संस्थायो में से ही कोई ज़िम्मेदार होता हैं। हम ही शरीफ, सीधे-सादे लोगो को अपराध की राहो पर धकेलते हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;स्कूल-कालेजो में कई मास्टरों-मास्टरनियों का गलत व्यवहार या क्रूर सज़ाएँ तो घरो में माँ-बाप या किसी रिश्तेदार का लड़ाकू या क्रूर होना या आपसी कलह का माहौल रहना। यार-दोस्तों और संगती का नशेडी होना या गुंडा-आवारा टाइप होना, किसी मुक़दमे, मामले में अदालत-पंचायत द्वारा गलत या भेदभावपूर्ण फैसलों के कारण ज़िन्दगी खराब होना। किसी का गरीबी, अशिक्षा, और भूखमरी का शिकार होना, आसपास का माहौल, गली-मोहल्ले के हालात, भ्रष्टाचार, आदि कोई एक नहीं वरन बहुत से कारण होते हैं अपराधी के जन्म के पीछे।&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;हमें अपराधियों के पैदा होने पर उन्हें सुधारने के उपायों की बजाय उन्हें पैदा होने से रोकने के उपाय करने होंगे। अपराधियों को पैदा होने से रोकने के लिए हमें सीधे उन कारणों पर प्रहार करना होगा, जिनकी वजह से अपराधियों का जन्म होता हैं या शरीफ-सीधेसादे लोग अपराध की दुनिया में प्रवेश करते हैं। हमें नशे पर प्रभावी रोक लगानी होगी, हमें क़ानून को सख्त बनाना होगा (लागू भी करना होगा), हमें पंचायतो-अदालतों को और भी जवाबदेह बनाना होगा, हमें माता-पिता, रिश्तेदारों, टीचरों को, संयमशील, शांत, और न्यायमूर्ति (जो सैदेव निष्पक्ष बने रहे, जो सत्य और अहिंसा के नियम का पालन करे) बनाना होगा, हमें रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, घूसखोरी, पर सख्ती से रोक लगानी होगी, हमें गरीबी-भूखमरी, और अशिक्षा को जड़मूल से मिटाना होगा, आदि-आदि कई उपाय करने होंगे। अभी और इसी वक़्त, अविलम्ब।&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;सभी समस्याओं, सभी अपराधियों के जन्म के लिए व्यवस्थागत कमियाँ हैं, जिन्हें दूर किया जाना अतिआवश्यक हैं। हम/सभी लोग, संस्थाएं प्रत्यक्ष रूप से ना सही लेकिन परोक्ष रूप से तो ज़िम्मेदार हैं ही अपराध और अपराधियों के जन्म के पीछे। अब एकमात्र उपाय भ्रूण ह्त्या का ही रह गया हैं, अगर ये उपाय असफल हो जाता हैं तो देश को कोई तरक्की नहीं करा सकता, और अगर भ्रूण ह्त्या का आखिरी उपाय सफल-कारगर होता हैं तो कोई भी देश को नंबर वन बनने से नहीं रोक सकता।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;तो फिर आप कब से शुरू कर रहे हैं अपराधियों की भ्रूण हत्याएं करनी???&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-8375154381085002903?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/8375154381085002903/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/06/blog-post.html#comment-form' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/8375154381085002903'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/8375154381085002903'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/06/blog-post.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-6984180171308871071</id><published>2010-05-28T10:02:00.001+05:30</published><updated>2010-05-29T00:40:16.075+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;विश्वास कीजिये कि विश्वास हैं।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;अगर आपसे कोई पूछे कि-"दुनिया किस पर कायम हैं या दुनिया के चलने का आधार क्या हैं??" तो आप क्या जवाब देंगे?? चलिए छोडिये मैं ही बताये देता हूँ। और उत्तर मात्र एक शब्द लेकिन गहरे अर्थ का हैं, और वो शब्द हैं-"विश्वास"।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;जी हाँ विश्वास कीजिये कि-विश्वास हैं। विश्वास पर ही दुनिया कायम हैं और दुनिया के अनवरत चलने का आधार ही विश्वास हैं। हमारी ज़िन्दगी में, हमारे आस-पास घटित हो रही हर घटना के पीछे एक अदृश्य विश्वास ही हैं। विश्वास के कारण ही हम आज इक्कीसवी सदी देख रहे हैं, अगर विश्वास ही नहीं होता तो शायद हम भी ना होते।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;बहुत से लोग विशेषकर धोखा खाए लोग विश्वास नाम की चीज़ ही नहीं मानते। ये लोग तो विश्वास जैसी बात को तो सिरे से ही नकार देते हैं। लेकिन, भाइयो आपके दुःख की, आपकी भावनाओं की, और आपके ज़ज्बातों की मैं कद्र करता हूँ, लेकिन यह कोई अंतिम सच नहीं हैं। दुनिया में अविश्वास से कही लाखो गुणा विश्वास मौजूद हैं। अगर आपके साथ एक ज़ना धोखा करता हैं तो सौ लोग विश्वास भी तो करते हैं...इस तथ्य को क्यूँ ठुकरा रहे हैं आप????&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;जब आप गाडी, मोटर साइकिल, या कोई अन्य वाहन चलाते हैं तो क्या आपको खुद पर और दूसरो पर विश्वास नहीं होता?? खुद पर तो आपको ये होता ही हैं कि-"आप बिना गिरे, बिना चोट खाए, और बिना संतुलन खोये आप सफलतापूर्वक वाहन चला लेंगे।" लेकिन दूसरो पर भी तो आप विश्वास बनाए रखते हैं, मैं जानता हूँ कइयो का जवाब नकारात्मक होगा, लेकिन मुझे पता हैं कि आप जाने-अनजाने अन्यो पर विश्वास करते हैं। दूसरो पर आपको विश्वास करना ही होता हैं कि-"वो आपके साइड मांगने पर ख़ुशी-ख़ुशी साइड दे देगा, वो मुड़ने से पहले इन्डिकेटर या इशारा देगा, वो अपनी लेन-सड़क पर ही अपना वाहन चलाएगा और आपके समक्ष नहीं आयेगा, और ये भी कि-वो अपना संतुलन बनाकर रखेगा और आपमें आकर नहीं ठोकेगा...!!!"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;क्या आपको अपने देश कि पुलिस और कानूनों पर विश्वास नहीं हैं??? अगर नहीं, तो आप सच्चे भारतीय नहीं हो सकते। हर भारतीय को अपने संविधान पर विश्वास होना चाहिए, और जो संविधान पर विश्वास करता हैं, वो अपने क़ानून-पुलिस पर भी विश्वास करता हैं। अगर आपके साथ पुलिस द्वारा कोई अन्याय होता हैं तो आपका चुप बैठना गलत हैं। उच्चाधिकारियों को शिकायत करने की बजाय आप व्यवस्था पर अविश्वास करते है। जोकि गलत हैं, आपको विश्वास रखते हुए आगामी कारर्वाही करनी चाहिए। वैसे आमतौर पर आप पुलिस-क़ानून पर विश्वास करते हैं, तभी तो आप उनकी शरण में जाते हैं और दुर्भाग्य से आपका विश्वास कभी-कभी तोड़ दिया जाता हैं। लेकिन, सौभाग्य से आप अभी भी विश्वास का दामन थामे होते हैं, और आवश्यकता पड़ने पर पुन: उनकी शरण में चले जाते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;जब आप पर कोई संकट आता हैं या आप किसी विपदा में फंस जाते हैं, तो आप जिसपर विश्वास ही नहीं करते वही अक्सर आपके साथ खडा होता हैं। आगजनी, भूकंप, सुनामी, चक्रवात, और इसी तरह की अन्य प्राकृतिक-अप्राकृतिक हादसों/आपदाओं के वक़्त आप अनजान लोगो की मदद करते हैं और अनजाने लोग आपकी तत्काल मदद करते हैं। यहाँ सभी लोग एक अनोखे और मजबूत विश्वास के बंधन में बन्ध जाते हैं। और कई-दुर्लभ मामलो में तो जब सभी लोग, सारे लोग, सारे राहत दल-और सरकारे किसी के बचने की उम्मीद ही छोड़ देती हैं, तो कई-कई दिनों बाद किसी के ज़िंदा होने के सबूत (हिलना, कराहना, आदि) मिल जाते हैं। अब इसे आप क्या कहेंगे??, उन सभी के ज़िंदा बचने का एकमात्र कारण उनका विश्वास था, अन्यथा वे भी बाकी मृतकों की सूची में शामिल हो सकते थे।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;अगर अभी भी आपको विश्वास पर विश्वास ना हो रहा हो तो मैं आपको बता देना चाहता हूँ कि-"जब आप मोबाइल में कोई काम करते हैं, सन्देश पढ़ते हैं, या कोई गेम खेलते हैं तो आपको विश्वास रहता हैं कि-"मोबाइल सही काम करता रहेगा, मोबाइल कम बैटरी के कारण बंद नहीं होगा, या मोबाइल हँग-जाम नहीं होगा।" इसी तरह जब आप अपनी कुर्सी या चारपाई पर बैठे होते हैं तो आपको विश्वास होता हैं कि-"ये चारपाई/कुर्सी टूटेगी नहीं या संतुलन नहीं खोएगी और आप गिरेंगे नहीं।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;भई, अगर आपको अब भी किसी पर विश्वास नहीं हो रहा हैं, आप विश्वास नाम की चीज़ को ही नहीं मानते हैं, तो मैं तो क्या??, दुनिया की कोई भी ताकत आप में विश्वास नहीं जगा सकती। वैसे मैं आप सबकी जानकारी के लिए बता दूँ कि-"जब मैं ये ब्लॉग लिख रहा था तो मुझे तो कई तरह के, कई भांत-भांत के विश्वास थे जैसे कि-"लैपटॉप बंद नहीं होगा, लैपटॉप हँग नहीं होगा, इंटरनेट बिना रुकावट चलता रहेगा, इंटरनेट धीरे नहीं चलेगा, आदि-आदि।" &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#6600cc;"&gt;&lt;strong&gt;एक और बात -- विश्वास का दिखाई देना हर मामले में, हर बार संभव नहीं हो सकता हैं। बहुत से विश्वास, दिखाई नहीं देते हैं, प्रत्यक्ष रूप से आपके समक्ष नहीं होते हैं, लेकिन परोक्ष रूप से उनकी प्रभावी और असरदार उपस्थिति होती हैं। चाहे आप यकीन करे या ना करे, पर सत्य यही हैं। वैसे विश्वास को लेकर उदाहरण तो बहुत हैं, उदाहरणों की फेहरिस्त बहुत लम्बी-चौड़ी हैं। जोकि, मैं दे तो सकता हूँ, लेकिन समयाभाव के कारण नहीं दे रहा। जिसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663333;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;विश्वास जिंदाबाद।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#990000;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#990000;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#990000;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#990000;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#990000;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#990000;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#990000;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#990000;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-6984180171308871071?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/6984180171308871071/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/05/blog-post_28.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/6984180171308871071'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/6984180171308871071'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/05/blog-post_28.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-1291485137648707439</id><published>2010-05-22T00:59:00.001+05:30</published><updated>2010-05-22T14:59:11.851+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="color:#993399;"&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#330033;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;बड़े-बुजुर्गो की बदलती सोच।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;हाल ही में मेरे दोस्त के घर एक नया ऐसी लगा लेकिन मेरा दोस्त कुछ नाराज़ और उखडा हुआ लगा। कारण पूछने पर बताया-"क्या बताऊँ यार?? पापा ने घर में नया ऐसी लगवा लिया हैं, हैं तो ख़ुशी की बात लेकिन इतना खर्चा और प्रतिमाह आने वाला भारी भरकम बिल..... मुझे अजीब लग रहा हैं।"&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;मैंने उसे समझाने की कोशिश कि-"यार ऐसा कुछ नहीं हैं, तू चिंता क्यों कर रहा हैं?? तेरे पापा ने कुछ सोच कर ही ऐसी लगवाया होगा, और रही बात खर्चे की तो उसका हिसाब तेरे पापा ने लगा लिया होगा। तू खुश हो जा यार, दुखी मत हो।"&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;वो तर्क करते हुए बोला-"यार खर्च बचाने के लिए ही तो मैं ट्युशन नहीं लगा, खुद ही पढता हूँ। कॉलेज के हॉस्टल की बजाय किराए के सस्ते से कमरे में रहता हूँ। माना, ऐसी कोई बड़ी चीज़ नहीं रही, पर मुझे ये सब पसंद नहीं हैं। पापा बैंक में क्लर्क हैं और तनख्वाह मात्र पैंतीस हज़ार। ऐसे में ये मुझे फिजूल खर्च से अधिक कुछ नहीं लग रहा हैं........"&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;मैंने उसे समझाने की फिर (और शायद आखिरी) कोशिश की, लेकिन वो बिफर गया-"यार तू तो मुझे ऐसे समझा रहा हैं, जैसे तुझे कुछ पता नहीं हो। मेरे और पापा के रिश्ते कैसे हैं??, तू अच्छी तरह से जानता हैं। मोम भी डैड से कैसे खौफ खाती हैं ये भी तुझे मालूम हैं, एक बार तो पापा ने मम्मी को तेरे सामने ही डांट दिया था। मुझे ये सब बिलकुल भी पसंद नहीं हैं। पापा कहते हैं कि-"बेटा ये सब म अं तुम्हारे लिए ही कर रहा हूँ, तुम्हे गर्मी ना लगे इसलिए..." लेकिन वे क्या जानते नहीं कि-"मैं साल में ज्यादा से ज्यादा छुट्टियों समेत तीस दिन ही होता हूँ।"क्यों वे ऐसा कर रहे हैं??......"&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;. &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;अब मैंने उसे समझाने की सारी कोशिशो पर विराम लगा दिया था। मैं अब मौन था, मैं एक गहरे सोच-विचार में पड़ गया था। मेरे मन में कई सवाल उठ रहे थे, जिनके जवाब सिर्फ और सिर्फ बड़े-बुजुर्गो के पास ही हैं नाकि नौजवानों-आज की पीढ़ी के पास। मेरे मन में उठ रहे सवालों में से कुछ सवाल =&lt;br /&gt;बड़े बुजुर्ग इतने बदल क्यों गए हैं??&lt;br /&gt;पहले बड़े-बुजुर्ग लोग अपने बच्चो की खुशियों के लिए अपनी खुशियाँ त्याग देते या कम कर देते थे, अब क्या हो गया हैं??&lt;br /&gt;बच्चे चाहे कैसे भी हो, भविष्य में सहारा तो उनका ही लेना पडेगा।&lt;br /&gt;अगर बच्चो को घर से निकाल कर या बे-दखल करके आप नौकर / नौकरानी या सहायक / सहायिका रखने की सोचेंगे तो शायद आप आत्मघाती कदम उठा रहे हैं।&lt;br /&gt;नौकर, आदि आपकी संपत्ति और जानमाल का दुश्मन हैं। उसकी नज़र मात्र आपकी संपत्ति पर ही होगी। मौक़ा पाकर वो अपना खेल खेल जायेंगे।&lt;br /&gt;आपके कारण बच्चे दुःख पाए या ना पाए, लेकिन आपको बच्चो की नाराजगी का कारण तो अवश्य ही पूछना चाहिए।&lt;br /&gt;आप कहेंगे कि-आजकल के बच्चे कौनसा सुख देकर निहाल कर रहे हैं??"&lt;br /&gt;तो मैं आपको बता दूँ कि-"ये सब बहुत हद तक संस्कारो और संगति पर ही निर्भर करता हैं। अगर बच्चे अभी निहाल नहीं भी करते हैं तो भी उनके पास इसके लिए कोई वाजिब-जायज़ कारण नहीं होता हैं। लेकिन, अगर आप अपना आराम, अपना सुख देखेंगे तो बच्चो के पास ना चाहते हुए भी कई कारण मिल जायेंगे कि-"हमारे माँ-बापों ने तो ऐश मारी हैं, या हमारे माँ-बाप ने फ़िज़ूल में धन लुटाया हैं, या फिर हमारे माँ-बाप ने हमारे लिए कुछ नहीं बचाया (छोड़ा), आदि-आदि।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;&lt;strong&gt;कृपया मेरी इस बात पर गहन मंथन करे, शायद आपको भी अपनी भूल समझ में आ जायेगी। &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;&lt;strong&gt;(ये ब्लॉग बड़े-बुजुर्गो के खिलाफ या नौजवानों के समर्थन में बिलकुल भी नहीं लिखा गया हैं। ये ब्लॉग उस अनुभव के आधार पर लिखा गया हैं जो मुझे इस भीषण गर्मी में अपने मित्र के माध्यम से हुआ हैं।)&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-1291485137648707439?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/1291485137648707439/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/05/blog-post_22.html#comment-form' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/1291485137648707439'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/1291485137648707439'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/05/blog-post_22.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-649595716520167705</id><published>2010-05-16T10:36:00.001+05:30</published><updated>2010-05-22T14:55:16.092+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="font-family:times new roman;font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#330033;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;जाति आधारित जन गणना क्यों???&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;"&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;इस बार कि जन गणना में आज़ादी के बाद पहली बार जातियों कि गणना भी की जा रही हैं। मैं इस तरह की कवायदों के सख्त खिलाफ हूँ, इस मुद्दे पर मेरा विरोध खुलकर बेशक ना हो लेकिन अंतर्मन से जरूर हैं। आखिर किसलिए की जा रही हैं इतनी कसरत??&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;"&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;इस जन गणना से सबसे बड़ा ख़तरा जातीय दुश्मनी और नफरत बढ़ने का हैं। भारत को हम सभी जात-पात से मुक्त देखना चाहते हैं लेकिन दुर्भाग्य देखिये -- आज जनगणना में जातियों की गणना को भी शामिल करते हुए अभी तक की सारी कवायदों पर पानी फेरा जा रहा हैं। सारी मेहनत को नष्ट किया जा रहा हैं, जो अभी तक देश में जात-पात के भेद और लड़ाइयों को मिटाने में की गयी हैं।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;"&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;राजनितिज्ञो के निहित स्वार्थ, लगातार बढ़ते आरक्षण, और इन सबसे पैदा हुई समस्याओं से वैसे ही जातिगत लडाइयां-टकराव के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में अगर जातिगत जनसंख्या के सटीक आंकड़े सामने आ गए तो स्थिति विस्फोटक हो जायेगी। सामाज का ताना-बाना बिगड़ने का बड़ा ख़तरा हैं। जाति के आधार पर जनगणना देश के लिए आत्मघाती कदम साबित होगा। वोट बैंक की राजनीति वैसे ही देश-प्रदेश की राजनीति पर बुरी तरह हावी हैं, ऐसे में जातिगत वोट बैंक के सटीक-ठीक आंकड़े आने का मतलब हैं, राजनितिक दलों द्वारा इन्हें अपनी और खींचने के नापाक इरादे और हथकंडे।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;"&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;मुझे जातिगत जनगणना का कोई औचित्य ही नहीं नज़र आ रहा हैं सिवाय इसके कि-"जातियों के आंकड़े मालूम होने के बाद जाति-विशेष के काम ज्यादा प्राथमिकता के साथ होंगे। और इन्ही जातियों के लिए ही लोक-लुभावन योजनायें चलाई जायेंगी, बाकी जातियों को तो हाशिये पर ड़ाल दिया जाएगा।" पहले (आज़ादी के बाद -- संविधान निर्माण के वक़्त) हमेशा सिर्फ अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए ही आरक्षण जरूरी माना गया था, क्योंकि उस वक़्त उसके कई ठोस-ऐतिहासिक-और सामाजिक कारण थे। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;"&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;लेकिन, अब हर जाति आरक्षण की मांग करने लगी हैं, हर जाति बिना जरुरत-बिना वजह अपने लिए आरक्षण लेने के लिए जायज़-नाजायज़, सही-गलत, अहिंसक-हिंसक, हर संभव तरीका अपना रही हैं। जोकि सरासर गलत, अमान्य और अस्वीकार्य हैं। जिसे आरक्षण मिल जाता हैं, वो ना सिर्फ आरक्षण का दुरूपयोग करता हैं वरण अपने आपको अन्य जातियों से बड़ा, महान समझने लगता हैं। यही से जातीय विभेद, जातीय वैमनश्य, और जातीय दुश्मनी का जन्म होता हैं। दो भिन्न-भिन्न जातियों के बीच लड़ाई-तनाव-और टकराव का मुख्य कारण आरक्षण ही हैं। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;"&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;मैं इस लेख के माध्यम से किसी नेता को, किसी राजनेता को, किसी राजनितिक दल को या किसी अन्य व्यक्ति-दल को कुछ भी नहीं कह रहा हूँ, और नाही मेरा ऐसा कोई मकसद हैं। मैं तो आम जनता से, सच्चे भारतीयों से सिर्फ एक अपील/प्रार्थना करना चाहता हूँ कि--&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;"अपनी जाति सिर्फ और सिर्फ भारतीय और अपनी भाषा भी भारतीय (हिन्दी या आपकी मातृभाषा (अंग्रेजी या विदेशी भाषा नहीं) ही बताये।)"&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;"&gt;&lt;span style="color:#663366;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-family:times new roman;font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;br /&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#ffcc00;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-649595716520167705?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/649595716520167705/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/05/blog-post_16.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/649595716520167705'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/649595716520167705'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/05/blog-post_16.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-377791795459793339</id><published>2010-05-10T11:20:00.000+05:30</published><updated>2010-05-10T11:20:00.618+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;प्रकृति शहरों की ओर.......&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;हाल ही में मैं जिला युवा काँग्रेस के कार्यक्रमों में गया। ये कार्यक्रम राज़स्थान के विकासदूत, युवा दिलो की धड़कन, सूझवान, ऊर्जावान, और राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में था। जि.यु.काँ. के ये कार्यक्रम एक सप्ताह तक सफलतापूर्वक चला। लगातार एक हफ्ते तक चले इस कार्यक्रम की विशेषता थी इसके सभी कार्यक्रमों का ग्रामीण क्षेत्रो में होना। जि.यु.काँ.के सभी कार्यक्रमों में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सराहा।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;लगातार सात दिनों तक चले कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी के कार्यो और आदर्शो का प्रभाव था। इन्ही कार्यक्रमों में एक कार्यक्रम वृक्षारोपण (शहर से लगभग पच्चीस किलोमीटर दूर स्थित एक गाँव में) का भी था। मैं भी इस कार्यक्रम में उपस्थित था, वहाँ जिला युवा काँग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ ग्रामीणों में भी उत्साह देखने को मिल रहा था। वहाँ वृक्षारोपण करते समय ज्यादातर ध्यान नीम-पीपल-और बरगद की तरफ था। सब तरफ एक ही बात सुनाने को मिल रही थी कि-यार बरगद देना, भाई नीम हैं तो देना, क्या पीपल खत्म हो गए??, आदि-आदि। यानी जो भी व्यक्ति वृक्ष लगा रहा था वो इन तीनो में से ही कोई एक वृक्ष मांग रहा था, मानो और कोई वृक्ष-वृक्ष ना हो। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;पहले तो एक-दो बार मुझे अटपटा लगा, लेकिन बाद में मुझे बहुत अच्छा लगा। जिन वृक्षों को शहर में लगाना तो दूर, बल्कि लगे हुओं को भी धड़ल्ले से काटा जा रहा हैं, उन वृक्षों को लगाने के लिए यहाँ (गाँव में जि.यु.काँ.के कार्यक्रम में) होड़ मच रही हैं। मेरा मन खुश हो गया, संयोग से उसी दिन बेहद हलकी-हलकी बारिश भी हो रही थी। जिसकी वजह से लोगो को भीषण गर्मी से निजात भी मिल गयी थी और वृक्षारोपण के कार्यक्रम के लिए अनुकूल माहौल भी बन गया था।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;इस कार्यक्रम के बाद मेरे मन में कुछ सवाल उठ रहे थे, जिनके जवाब ग्रामीणों ने तो बेहद सरलता से और विस्तार से दे दिए हैं। अब देखना ये हैं कि-क्या शहरी लोग मेरे सवालों का जवाब दे पाते हैं या नहीं और अगर दे पाते हैं तो कब तक?? कुछ सवाल =&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;क्या वृक्षारोपण अभियान/कार्यक्रम शहरो में नहीं हो सकता?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;क्या शहरो में पहले से लगे वृक्षों की रक्षा नहीं की जा सकती??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;क्या शहरो में लगे वृक्षों को काटने से नहीं बचाया जा सकता??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;क्या वृक्षों के अवैध कटान के लिए ज़िम्मेदार भू-माफिया और वन-माफिया पर सख्ती नहीं बरती जा सकती??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;क्या शहरों को भी गांवो की तरह हरा-भरा और खुशहाल नहीं बनाया जा सकता?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;जिला युवा काँग्रेस ने पर्यावरण संरक्षण की ओर कदम बढाते हुए गाँव में वृक्षारोपण किया क्योंकि इस बार के सभी कार्यक्रम (गहलोत जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में) हमें गाँव में ही करने थे। लेकिन, शहरी व्यक्ति दूर-दराज जाने की बजाय अपने घर के लॉन-पार्क में, या घर के बाहर खाली पड़ी जमीन पर, या अन्य जगह पर एक वृक्ष भी तो लगा सकता हैं। आप आज नहीं तो कल पर्यावरण के महत्तव को समझेंगे, लेकिन समझेंगे जरूर। इसलिए, देर से समझने की बजाय अभी समझ जाइए ओर उचित स्थान देख कर कम से कम एक वृक्ष तो लगा ही डालिए। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-377791795459793339?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/377791795459793339/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/05/blog-post.html#comment-form' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#330000;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;बधाई हो ईमानदारी ज़िंदा हैं।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663333;"&gt;इस सन्डे (दो मई) को मैं अपनी पत्नी के साथ शहर के प्रमुख पार्क में घूमने गया था। वहाँ बेंच पर बैठ कर मस्ती से गप्पे मारते हुए और भयानक गर्मी को कुल्फी से मात देने की कोशिश कर रहे थे। काफी देर पार्क में बैठने के बाद हम दोनों पति-पत्नी शहर में इधर-उधर घुमते रहे। मैंने करीब एक घंटे बाद अपनी पत्नी से मोबाइल में टाइम देख कर बताने को कहा तो उसने कहा-"मोबाइल तो आपने पास हैं।" मैंने कहा-"मेरा मोबाइल तो मेरी जेब में हैं, लेकिन सीट बेल्ट के कारण जेब से निकाल नहीं पा रहा, ड्राइविंग कर रहा हूँ। तू अपने मोबाइल में देख कर बता।" तब उसने कहा कि-"मोबाइल तो मेरे पास नहीं हैं। ओह नो, मोबाइल पार्क में रह/गिर गया। जल्दी चलो शायद मिल जाए।" मेरे हाथ-पैर फूल गए, मैंने झट से गाडी भगाई, और पार्क में पहुँच कर आस-पास की सारी जगह खंगाल डाली, लेकिन कही मोबाइल नहीं दिखा। पूरे रास्ते वो भगवान् से प्रसाद चढाने की बात कहती रही और मैंने पांच सौ रूपये का इनाम देने की बात कही। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663333;"&gt;मैंने गाडी से और पार्क पहुँचने के बाद दो &lt;span style="font-size:0;"&gt;बार &lt;/span&gt;अपनी पत्नी के मोबाइल पर फ़ोन किया, लेकिन किसी ने उठाया नहीं। हमें लगा शायद किसी ने उठाया नहीं हैं, तभी तो घंटी जा रही हैं, वरना लोग तो सबसे पहले सिम ही निकाल फेंकते हैं, यही-कही पडा होगा। पुन: ढूंढ ही रहे थे कि-पत्नी के नंबर से फ़ोन आया, मैंने उन्हें मोबाइल के बारे में कहा और उन्हें वस्तु-स्थिति (पार्क का नाम, पार्क के बेंच की दशा/दिशा) बताई ताकि उन्हें यकीन हो जाए कि-हम जेनुइन लोग हैं। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663333;"&gt;उस अनजान व्यक्ति ने मुझे उसी रोड पर स्थित एक हॉस्पिटल के बाहर बुलाया। मैं तत्काल वहाँ पहुंचा और दुबारा फोने किया, उसने कहा &lt;span style="font-size:0;"&gt;कि-&lt;/span&gt;मैं हॉस्पिटल के अन्दर हूँ आ जाइए।" मैं भागा, वो नहीं मिला, मैंने फ़ोन किया तो उस अनजान व्यक्ति ने कहा कि-"मैं तो वही पर हूँ, आप नहीं दिख रहे। कहाँ हो आप???" मुझे शंका हुई, मुझे लगा कि-ऐसे ही भगा रहा हैं, मोबाइल तो गया &lt;span style="font-size:0;"&gt;समझो। &lt;/span&gt;फिरभी हिम्मत जुटा कर मैंने कहा कि-"मैं &lt;span style="font-size:0;"&gt;मेन &lt;/span&gt;गेट पर खड़ा हूँ, आप आ &lt;span style="font-size:0;"&gt;जाइए।" &lt;/span&gt;तभी एक देवता के रूप में एक सरदार जी आये और मोबाइल मेरे हाथ मेन &lt;span style="font-size:0;"&gt;पकड़ा &lt;/span&gt;कर जाने लगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;.&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663333;"&gt;मैंने उनहे अचंबित होकर देखा और पीछे से आवाज़ लगाकर रोका और धन्यवाद दिया। वो भी हंसता हुआ जाने लगा, मैंने उन्हें रोका और मेरा परिचय पत्र (विजिटिंग कार्ड) दिया और पांच सौ का नोट भी इनाम-स्वरुप देने लगा तो इनकार में सिर हिलाते और हँसते हुए वह जाने &lt;span style="font-size:0;"&gt;लगा। &lt;/span&gt;मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था, इतनी जल्दी खोया मोबाइल भी दे &lt;span style="font-size:0;"&gt;गया। &lt;/span&gt;बिना कोई बात &lt;span style="font-size:0;"&gt;किये,&lt;/span&gt; बिना कोई हाय-हेलो &lt;span style="font-size:0;"&gt;किये, &lt;/span&gt;सरदार जी ने मोबाइल पकडाया और जाने लगे। उन्होंने मेरे से बात करना या कोई परिचय प्राप्त करने या परिचय देने जैसा कुछ नहीं किया, बस मोबाइल दिया और चलते बने।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663333;"&gt;और मोबाइल लेने के बाद घर आने तक सारे रास्ते हम उस सरदार जी को सद-दुआएं देते &lt;span style="font-size:0;"&gt;रहे &lt;/span&gt;और भगवान् को भी धन्यवाद ज्ञापित करते रहे। इस घटना ने मेरा विश्वास ईमानदारी &lt;span style="font-size:0;"&gt;में &lt;/span&gt;बढ़ा दिया हैं। जो लोग इस दुनिया से, लोगो के दिलो से ईमानदारी के खत्म होने की बात कहते हैं, या दुनिया में ईमानदारी नाम की किसी चीज़ के अस्तित्व को ही नकारते हैं, उन्हें इस घटना से सबक मिल सकता हैं। मोबाइल करीब साढ़े चार हज़ार रुपयों का था और &lt;span style="font-size:0;"&gt;उसकी &lt;/span&gt;रीसेल वैल्यू करीब दो हज़ार तो थी ही, ऐसे में कोई बेईमान भी हो सकता हैं। लेकिन सरदारजी ने अनुकरनिय उदाहरण पेश किया हैं। इस घटना से साबित होता हैं &lt;span style="font-size:0;"&gt;कि-"&lt;/span&gt;दुनिया में ईमानदारी अभी भी कायम हैं, बस आवश्यकता हैं तो बस ईमानदारी को प्रोत्साहित करने और खुद ईमानदार बनाने की।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#663333;"&gt;धन्यवाद। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#330099;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-3692481461509818738?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/3692481461509818738/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post_05.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/3692481461509818738'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/3692481461509818738'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post_05.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-8028335725448106777</id><published>2010-04-28T11:42:00.001+05:30</published><updated>2010-05-02T16:30:25.210+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;कब बनेगा पूरा देश महाराष्ट्र??&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;अरे नहीं-नहीं आप कुछ और ना समझिएगा। मैं कोई गलत बात नहीं कह रहा हूँ। मैं ठाकरे वाले गुंडों (राज-उद्घव-या बाल ठाकरे) वाले महाराष्ट्र की बात नहीं कह रहा हूँ, मैं तो उस राष्ट्र की बात कह रहा हूँ जोकि देश कभी था।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;आज़ादी से पहले या यूँ कहिये अंग्रेजो का राज आने से पहले देश बहुत समृद्ध था, यहाँ के लोग, यहाँ की संस्कृति, यहाँ का रहन-सहन, यहाँ की बोली-चाली, आदि सब समृद्ध थे। लेकिन आज देश का दुर्भाग्य देखिये, देश कहीं से भी समृद्ध नहीं हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;ना लोगो के पास पहले जैसी धन-दौलत, संपत्ति हैं, ना लोगो की बोली-भाषा में वो मिठास रही हैं, नाही लोगो में आपसी प्रेम-प्यार, भाईचारा शेष रहा हैं। और तो और जिन अंग्रेजो से देश को मुक्त कराने के लिए देश के लाखो लोगो-स्वतन्त्रता सेनानियों-और हमारे पूर्वजो ने अपना रक्त बहाया, उन्ही अंग्रेजो की संस्कृति (पश्चिमी संस्कृति जैसे-पहनावा, अंग्रेजी भाषा) को आज हम आत्मसात कर रहे हैं, लिहाजा देश की संस्कृति भी अब वो नहीं रही।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;किसी समय मेहनती लोगो की कर्मभूमि मानी जाने वाली भारत भूमि अब आलसी लोगो की भूमि बनकर रह गयी हैं। आलस भरा-मेहनत से दूर हो गयी हैं हमारी ज़िन्दगी, आज सब कुछ बदल गया हैं। हमारे आज़ादी के दिवानो और नेताओं ने कम से कम ऐसे देश की कल्पना तो नहीं की होगी जहां गरीबी, भूखमरी, अकाल, रिश्वत-घूसखोरी, भरष्टाचार, चोरी चकारी, डकैती, ह्त्या, बलात्कार, लूटपाट, दंगे फसाद, आतंकवाद, नक्सलवाद, जातिवाद, धर्मवाद, अलगाववाद, आदि का बोलबाला हो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;अभी भी समय हैं संभल जाइए, कुछ कीजिये, देश की तस्वीर बदलने की कोशिश कीजिये। देर जरूर हो गयी हैं लेकिन इतनी भी नहीं कि कुछ किया ही ना जा सके। कुछ कीजिये, कुछ सार्थक कीजिये, कुछ भी कीजिये पर यूँ हाथ पर हाथ रखकर ना बैठिये। कुछ ऐसा कीजिये कि-"देश में खुशहाली, सुख-समृद्धि, आपसी प्रेम-प्यार, भाईचारा, और सोने की चिड़िया, आदि जैसा वातावरण पुन: तैयार हो जाए।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही हैं कि--"कब बनेगा पूरा देश महाराष्ट्र??"&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33ff33;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-8028335725448106777?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/8028335725448106777/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post_28.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/8028335725448106777'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/8028335725448106777'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post_28.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-2302243079456054813</id><published>2010-04-22T11:07:00.000+05:30</published><updated>2010-04-22T11:07:00.157+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#336666;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;strong&gt;खाप को मारो थाप।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;आये दिन खाप / जातीय पंचायतो के क्रूर और उलटे-सीधे फैसलों को सुन-सुन कर मेरे कान पक गए हैं। ऐसे नरक&lt;span style="font-size:+0;"&gt;गामी, &lt;/span&gt;आदिम जमाने के फैसले सिर्फ और सिर्फ खाप पंचायते ही करती हैं। कथित रूप से अपनी इज्ज़त, मान-सम्मान को बचाने के नाम पर किसी कि भी &lt;span style="font-size:+0;"&gt;कि &lt;/span&gt;जान लेने का हुक्म सुना देना, तो मानो इनके बाएं हाथ का खेल हो।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;हालांकि इसी मुद्दे को लेकर मैंने "ऑनर किलिंग" शीर्षक से एक लेख पहले (पिछले साल आठ &lt;span style="font-size:+0;"&gt;नवम्बर &lt;/span&gt;को) भी लिखा था। अब फिर मुझे खाप पंचायतो के लगातार आ रहे दुस्साहसी फैसलों से इसी मुद्दे पर पुन: लिखना पड़ रहा हैं। हाल ही &lt;span style="font-size:+0;"&gt;में &lt;/span&gt;हरियाणा की खाप (जातीय) पंचायतो के एक क्रूर &lt;span style="font-size:+0;"&gt;फैसले, &lt;/span&gt;जिसमे प्रेमी-प्रेमिका के एक ही जाति में होने के कारण उनकी ह्त्या कर डालने का फरमान सुना दिया गया था। अक्सर कथित रूप से अपनी इज्ज़त को बचाने या अपनी झूठी आन-बान-शान को बरकरार रखने के नाम पर ऐसे कलयुगी, अमानवीय, और अमानुषिक फैसले सुना दिए जाते हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;ये खाप / जातीय पंचायते मुख्यत: हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, और बिहार में कार्यरत हैं। ये बहुत ही दुःख कि बात हैं कि-"पंच-सरपंच को परमेश्वर का दर्ज़ा दिया जाता हैं, इन कथित पंच परमेश्वरो के फैसलों को सर-आँखों पर लिया जाता हैं। और जब यही पंच (परमेश्वर) ऐसे क्रूर फैसले लेते हैं तो दुःख होता हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;color:#666600;"&gt;*(मेरा मन खट्टा हो चुका हैं, इसलिए मैं आज इस बारे में ज्यादा विस्तार से नहीं लिख सकूंगा। मैं इसके लिए आप सभी ब्लॉग पाठको से माफ़ी चाहता हूँ। कृपया इसी ज्वलंत-मुद्दे से मिलते-जुलते एक और पोस्ट को पढने का कष्ट करे। आठ नवम्बर, 2009 को लिखे गए "ऑनर &lt;span style="font-size:+0;"&gt;किलिंग" &lt;/span&gt;नामक पोस्ट को अवश्य पढ़े।)*&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;br /&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;&lt;a href="mailto:CHANDERKSONI@YAHOO.COM"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-2302243079456054813?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/2302243079456054813/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post_22.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/2302243079456054813'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/2302243079456054813'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post_22.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-1313166656531233391</id><published>2010-04-16T09:44:00.005+05:30</published><updated>2010-04-16T09:44:00.900+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#330099;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;सुधरने का मौक़ा तो दीजिये।&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;जी हाँ, मैं यही कह रहा हूँ, जो आपने शीर्षक में पढ़ा हैं। अव्वल तो कोई सुधरना या अपनी गलती मानना ही नहीं चाहता, और ऊपर से हम आमतौर पर सुधरने का मौक़ा किसी को देते ही नहीं हैं। मेरी बात कडवी या चुभने वाली जरूर हैं, लेकिन हैं सौलह आने सच।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;पहली बात तो आज के ज़माने में, आज के घोर कल्युग में कोई सुधरना ही नहीं चाहता और भुला-भटका कोई सुधरना चाहे तो हम उसे सुधरने नहीं देते। उसको राह दिखाने या उसका हौसला बढाने की बजाय पुराना ही याद दिलाते रहते हैं। यह बहुत ही गलत प्रवृति हैं, जिससे हमें यथासंभव बचना चाहिए। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;उदाहरण के तौर पर--कोई चोरी-चकारी करने का आदी हो और वह सुधरना या बुरी आदत छोड़ना चाहे तो हम उसे एक मौक़ा देने की बजाय सुनाते रहते हैं। यह उदाहरण जो मैंने दिया हैं, कोई ख़ास या बड़ा उदाहरण नहीं हैं, लेकिन आम-सामान्य उदाहरण जरूर हैं, जिसकी तरफ शायद ही हमने ध्यान दिया हो।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;बहुत से मामलो में तो ऐसा लगता हैं मानो लोगो ने तो जैसे शपथ ही ले ली हो कि-"किसी को सुधरने ही ना देना हो या सुधार के सारे रास्ते बन्द कर देने हो।" ये बहुत बड़ा दुर्भाग्य हैं। मसलन, जैसे किसी को अंट-शंट, उलटी-सीधी गालियाँ बकने का शौक / आदत हो और वह स्वप्रेरणा या किसी की समझाइश पर बुरी आदत को त्यागना भी चाहे तो भी ना त्याग सके। वजह.....हम उसे ऐसा करने ही नहीं देंगे। जानबूझकर उसे गालियाँ सुनायेंगे, उसे उकसाने की हाड-तोड़ मेहनत करेंगे, उसे उसका अतीत याद दिलाएंगे, तब तक-जब तक वो वापस पुराने रास्ते (गालियाँ देने) को नहीं अपना लेता। और ऐसा करके हम मानो कोई एवरेस्ट की ऊँची चोटी को छू लेते हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;किसी को बार-बार सुनाना, किसी को बार-बार उसके बीते कल के बारे में बताना, या उसे ये कहना-"अब क्या हो गया तुझे??, पहले तो बहुत उछला करता था।", आदि-आदि बहुत ही निंदनीय हैं। उसे बार-बार हतोत्साहित करने का अर्थ हैं, उसके लिए सुधार का मार्ग अवरुद्ध करना। हमें उसका हौसला बढ़ाना चाहिए, उसको सुधरने के लिए प्रेरित करना चाहिए, उसे सुधरने के विभिन्न मार्ग-उपाय सुझाने चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;जबकि हम इसके ठीक उलट करते हैं, जिसके नतीजे भी उलट ही आते हैं। समाज में बढ़ते अपराधो के लिए हम खुद ही ज़िम्मेदार हैं, कोई दुर्लभ से दुर्लभतम मामलो में कोई व्यक्ति-गुनाहगार सुधरने के लिए भुला-भटका आ भी जाए तो हम ही उसके सुधार की राह में रोड़े अटकाने लगते हैं। याद रखिये, ये वक़्त बहुत ही नाज़ुक होता हैं। ऐसे वक़्त में कड़े संयम की आवश्यकता होती हैं। बैर-भाव, गलतियों-भूलो, को भुलाकर उसे माफ़ी ना सही, पर सुधरने का मौक़ा तो देना ही चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;ये हम सब की जिम्मेदारी हैं। ऐसा करके हम ना सिर्फ समाज से अपराधो को हटा पायेंगे, बल्कि भावी (भविष्य के) अपराधियों के लिए भी सुधार का मार्ग प्रशस्त कर सकेंगे। जब हम आज के-मौजूदा अपराधियों को सुधरने की राह दिखाएँगे, तो निश्चित रूप से हम भावी पीढ़ी के अपराधियों को भी अच्छे संस्कार दे सकेंगे। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;तो फिर आज से हम पुराना याद नहीं दिलाएंगे, राह दिखाएँगे, उत्साह बढ़ाएंगे, और सुधरने का एक मौक़ा तो अवश्य देंगे, ठीक हैं ना????&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#6600cc;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000066;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000066;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000066;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000066;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000066;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000066;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000066;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000066;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' 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rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-8107553283907325096</id><published>2010-04-10T11:00:00.000+05:30</published><updated>2010-04-10T11:00:01.241+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;span style="color:#666600;"&gt;सदैव सरकार ही निशाने पर क्यों???&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333300;"&gt;मुझे एक बात समझ में नहीं आती है कि-"हमेशा सरकार या सरकारी संस्थान ही निशाने पर क्यों रहते हैं??, प्राइवेट या निजी संस्थान/कम्पनियां निशाने पर क्यों नहीं होती हैं??" सरकार, सरकारी संस्थान, या सरकारी कम्पनियां अगर मामूली भूल भी करदे तो लोग उसे गालियाँ देने लगते हैं, लेकिन अगर किसी निजी कंपनी की बड़ी (सरकारी की तुलना में) भूल भी हो जाए तो लोग उसे बड़ी ही आसानी से नज़र-अंदाज़ कर जाते हैं। मानो, ये उसकी पहली गलती हो। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333300;"&gt;हम क्यों ऐसा करते हैं?? क्या मिल जाता हैं हमें ऐसा करके?? किसी भी क्षेत्र में, किसी भी मामले में हम निजी को पाक-साफ़ समझते हैं, लेकिन सरकारी को हम घटिया, गिरा हुआ, और बेकार समझते हैं। इस तरह बिना पूरी बात-मुद्दे को जाने किसी (सरकार-सरकारी) के बारे में पूर्वानुमान लगाना क्या उचित हैं?? मैं किसी भी सरकारी पद या नौकरी पर नहीं हूँ और नाही मैं निजी की तुलना में सरकारी को बढ़िया-उच्च स्तरीय मानता हूँ। में तो आम लोगो से इस तरह का भेदभाव समाप्त करने की अपील कर रहा हूँ। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333300;"&gt;मैं आपको कुछ उदाहरण देना चाहूँगा, जिससे ये साफ़ हो जाएगा कि-"निजी कम्पनियां दूध से धुली नहीं हैं, और कई मामलो में सरकारी से भी बदतर हैं।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333300;"&gt;&lt;span class=""&gt;1. पिछले साल मुझे दिल्ली से बैंगलौर सुबह की फ्लाईट से जाना था। आप मानेंगे नहीं उस दिन ना तो कोई तूफ़ान आया था, ना बरसात हुई थी, और नाही कुछ ऐसा हुआ था, जिसकी वजेह से फ्लाईट के लेट होने को जायज़ ठहराया जा सके। वो फ्लाईट जो सुबह नौ बजे की थी, उसकी उड़ान सुबह पौने बारह बजे हुई। इतना ही नहीं, चार दिन बाद मुझे वापस दिल्ली लौटना था। इस बार भी मैं दूसरी निजी (जाने वाली से अलग फ्लाईट) फ्लाईट में सवार था। मुझे रात साढ़े नौ बजे दिल्ली पहुँच जाना था, और मैं पहुंचा रात ग्यारह बजे। &lt;/span&gt;अब इसे आप क्या कहेंगे??? दोनों ही बार किसी भी अखबार या खबरिया चैनल में इन फ्लाइटो के लेट होने की सूचना नहीं थी। जबकि, सरकारी विमानन सेवा दस मिनट भी लेट हो जाए तो हल्ला मच जाता हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333300;"&gt;2. यही हाल, मोबाइलों का भी हैं। सरकारी मोबिलिटी सेवा प्रदाता के मोबाइल में बात बीच में कट जाए या फोन ना मिले तो लोग कोसने लगते हैं। जबकि, निजी मोबिलिटी सेवा प्रदाता के मोबाईल में ऐसा हो तो लोग नज़रंदाज़ कर देते हैं। निजी मोबिलिटी सेवा का नेटवर्क पुरे दिन ना आये तो मामूली आह से काम चल जाता हैं, लेकिन यही अगर सरकारी हो तो लोगो की तो जैसे मौत आ जाती हैं। जब सभी निजी कंपनियों की शुरूआती कॉल दर दो रूपए होती थी, तब इस सरकारी कंपनी की कॉल दर मात्र नब्बे पैसे होती थी। जब बाकी निजी कंपनी एक रुपया प्रति एसएमएस काटती थी, तब ये सरकारी मोबिलिटी कंपनी मात्र साठ पैसा ही काटती थी। बेशक आज सभी की एकसमान दर हो, लेकिन इस सरकारी कंपनी के योगदान को नहीं भुला जा सकता। इंटरनेट और लैंडलाइन फोन के मामले में तो इसका मुकाबला हैं ही नहीं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333300;"&gt;3. बैंको को भी क्यूँ भूल रहे हैं आप?? निजी बैंक जहां भारी जुर्माना-चार्ज लगाते हैं वही सरकारी बैंक नाममात्र जुर्माना-शुल्क लगाती हैं। आम आदमी या गरीब आदमी को रियायती दरो पर क़र्ज़ भी सरकारी बैंको से ही मिल सकता हैं नाकि निजी बैंको से। नियम व शर्तो के मकड़जाल में निजी बैंक ही ज्यादा उलझाते हैं। लोन (क़र्ज़) की मंजूरी कराने के लिए बैंको के अधिकारी-मैनेज़र को घूस खिलानी पड़ती हैं। निजी बैंको में सरकारी बैंको से ज्यादा पैसा ऐंठा जाता हैं। बेशक, निजी बैंको में ऐसा सरकारी बैंको की तुलना में कम होता हो, लेकिन होता जरूर हैं। और निजी बैंको में रिश्वत-घूस-पैसा भी ज्यादा लिया जाता हैं। निजी बैंक दूध से धुले नहीं हैं। इतना ही नहीं, देश के शीर्ष बैंक (रिज़र्व बैंक) के पास आम धारणा के विपरीत सरकारी बैंको की तुलना में निजी बैंको की ज्यादा शिकायते आती हैं। ज्यादातर ये शिकायते गलत-नाहक खर्च जोड़ना, बताये गए से ज्यादा ब्याज दर पर जुर्माना लगाना, क्रेडिट कार्ड की गलत एकाउंट स्टेटमेंट देना, आदि से सम्बंधित होती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333300;"&gt;4. अब आते हैं शिक्षा के मुद्दे पर। सुख-सुविधा और पढ़ाई-लिखाई के स्तर में निजी स्कूल-कॉलेज भले ही आगे हो, लेकिन उन निजी स्कूल-कॉलेजो पर नियंत्रण तो सरकार के अन्डर में ही हैं। दूसरी बात, निजी स्कूल-कॉलेज अनाप-शनाप पैसा (ड़ोनेशन की आड़ में) वसूलते हैं। सुख-सुविधा वे भले ही ज्यादा देते हो, लेकिन कम-से-कम सरकारी स्कूल-कॉलेजो की तरह लूटते तो नहीं। कभी युनिफोर्म के नाम पर, तो कभी मनमर्जी (जोकि जरुरी ना हो, पाठ्यकर्मो से अलग) की किताबो-पुस्तकों के नाम पर, कभी अन्य गतिविधियों (चित्रकला-खेलकूद, आदि) के नाम पर। आये दिन नन्हे-मुन्हे बच्चो के अभिभावकों की जेब काटते रहते हैं, और बेचारे माता-पिता अपनी संतानों के भविष्य संवारने की खातिर लुटते रहते हैं। सुख-सुविधा और पढ़ाई के स्तर में निजी स्कूल भले ही आगे हो, लेकिन सरकारी स्कूल-कॉलेजो का कोई मुकाबला नहीं हैं। अभी तक कोई ऐसा निष्कर्ष नहीं आया हैं जो सरकारी स्कूल-कॉलेज में पढ़े बच्चो को पिछड़ा या निम्न साबित कर सके। केंद्रीय विद्यालय, आईआईटी, आईआईएम, और आईआईएस का क्या कोई मुकाबला हैं??? शुरूआती (स्कूल-कॉलेज की) पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद हर छात्र सरकारी संस्थान में जाना चाहता हैं, क्योंकि निजी आगे की पढ़ाई के लिए कोई बेहतरीन (सरकारी से ज्यादा) संस्थान नहीं हैं। रही बात परीक्षा में नक़ल कराने या निकम्मे को भी पास करा देने की बात। तो में बता दूं कि-"पहली बात तो ऐसा होता नहीं, दूसरी बात हर जगह ऐसा नहीं होता, तीसरी बात अगर होता भी हैं, तो बहुत ही दुर्लभ मामलो में। और चौथी और महत्तवपूर्ण बात--सरकारी संस्थानों में नक़ल कराकर पास कराया जाता हैं तो निजी संस्थानों में गुपचुप पैसा लेकर नंबर बढाए जाते हैं। नक़ल कराने और नम्बर बढाने, दोनों ही मामलो में पैसा ऐंठा जाता हैं। बस फर्क ये हैं कि-निजी संस्थानों में पैसा ज्यादा बेदर्दी से मारा जाता हैं।" यानी गलत कार्यो में भी सरकारी ही "बेहतर यानी सस्ता" हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333300;"&gt;अपनी मानसिकता को बदलिए। सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेजो, संस्थानों, कंपनियों में फर्क ना कीजिये। सब को एक जैसा मत मानिए तो किसी एक (सरकारी या निजी) को सही या गलत भी ना मानिए। गलत कार्य-गलतियां-और भूले आपको दोनों की नज़र आनी चाहिए, नाकि किसी एक की। हम सबको एक पलड़े में  नहीं तौल सकते लेकिन पूर्वानुमान को तो दिमाग से निकाल ही सकते हैं। अब तो आप सबको मेरा ये लेख लिखने का मतलब-उद्देश्य तो समझ में आ ही गया होगा। उम्मीद हैं, आप मेरे द्वारा दिए गए उपरोक्त कुछ सच्चे-उदाहरणों को पढ़कर मेरी नसीहतो का पालन करेंगे।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333300;"&gt;&lt;strong&gt;नोट = गोपनीयता का सम्मान करते हुए सभी सरकारी-गैर सरकारी-निजी स्कूल-कॉलेजो, संगठनो, संस्थानों, और कंपनियों के नाम नहीं दिए गए हैं।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#333300;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#999900;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-8107553283907325096?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/8107553283907325096/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post_10.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/8107553283907325096'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/8107553283907325096'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post_10.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-4527690369374790657</id><published>2010-04-04T11:31:00.000+05:30</published><updated>2010-04-04T11:31:00.878+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#990000;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;कैसे मित्र हैं आपके????&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;मित्र यानी दोस्त, और दोस्त यानी आपके सुख-दुःख के साथी। ये एक सिंपल, सीधी-स्पष्ट व्याख्या हैं दोस्त की। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं, समाज के बिना मनुष्य का अस्तित्व ही नहीं हैं। अपने, और अपने परिवार &lt;span class=""&gt;के &lt;/span&gt;साथ-साथ मनुष्य को बाहरी लोगो की भी जरूरत होती हैं। यथा अड़ोसी-पडोसी, यार-दोस्त, सहपाठी-सहकर्मी, आदि। ये सब समाज का ही एक हिस्सा होते हैं और हम भी इसी समाज के एक अहम् हिस्सा हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;दोस्तों, अक्सर आपने किसी ना किसी &lt;span class=""&gt;को &lt;/span&gt;दोस्ती के ऊपर कहते-सुनते देखा होगा?? कुछ दोस्ती के पक्ष में होते हैं तो कुछ दोस्ती के नाम के ही विपक्ष में होते हैं। कोई दोस्तों से ज्यादा अपने दुश्मनों को ज्यादा सच्चा मानता हैं तो कोई दोस्तों को अपने सगे-सम्बन्धियों-परिजनों से भी ज्यादा अहमियत देता हैं। क्या आपने कभी सोचा हैं ऐसा क्यों होता हैं?? क्यों कभी-कभी हमें अपनों &lt;span class=""&gt;से &lt;/span&gt;भी ज्यादा सहारा दोस्तों से मिलता हैं?? क्यों अधिकाँश मामलो में हमें अपने करीबी (ऐसा हमें लगता हैं, पर होता नहीं) दोस्तों से ही धोखा-&lt;span class=""&gt;दगा &lt;/span&gt;मिलता हैं??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;इन उपरोक्त सभी सवालों के जवाब हमारे अन्दर या हमारे आस-पास ही हैं। सबसे पहले तो ये सोचिये कि-आपके यार-दोस्त कितने हैं???? बहुत से लोग कहेंगे-"है कोई बीस-पचास", तो कोई कहेगा-"सैंकड़ो दोस्त हैं मेरे", और तो और कुछ महाशयो का जवाब होगा-"गिने ही &lt;span class=""&gt;नहीं, &lt;/span&gt;हज़ारो दोस्त हैं मेरे, एक इशारे में दोस्तों की लाइन लगा दूं....." अरे-अरे रुकिए जनाब। ये आप किस गलतफ़हमी (खुशफ़हमी) में बैठे हैं आप??? दोबारा सोच लीजिये या अपने दोस्तों की लिस्ट पुन: जांच लीजिये।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;ज्यादातर लोगो की यही तो भूल होती हैं। इसी भूल के कारण लोगो को बार-बार, मौके-बेमौके धोखा खाना पड़ता हैं। बिना सोचे-विचारे, बिना आचार-व्यवहार, चरित्र, और इतिहास (यदि पता हो तो) देखे हम अगर किसी को हम अपना मित्र मानेंगे, तो जाहिर हैं हम जानबूझ कर ख़तरा मौल ले रहे हैं। दोस्ती करना बुरा नहीं हैं और नाही दोस्तों की अधिक संख्या होना बुरा हैं। बुरा हैं बुरे लोगो से दोस्ती करना, बुरे लोगो को अपना मानना, और बुरे लोगो को बिना सोचे-समझे अपनी संगत में शामिल करना।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;माना पहली नज़र में किसी के अच्छे-बुरे होने का पता नहीं चलता हैं और नाही किसी के चेहरे पर इस सम्न्बंध में कुछ लिखा होता हैं। लेकिन, ज्यादातर लोग जानबूझ कर अपने दोस्तों की बुराइयों को नज़रंदाज़ कर देते हैं, ये सोचकर कि-"अपना क्या ले रहा हैं??, या दोस्ती में सब चलता हैं, या फिर ये सोचकर ज्यादा हद पार करेगा तो समझा दूंगा,,,,,आदि-आदि।" बस, यही हम दोस्ती के मामले में मात खा जाते हैं। पहले हम कुछ करते नहीं और जब हम कुछ करना चाहते हैं तो कुछ कर नहीं पाते। अव्वल, तो हम ना चाहते हुए भी, जाने-अनजाने अपने दोस्तों के चंगुल में फँस ही जाते हैं और उनके हर गलत-सलत कार्यो में शामिल हो जाते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;महत्तव इस बात का नहीं हैं कि-"आपके कितने दोस्त हैं?? या आपके दोस्तों कि संख्या कितनी हैं??" बल्कि, महत्तव तो इस बात का हैं कि-"आपके दोस्त कैसे हैं??, आपके मित्रो की मानसिकता-सोच कैसी हैं??, आपके मित्रो में सतचरित्र हैं भी या नहीं??, आपके दोस्त आपके काम के हैं या नहीं??," आदि-आदि। पहली बात, आपके दोस्त आपको धोखा नहीं देते हैं बल्कि आप खुद ही उन्हें धोखा-दगा देने के लिए आमंत्रित करते हैं। आपको अपने दोस्त के बारे में नहीं पता, यहाँ तक तो सही हैं। लेकिन, पता चलने पर भी आप कुछ (उसे समझाना या सही रास्ता दिखाना, या उससे धीर-धीरे दूरियाँ बढ़ाना, आदि) नहीं करते, तो इसमें सारी गलती आपकी ही हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;दूसरी बात, दोस्त और जानकार होने में फर्क समझिये। आपके साथ पढने वाला या आपके दफ्तर में कार्य करने वाला या वाहन (टैक्सी, बस, या ट्रेन, हवाईजहाज, आदि) में सफ़र करने वाला आपका मित्र कैसे हो सकता हैं?? नहीं हो सकता ना। बस, यही मैं आपको कहना चाह रहा हूँ, प्रेम सबसे कीजिये, बातें सबसे कीजिये, हाय-हैलो, दुआ-सलाम सबसे कीजिये, लेकिन दोस्ती-यारी किसी-किसी से कीजिये। हर आते-जाते को, हर मिलने-जुलने-भिड़ने वाले को अपना दोस्त ना बनाइये। उसे जानिये-परखिये, और जब वो खरा उतरे तब कदम आगे बढ़ाइए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;लोग दोस्ती में एक बार धोखा खा लेंगे, दो बार धोखा खा लेंगे, बार-बार धोखा खा लेंगे, लेकिन धीरे-धीरे उनका दोस्त और दोस्ती पर से विश्वास उठने लगेगा। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं और समाज के लोगो के साथ मेलजोल बढ़ाना अत्यंत आवश्यक भी हैं। लेकिन, संभल कर-सावधानी के साथ। दोस्तों की संख्या पर नहीं उनके गुणों पर ध्यान देना जरुरी हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;&lt;strong&gt;सबसे बड़ी बात = अगर आपके सौ दोस्त हैं, तो उनमे से सिर्फ दस-पंद्रह दोस्त ही सुख-दुःख, मुसीबत में काम आयेंगे। और उन दस-पंद्रह में से दस वो होंगे जो कभी-भी भाग सकते हैं। अगर यकीन ना हो तो जब मर्जी आजमा कर देख लीजिएगा। मैं तो बहुत बार आजमा चुका हूँ। बारम्बार धोखा खाने और दिल तोड़ने से अच्छा हैं एक बार आजमा लिया जाए। ये दुःख की बात हैं कि-"ज्यादातर यार-दोस्त खाने-पीने और पैसे के पीछे होते हैं। जो अपने दोस्तों को खिलाएगा-पिलाएगा या पैसा उडाएगा, लोग उसी से यारी बढ़ाना चाहते हैं। आप भी इस बात की सच्चाई को समझने का प्रयास करे, इसी में आपकी भलाई हैं।" ज़रा अपने आसपास निगाह दौड़ाइए, दोस्तों के खाने-पीने, और पैसा उड़ाने वाले व्यक्ति के दोस्तों की सूची आम लोगो के दोस्तों से कहीं ज्यादा होती हैं। कही आपके साथ भी ऐसा-कुछ तो नहीं???"&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;&lt;strong&gt;मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि-"दोस्तों के अलावा सबसे (जानकार, सहपाठी, या सहकर्मी) से तोड़ ली जाए। सबसे बनाकर रखिये, ना जाने कब उनसे अपना काम-मतलब साधना पड़ जाए। तब वे ये तो नहीं कह सकते कि-"तू अब क्यों आया हैं, तब तो तू मुझसे दोस्ती ही नहीं करना चाहता था।"&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;&lt;strong&gt;.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc9933;"&gt;&lt;strong&gt;मैं आपको मतलबी होने को नहीं कह रहा हूँ, मैं तो सिर्फ ये कहना चाहता हूँ कि-"दोस्त सीमित और भरोसेमंद-चरित्रवान रखिये, जो वक़्त-बेवक्त हाज़िर हो, बाकियों के साथ ज्यादा नहीं तो थोड़ी-बहुत तो राम-रामी रखी ही जा सकती हैं। या इसमें भी कोई हर्ज़ हैं......??????"&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#ffff33;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#993399;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-4527690369374790657?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/4527690369374790657/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/4527690369374790657'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/4527690369374790657'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/04/blog-post.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-5142561084706085028</id><published>2010-03-29T11:58:00.005+05:30</published><updated>2010-03-29T11:58:00.181+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#33cc00;"&gt;ऐसा तो सिर्फ भारत में ही संभव हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;हाल ही में विभिन्न समाचार चैनलों और समाचार पत्रों में एक खबर को पढ़ कर बड़ी हैरानी हुई। दरअसल वो खबर ही ऐसी थी, आप भी जानेंगे तो हैरान रह जायेंगे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;और वो खबर यह थी कि-"केंद्र सरकार जल्द ही एक ऐसा क़ानून लाने जा रही हैं, जिसमे तेल, गैस की पाईपलाइन या वाहन को आग लगाने वाले या नुक्सान पहुंचाने वाले को उम्रकैद की सज़ा होगी। और तो और अपराधी को अपनी बेगुनाही को साबित भी स्वयं ही करना पडेगा।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;क़ानून बहुत ही अच्छा और स्वागत-योग्य हैं। निश्चित रूप से उन लोगो को सबक सिखाने वाला और हतोत्साहित करने वाला हैं, जो अपनी मांगो को पूरी करवाने के लिए तेल, गैस, आदि के वाहनों-पाईपलाइनो को आग लगाते-नुक्सान पहुंचाते रहते हैं। देश की संपत्ति हैं तेल-गैस। आम जनता और देश के विकास का एक मजबूत-सशक्त आधार हैं ये। लेकिन, मेरी चिंता तो इस बात को लेकर हैं कि-"देश के बाकी कानूनों जैसा ह्श्न ना हो इस क़ानून का, कही ये क़ानून भी देश के अन्य कानूनों की तरह कागजी ही ना रह जाए।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;वैसे देश के अन्य कानूनों का प्रभावी उपयोग, प्रभावी पालना होनी ज्यादा जरूरी हैं। ये क़ानून अच्छा जरूर हैं, लेकिन इस क़ानून से आम जनता को कोई विशेष लाभ नहीं होने वाला। माना कि-"ये क़ानून देश की अर्थव्यवस्था को नुक्सान होने से कुछ हद तक रोकेगा।" लेकिन, क्या गारंटी हैं कि-"इस क़ानून का हाल बाकी कानूनों जैसा नहीं होगा??" लेकिन ज़रा सोचिये-"तेल-गैस के टैंकरों-वाहनों, और पाइपलाइनों को आगजनी या नुक्सान पहुंचाने की कितनी कोशिशे होती हैं??, कितना तेल या गैस बेकार/नष्ट होता हैं इन मामलो में??" जाहिर हैं बहुत कम, ना के बराबर, नगण्य।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;तो फिर क्या जरूरत हैं नए क़ानून लाने की??, वो भी ऐसे मुद्दे को लेकर, जिसका आम जनता से कोई सरोकार ही नहीं हैं??, क्यों ला रहे हैं ये क़ानून??, क्या सिर्फ वह-वाही लूटने के लिए??, या फिर जनता का ध्यान कही और करने के लिए??, किसलिए लायेंगे आप ये क़ानून??, किसका भला हैं, इस क़ानून में??, बताइये, जनता आपसे कुछ पूछ रही हैं, जवाब दीजिये......। अरे आप क्या जवाब देंगे??, आपके पास तो जवाब हैं ही नहीं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;अगर तेल-गैस की इतनी ही चिंता हैं तो जनता तक तेल-गैस पहुंचाइये।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;जितना तेल-गैस उपलभध हैं या उत्पादित हो रहा हैं, उसे जनता को मुहैया कराइए।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;ब्लैक मार्केटिंग, काला बाजारी को रोकिये।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;महंगा-सस्ता के बारे में मैं कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन आप जो भी भाव-दाम लगाइए, लेकिन उसे आम जन को तो दीजिये।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;तेल-गैस की किल्लत-कमी को दूर कीजिये।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;करने को तो बहुत कुछ हैं, अगर आपकी मंशा, इच्छाशक्ति हो तो।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;ये तो बात थी तेल-गैस की, अब बात करते हैं अन्य कानूनों की। चोरी-डैकैती को रोकिये, हत्याओं-बलात्कारो को रोकिये, लूटपाट-दंगो को रोकिये, दहेज़ हत्याओं-बाल विवाहों को रोकिये, अपहरणों-फिरौतियों को रोकिये, आदि-आदि। और इन सभी के लिए क़ानून भी बने हुए हैं, वे क़ानून सख्त हैं या नहीं?? मुद्दा ये नहीं हैं, मुद्दा हैं कानूनों की प्रभावी पालना, जोकि हो नही रही हैं। ये क़ानून सीधे-सीधे आम जन से जुड़े हुए हैं, इन कानूनों में आम जनता के हित जुड़े हुए हैं। नाकि उस क़ानून में, जिसको आप जल्द ही लागू करने की मंशा लिए हैं। ये क़ानून जरूरी जरूर हैं, लेकिन इससे भी जरुरी हैं मौजूदा अन्य कानूनों की पालना।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;वैसा ऐसा सिर्फ और सिर्फ भारत में ही संभव हैं, जहां सरकार क़ानून बनाना ही जानती हैं, पालना करना नहीं। और तो और सरकार को जब क़ानून बनाने के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं मिला, तो ऐसे मुद्दे पर क़ानून बनाने में व्यस्त हो गई हैं, जिसका आम आदमी से कोई सरोकार ही नहीं हैं। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#006600;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-5142561084706085028?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/5142561084706085028/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/03/blog-post_595.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/5142561084706085028'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/5142561084706085028'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/03/blog-post_595.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-3220063014022938639</id><published>2010-03-23T10:17:00.001+05:30</published><updated>2010-03-23T10:17:00.566+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#339999;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;इस फिल्म का विरोध क्यों नहीं????&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;मैं हालिया रिलीज एक हिन्दी फिल्म "अतिथि......तुम कब जाओगे??" के सम्बन्ध में ही बात कर रहा हूँ। और मेरा उपरोक्त (शीर्षक) सवाल इसी फिल्म के लिए ही हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;जी हाँ, मेरा कई सवालो में से कई सवाल यही हैं कि-&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;इस फिल्म का विरोध क्यों नहीं हो रहा हैं??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;आम तौर पर हर मुद्दे, छोटी सी बात पर हल्ला मचाने वाले इस बार चुप क्यों हैं???&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;अपने आप को भारतीय संस्कृति के पहरेदार बताने वाले क्या कहीं खो (गुम) गए हैं???&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा हैं, कब होगा इस फिल्म (अतिथि......तुम कब जाओगे??) का विरोध?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;हर वक़्त विरोध&lt;span class=""&gt;-प्रदर्शन करने, हल्ला मचाने, हँगामा पैदा करने की मौके की ताक में रहने वाले इस कदर शांत-चुप्पी क्यों साधे हुए हैं??&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;क्या इसके पीछे तूफ़ान से पहले की शान्ति मौजूद हैं??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;इन लोगो ने क्यों नहीं किया इस फिल्म का विरोध??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;आदि-आदि कई सवालों के जवाब मुझे नहीं मिल रहे हैं। अगर आपके पास मेरे सवालों के जवाब हो तो कृपया जरूर दीजिएगा।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;सरेआम भारतीय संस्कृति की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सरेआम, खुल्लम खुल्ला "अतिथि देवो भव:" की सनातन परम्परा का मखौल उड़ाया जा रहा हैं। लेकिन, दुर्भाग्य देखिये भारत की परम्परा-संस्कृति के ठेकेदार-पहरेदार मौन धारण किये हुए हैं। जहां उन्हें विरोध करना चाहिए, वहाँ तो सपने में भी विरोध नहीं करेंगे। और जहां विरोध नहीं होना चाहिए वहाँ सारी सीमाएं-हदें पार कर देंगे। ऐसा तो इनका चरित्र हैं। सारे देश को इन लोगो के चरित्र, इन लोगो की मानसिकता का एहसास होने लगा हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;कहाँ गए भारत की सनातन संस्कृति की दुहाई देने वाले???, कहाँ हैं वे लोग, जो कथित रूप से खुद को रक्षक-पहरेदार, कहते हैं??? अब क्यों सामने नहीं आ रहे???, अपना-सा मुहं लेकर कहाँ छुप गए हैं कायर???&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;"अतिथि देवो भव:" की समृद्ध परम्परा-संस्कृति वाले देश में अतिथि के जाने का इंतज़ार करना कितना दुर्भाग्य भरा हैं, इसका शायद इन्हें इल्म (अंदाजा) भी नहीं हैं। खुद भूखे रहकर भी अतिथि-मेहमान को भरपेट भोजन परोसना हमारी संस्कृति हैं, हमारी पहचान हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि-"इस फिल्म में कोई हिन्दू विरोधी टिप्पणी नहीं हैं, इसलिए उन्होंने विरोध ना किया हो??" या फिर कही यह कारण तो नहीं कि-"इस फिल्म में कोई मुस्लिम कलाकार या अभिनेता-अभिनेत्री नहीं हैं, इसलिए उन्होंने विरोध-प्रदर्शन ना किया हो??" आदि।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;फिल्म का विरोध ना करने का चाहे जो भी कारण हो, इनका असली रूप-चेहरा, असली नीतियाँ, कार्य-शैली जनता के सामने आ गया हैं। आमजन का विश्वास अब इन लोगो-इन संगठनो के ऊपर से उठ गया हैं। इनकी पोल खुल गयी हैं, आम जनता की नज़रो से गिर गए हैं ये सब लोग और ये सब संगठन। अरे भाई लोगो, फिल्म का विरोध चाहे ना करो पर शीर्षक का विरोध तो कीजिये। फिल्म तो मैंने भी नहीं देखी हैं, लेकिन शीर्षक (फिल्म का नाम) तो मुझे आपत्तिजनक लगा हैं। आपने बेकार-बेमतलब "बिल्लू" (असली नाम "बिल्लू बार्बर" शाहरुख खान अभिनीत) का विरोध किया था, लेकिन अब सार्थक रूप से, जरूरत समझते हुये फिल्म का ना सही, पर फिल्म के नाम (शीर्षक) का तो विरोध कीजिये।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#993399;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#3333ff;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#3333ff;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#3333ff;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#3333ff;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#3333ff;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#3333ff;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#3333ff;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#3333ff;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-3220063014022938639?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/3220063014022938639/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/03/blog-post_23.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/3220063014022938639'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/3220063014022938639'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/03/blog-post_23.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-4404640040283733251</id><published>2010-03-17T10:56:00.002+05:30</published><updated>2010-03-17T10:56:00.161+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;नारियों का अभद्र और नकारात्मक चित्रण क्यों????&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666600;"&gt;आज हर जगह नारी-सशक्तिकर्ण की बातें हो रही हैं। देश के &lt;span class=""&gt;सबसे &lt;/span&gt;बडे और पुराने राजनितिक दल की अध्यक्षा महिला हैं, देश की राष्ट्रपति महिला हैं, राजस्थान-हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों की राज्यपाल महिला &lt;span class=""&gt;हैं, &lt;/span&gt;लोक सभा की सभापति भी महिला ही हैं। जहां भी नज़र डालो महिला सशक्तिकर्ण की बाते कही जा रही हैं। मोबाइल-दूरसंचार कम्पनियां महिलाओं के लिए अलग से स्पेशल प्लान्स ला रही हैं, बीमा कंपनिया ख़ास तौर पर महिलायों के लिए ही स्वास्थ्य-जीवन बीमा योजनाये ला रही हैं। सरकारों की तरफ से लड़कियों की पढ़ाई मुफ्त की जा रही हैं-उन्हें स्कूल आनेजाने के लिए फ्री साइकल दी जा रही हैं, यानी जहां कही भी नज़र दौडाओ महिला-नारी सशक्तिकर्ण की भावना ही नज़र आ रही हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666600;"&gt;नौकरियों में भी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही हैं, इनकम टैक्स में भी महिलाओं को ज्यादा बचत करने की सहुलियतों के साथ-साथ टैक्स में भी छूट प्रदान की जा रही हैं। और तो और हाल ही में सभी स्थानीय-क्षेत्रीय चुनावों में महिलाओं का आरक्षण पुरुषो के बराबर यानि 50 प्रतिशत कर दिया गया &lt;span class=""&gt;हैं, &lt;/span&gt;अब सभी स्थानीय निकायों (पंच-सरपंच-&lt;span class=""&gt;डायरेक्टर, &lt;/span&gt;जिला प्रमुख, पार्षद, और नगर पालिकाओं-परिषदों-और &lt;span class=""&gt;निगमों)&lt;/span&gt; में आधी सत्ता-भागीदारी महिलाओं के हाथ में ही होगी। बहुत सी जगहों पर तो विकास &lt;span class=""&gt;कार्यो &lt;/span&gt;का, जनहित के कार्यो &lt;span class=""&gt;का, &lt;/span&gt;और सारे इलाके का सारा दारोमदार इन्ही के सर होगा। महिलाओं से जुडे अपराधो (छेड़छाड़, बलात्कार, यौन शोषण, दहेज़ ह्त्या, आदि) पर क़ानून भी पहले के मुकाबले काफी सख्त किये जा रहे हैं, वो भी गैर-जमानती। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666600;"&gt;प्रिय पाठको, महिलायों-नारियों के लिए बहुत कुछ किया जा रहा हैं, बहुत कुछ किये जाने की योजनाये बनाई जा रही हैं। हर तरफ-हर जगह महिला सशक्तिकर्ण &lt;span class=""&gt;की &lt;/span&gt;बयार बह रही हैं। लेकिन, मुझे एक बात बहुत कचोटती हैं, मुझे समझ में नहीं आता हैं कि-"नाटको में, टेलीविजन धारावाहिकों में, फिल्मो में, नारी का किरदार कठोर, पत्थर-दिल, क्रूर, और नकारात्मक क्यों दिखाया जाता हैं???" यह कैसा नारी सशक्तिकर्ण हैं?, एक तरफ हम नारी के पक्ष की, हक़ की बातें करते हैं और दूसरी तरफ हमही उन्हें नाटको-धारावाहिकों में नकारात्मक रूप से प्रस्तुत करते हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666600;"&gt;क्या इससे नारी सशक्तिकर्ण हो सकता हैं?????, क्या इससे नारियों को वो मान-सम्मान, बराबरी का हक़, जिसकी वो वाकई हकदार हैं, मिल सकता हैं???, एक तरफ हम नारियों के पिछडेपन-दुर्दशा के लिए परोक्ष रूप से पुरुषो को ज़िम्मेदार ठहराते हैं और दूसरी तरफ हम नारियों को ही अभद्रता और नकारात्मकता की साक्षात मूर्ति बताने में लगे हुए हैं। पहले बचपन में (सात-आठ साल पहले) परिवार वालो के साथ, टाइमपास के लिए, काफी धारावाहिक-नाटक देखा करता था। लेकिन अब मैं हालांकि नाटक-धारावाहिक कम ही देखता हूँ, लेकिन यदा-कदा इन सिरियलो पर नज़र ड़ाल ही लेता हूँ। मैं इक्का-दुक्का नाटक (शिक्षाप्रद व मनोरंजक) ही देखता हूँ, लेकिन मेरे नाटको के शुरू होने से पहले पांच-सात मिनट पहले का नाटक देखना पड़ ही जाता हैं। उन नाटको में नारी का जो रूप दिखाया जाता हैं, उसे देखकर मेरा मन खराब हो जाता हैं। नारियों का-महिलायों का ऐसा चरित्रहीन और घटिया प्रदर्शन किया जाता हैं कि-"मुझे नारी सशक्तिकर्ण की तमाम बातें ढकोसला-बकवास लगने लगती हैं।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666600;"&gt;मैं आपको कुछ नकारात्मक भावों वाली कुछ महिला अदाकाराओं-कलाकारों की याद दिलाना चाहूँगा। मंदिरा (क्यूंकि सास भी कभी बहु थी.....स्टार प्लस), पल्लवी (कहानी घर-घर की.....स्टार प्लस), कोमोलिका (कसौटी ज़िन्दगी की.....स्टार प्लस), अम्माजी और मृणालिनी (छोटी बहु.....जी टीवी), और अम्माजी (ना आना इस देश लाडो.....कलर्स), आदि-आदि। यह तो उदाहरण-मात्र हैं। फेहरिस्ट तो काफी लम्बी-चौड़ी हैं। उपरोक्त उदाहरणों की महिला खलनायिकाओं को अगर आप देख लेंगे तो दांतों तले ऊंगली दबा लेंगे। कई नाटको में तो पुरुष-मर्द किरदारों से कही ज्यादा खतरनाक-शातिर-और चालबाज़ यह महिला खलनायिकाएं होती हैं। एक-दुसरे की बातें इधर-उधर करना, कमरे के अन्दर बिना दरवाजा खटखटाए घुस जाना, एकदुसरे को नुक्सान पहुंचाने की जी जान से कोशिश करना, पकडे जाने या चाल विफल होने पर घडियाली आंसू बहाना, आदि इनकी खासियत हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666600;"&gt;टेलीविजन धारावाहिकों के बाद नंबर आता हैं फिल्मो का। मैंने हालांकि एक भी ऐसी फिल्में नहीं देखी हैं, लेकिन टीवी पर आने वाले प्रोमो, और विज्ञापन कहानी कह जाते हैं। ऊपर से, अखबारों-पत्रिकाओं में छपने वाली फोटोएं तस्वीर साफ़ कर देती हैं। अव्वल तो, जानबूझकर प्रेस-मीडिया को बुला कर बेबाक-बोल्ड टिप्पणी की जाती हैं, ताकि मेरे और आप जैसो को (जो ऐसी बकवास-अश्लील फिल्में नहीं देखते हैं) खबर दिखाकर फिल्म के प्रति उत्सुकता जगाने का प्रयास करते हैं। मल्लिका शेहरावत, राखी सावंत, सेलिना जेटली, तनुश्री दत्ता, &lt;span class=""&gt;कंगना राणावत, बिपाशा बसु, और करीना कपूर, आदि&lt;/span&gt; कई इस कतार में हैं। चाहे वे पैसा कमाने के लिए ऐसी फिल्में-एल्बम करते हो, या चाहे वे ऐसे हकीकत में ना हो, लेकिन उन्हें भूलना नहीं चाहिए कि-"आम दर्शक उनकी नक़ल करता हैं, आप असल में ऐसे हैं या नहीं इसकी समझ आमतौर पर दर्शको में नहीं होती हैं, और सबसे बड़ी बात एक नारी होने के नाते आपको अन्य नारियों की इज्ज़त का ख्याल भी रखना चाहिए। भडकीले-अश्लील कपडे पहन कर आप क्या सन्देश देना चाहती हैं??? कपडे चाहे जैसे भी पहनिए लेकिन मकसद-भावना शुद्ध होनी चाहिए। बहुत सी फिल्में ऐसी हैं, जिनमें &lt;span class=""&gt;हीरोइनो (जैसे कि-मंदाकिनी, डिम्पल कपाडिया, करिश्मा कपूर, माधुरी दीक्षित, नूतन, सायरा बानो, नर्गिस, हेमा मालिनी, रेखा, और हेलेन, आदि)&lt;/span&gt; ने काफी कम कपडे पहने थे, फिर भी अश्लील &lt;span class=""&gt;नहीं लगी, इसका कोई तो कारण होगा??" &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666600;"&gt;&lt;span class=""&gt;ये सारी&lt;/span&gt; क़वायदें तभी सफल होगी, नारी-सशक्तिकर्ण के तमान प्रयास तभी सफल होंगे जब टेलीविजन के नाटको, धारावाहिकों, और फिल्मो में नारियों का अभद्र और नकारात्मक चित्रण को रोका जाएगा। इसके लिए अकेले सरकार के करने से कुछ नहीं होगा, आम जनता और कलाकारों-अभिनेत्रियों के करने से ही कुछ हो सकता हैं। नाटक-धारावाहिक-और फिल्में ऐसी होनी चाहिए जो समाज को चरित्रवान बनाने की शिक्षा दे, जो समाज को महिलायों की योग्यता-उपयोगिता-और समानता का सन्देश दे। जिनको देख कर समाज को अच्छा सन्देश मिले। नैतिक-अनैतिक, गलत-सही, और चरित्रहीन और चरित्रवान के बीच का फर्क बताये। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#666600;"&gt;सबसे बड़ी बात, आम लोगो और अभिनेत्रियों-कलाकारों से पहले सरकार को पहल करते हुए सख्त से सख्त कदम उठाने चाहिए। सरकार को इन दो बातों का विशेष ध्यान-ख्याल रखना होगा कि-"पहला, अश्लीलता का पैमाना कपड़ो की मात्रा से नहीं बल्कि भावों-मकसद से नापना होगा, दूसरा, क़ानून इतना सख्त भी ना हो कि पुरुष-वर्ग जी ही ना सके और इतना ढीला भी ना हो कि अपराधी के बचने की गुंजाइश बचे।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;धन्यवाद।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15, &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-4404640040283733251?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/4404640040283733251/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/03/blog-post.html#comment-form' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/4404640040283733251'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/4404640040283733251'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-8252379046862562378</id><published>2010-03-11T10:03:00.000+05:30</published><updated>2010-03-11T10:03:00.277+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#336666;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;भावनाओं की अभिव्यक्ति बेहद जरूरी। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#6666cc;"&gt;भावनाओं की अभिव्यक्ति बेहद जरूरी हैं। हम में से ज्यादातर लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की बजाय दबाना शायद ज्यादा उचित समझते हैं। हम रोजाना &lt;span class=""&gt;जितने &lt;/span&gt;भी समस्याओं से दो-चार होते हैं, हमें जितनी भी परेशानियां उठानी पड़ती हैं, हमें जितने भी दुःख-तनाव झेलने पड़ते हैं, उन सबके मूल में भावनाओं को दबाना या व्यक्त ना करना ही हैं। हमने तो मानो अपनी भावनाओं को व्यक्त ना करने की मानो कसम ही खा ली हो। मन में क्या आ रहा हैं?, दिमाग में क्या उलझन चल रही हैं?, दिल में क्या बात हैं??, आदि कई बातों-भावनाओ को हम उभारने की बजाय दबाना ज्यादा मुफीद समझते हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#6666cc;"&gt;चाहे कितना भी नुक्सान क्यों ना हो जाए?, चाहे कितना भी उलटफेर क्यों ना हो &lt;span class=""&gt;जाए?&lt;/span&gt;, हम भावनाओं को दबा देंगे, लेकिन व्यक्त नहीं करेंगे???, पता नहीं ऐसी कौनसी वजह, कौनसी मजबूरी हैं जो हम ऐसा करते हैं??, वो भी एक या दो बार नहीं बल्कि लगभग हर बार। अपने भावों को दबाना, अपनी भावनाओं को दबाना, अपना ही नुक्सान करता हैं, दुसरे का कुछ नहीं बिगड़ता, वो बेचारा तो आपके अन्दर भी नहीं झाँक सकता। जो आपकी भावनाओं को समझ सके, आपके विचारों को जान सके, जो आपके दिलोदिमाग में चल रही बातों-सवालों, उलझनों को भी देख सके। &lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#6666cc;"&gt;कुछ उदाहरण मैं यहाँ देना चाहूँगा, ताकि आपको पता चल सके कि-"भावनाओ की अभिव्यक्ति कितनी जरूरी हैं??" =&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#6666cc;"&gt;1. दो दोस्त थे, एकदम पक्के दोस्त। दोनों बचपन से ही साथ-साथ पढ़ते थे, स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने आपस में सलाह करके एक ही कॉलेज में पढ़ाई की। बाद में एक दोस्त को सट्टे-जुए की बुरी लत लग गयी। वो दुसरे दोस्त को भी सट्टे के अड्डे पर ले जाता था, लेकिन दुसरे दोस्त ने हमेशा उसे मना किया। लेकिन उसे ऐसी लत लग चुकी थी, उसको सिवा सट्टे-जुए के कुछ ना दिखता था। एक बार पुलिस ने वहाँ छापा मारा और उसे उसके साथियों सहित गिरफ्तार कर लिया। जमानत पर छूटने के बाद, उसने पहला काम यही किया कि-"अपने उस दोस्त को गद्दार करार देते हुए उसको थप्पड़ दे मारा और बचपन की भाई जैसी दोस्ती तोड़ दी।" यहाँ उस दोस्त की गलती यह थी कि-"उसने अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं किया यानी कोई अफ़सोस जाहिर नहीं किया। बस, थप्पड़ को याद रखने की बात कहकर चला गया।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#6666cc;"&gt;2. एक पति-पत्नी थे। दोनों में शादी के कुछ साल खूब प्रेम रहा, लेकिन बाद में हालात बदलने शुरू हो गए। दरअसल, पति को तगड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन वह यह बात घर पर &lt;span class=""&gt;शो/&lt;/span&gt;प्रकट नहीं होने दे रहा था। उसकी पत्नी जब प्यार-रोमांस के मूड में होती, तो वह गुस्सा हो बैठता। और जब उसका मूड प्यार का होता तो उसकी पत्नी अपनी व्यस्तता जाहिर कर देती। यानी दोनों ही अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पा रहे थे। धीरे-धीरे नौबत तलाक तक आ पहुंची। यह तो भला हो मैरिज कोंउन्सलर का, जो उन्होंने दोनों को साथ बिठाकर सारी &lt;span class=""&gt;बातें &lt;/span&gt;साफ़ की, तब कही जाकर उन दोनों के बीच पैदा हुई ग़लतफ़हमियाँ दूर हुई। और दोनों तलाक जैसी विभीषिका से बच सके। यहाँ गलती दोनों की थी, दोनों ही असली बात-अपनी परेशानियों को व्यक्त नहीं करते थे। दोनों में दुराव-छिपाव था, दोनों अगर चाहते तो खुलकर बातचीत करके मसला सुलझा सकते थे। पर दुर्भाग्य से ऐसा हुआ &lt;span class=""&gt;नहीं। &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#6666cc;"&gt;3. इसी तरह के एक मामले में एक पति को पत्नी के चरित्र पर शक था। उसने कई बार पूछा, पर उसकी पत्नी मज़ाक में टाल जाती। ऐसे ही एक बार पति को गुस्सा आ गया और उसने थप्पड़ दे मारा। तब उसकी पत्नी बोली-"मेरा कोई ऐसा चक्कर नहीं था, तभी तो मैं इसे आपका मज़ाक समझती थी।" तब कही जाकर, थोड़ी बहुत बहस के बाद, मामला शांत हुआ। यहाँ पति ने अपनी नाराजगी-गुस्से को स्पष्ट प्रकट ना करते हुए पत्नी से गंभीर होकर नहीं पूछा, वही पत्नी ने मामले को मज़ाक में लेते हुए, इसका सीरियसली (गंभीरता से) जवाब देना उचित नहीं समझा, जबकि एक औरत के लिए यह सवाल सबसे दुश्वार सवाल होता हैं। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#6666cc;"&gt;उपरोक्त दोनों मामले, कोई ख़ास मामले नहीं हैं। यह तो बिलकुल ही मामूली-आम मामले हैं, जिनका सामना शायद आपने या आपके किसी जान-पहचान वाले ने अवश्य किया होगा। इन मामलो में कुछ विशेष नहीं करना होता हैं, बस अपनी भावनाओं को समय-समय पर व्यक्त करते रहना चाहिए। भावनाएं नहीं दबेगी, तो सारी बातें-कहानियां साफ़ रहेगी। दुराव-छिपाव होने की शुरुआत भावनाओं को दबाने से ही होती हैं। कोई भी बात अपने अन्दर दबा कर नहीं रखनी चाहिए, वरना एक ना एक दिन मामला बिगड़ता हैं और भावनाएं ज्वालामुखी के लावे की तरह फट कर बाहर आती हैं। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#6666cc;"&gt;क्यों दबाते हैं अपनी भावनाओं को??, क्यों हम अपनी बात को कहकर अपने दिलोदिमाग को हल्का नहीं करते??, क्यों हम अन्दर ही अन्दर घुटते रहते &lt;span class=""&gt;हैं??, &lt;/span&gt;कितने ही डाक्टर-वैज्ञानिक कहते &lt;span class=""&gt;हैं &lt;/span&gt;कि-"दिल में कुछ दबाकर रखना, दिमाग में कोई ना कोई उलझन-परेशानी का लगातार चलते रहना, या अपने दिल &lt;span class=""&gt;की &lt;/span&gt;बात कहकर मन हल्का ना &lt;span class=""&gt;करना,&lt;/span&gt; कई बीमारियों की जड़ हैं। शुगर,&lt;span class=""&gt; ब्लड&lt;/span&gt;प्रै&lt;span class=""&gt;सर,&lt;/span&gt; दिल और दिमाग की कई बीमारियों को खुला न्यौता देता हैं तनाव और भावनाओं को दबाना।" फिर भी ना जाने हम क्यों भावनाओं को व्यक्त करने में कंजूसी करते है?? भावनाओं को खुलकर, निर्भीक होकर व्यक्त करना चाहिए। हाँ, कुछेक मामलो में (मजबूर होना, &lt;span class=""&gt;किसी &lt;/span&gt;के सम्मान की रक्षा के लिए, आदि कारणों &lt;span class=""&gt;से)&lt;/span&gt; भावनाओं को दबाना उचित, माना जा सकता हैं। लेकिन जहां नुक्सान होता हो, जहां परिवार में कलह/बिखराव पैदा होता हो, या कही ग़लतफहमी पैदा होती हो, तो भावनाओ को छिपाना कहाँ की समझदारी हैं?? &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span style="color:#6666cc;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;FROM =&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;00-91-9414380969&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#663366;"&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-8252379046862562378?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/8252379046862562378/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/03/blog-post_11.html#comment-form' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/8252379046862562378'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/8252379046862562378'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/03/blog-post_11.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-649083613418863579</id><published>2010-03-05T11:19:00.003+05:30</published><updated>2010-03-06T00:31:46.695+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;&lt;span style="font-size:180%;"&gt;भगदड़ कब तक??????&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;हालांकि आज मेरे पास ब्लॉग लिखने का वक़्त नहीं था और नाही मैं आज ब्लॉग पोस्ट करने की सोच कर बैठा था। लेकिन वाकया ही ऐसा घटित हो गया की मुझे आज आपात-स्थिति में ब्लॉग लेखन करना पडा। मेरा ब्लॉग लेखन आज नहीं करना था, इसका सबसे बड़ा सबूत यही हैं कि-"यह मेरा अभी तक का सबसे छोटा ब्लॉग पोस्ट हैं और सबसे ज्यादा जल्दी में लिखा हुआ भी।"&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;कल सभी खबरिया समाचार पत्र और समाचार चैनल एक दुखांत घटना से परिपूर्ण थे। बाबा कृपालु जी महाराज के आश्रम में मची भगदड़ में साठ से ज्यादा लोग मारे गए और असंख्य लोग घायल हो गए। मारे गए लोगो में बच्चो और महिलायों की संख्या ज्यादा हैं। यह बहुत ही दिल देहला देने वाला नज़ारा था, कमजोर दिल के लोगो की तो हालत ही बिगड़ गयी होगी। मैं तो कई देर तक गंभीर सोच में पड़ गया, लेकिन क्यूंकि यह ब्लॉग पोस्ट जल्दी में की गयी हैं, इसलिए ज्यादा लम्बा ना लिखते हुए सिर्फ अपनी चिंताओं और सवालों को व्यक्त कर रहा हूँ। &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;मेरे मन में निम्नलिखित चिंताएं-सवाल व्याप्त थे =&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;कब तक मचती रहेगी ऐसी जानलेवा भगदड़???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;कब तक लोग बाबाओं-साधू-संतो की भीड़ भरी और असुरक्षित समागमो में जाते रहेंगे???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;कब तक बाबा लोगो की सेवा करने या आशीर्वाद लेने के चक्कर में लोग मरने जाते रहेंगे??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;आये दिन ऐसे हादसे, ऐसी दुखद घटनाओं की खबरे आती रहती हैं। कब रुकेंगी ऐसी खबरे आनी???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;लोग पुरानी मौतों को भूलते नहीं कि कोई नयी घटना हो जाती हैं। जिम्मेदार कौन??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;किसी को जाने से मैं रोक नहीं रहा हूँ लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी भी तो भक्तो को होनी चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;लोगो को दीर्ध आयु, तरक्की का आशीर्वाद देने वाले बाबा के सामने ही लोग काल-कवलित क्यों हो जाते हैं??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;आम दिनों की बजाय बड़े महोत्सवो में ही क्यों जाते हैं लोग??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;जबकि लोगो को पहले से ही भीड़ होने, असुरक्षा और असुविधा होने की पूरी जानकारी होती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;क्या बड़े दिनों में या महोत्सवो में बाबा ज्यादा दमदार-तगड़ा आशीर्वाद देते हैं??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;ना जाने कितने लोग इन भगदड़ो में मारे जा चुके हैं, और आगे भी ना जाने कितने लोग मारे जाएँगे??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;इन मौतों से बाबा या संत महात्मा कोई सबक लेंगे, इसमें तो मुझे शंशय हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;लेकिन इन मौतों से आम जनता और प्रशासन कब सबक लेगा??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;मृतकों&lt;span class=""&gt;-घायलों को कुछेक&lt;/span&gt; हज़ार या लाख की आर्थिक मदद क्या सार्थक हैं???&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;कब तक मुआवजा बाँट कर लोगो का ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती रहेगी??&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;जितनी इनकी कमाई हैं, उसके आगे तो ये मुआवजा ऊंट के मूंह में जीरे के सामान हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;मैं यहाँ मुआवजा राशि बढाने के लिए नहीं कह रहा हूँ, मैं यहाँ अनमोल जिंदगियों की कीमत समझने के लिए कह रहा हूँ।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;वो अनमोल जिंदगी जिसका आंकलन आप रुपयों में करते हैं। जबकि वो अरबो रुपयों से भी कही ज्यादा कीमती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;उन बच्चो, उन विधवाओं की कुछ सोचिये?? जिन्हें आप मुआवजा रुपी लोलिपॉप से बहलाना चाहते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;उन बुजुर्गो के सम्बन्ध में सोचिये जिनका एकमात्र कमाऊ बेटा या बेटी आपकी भगदड़ में आपकी (भगवान् की) प्यारी हो गयी।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;आदि-आदि।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;और भी बहुत सारे-कई सवाल मेरे मन में उठ रहे हैं, लेकिन क्यूंकि जल्दी में होने और वक़्त ना होने के कारण मैं आज इतना ही ब्लॉग में लिख रहा हूँ। सभी मृतकों और घायलों को मेरी, मेरे ब्लॉग, और मेरे ब्लॉग के सभी पाठको की तरफ से हार्दिक संवेदना।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#999999;"&gt;धन्यवाद।&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#333333;"&gt;&lt;strong&gt;FROM =&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#333333;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDER KUMAR SONI,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#333333;"&gt;&lt;strong&gt;L-5, MODEL TOWN, N.H.-15,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#333333;"&gt;&lt;strong&gt;SRI GANGANAGAR-335001,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#333333;"&gt;&lt;strong&gt;RAJASTHAN, INDIA.&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#333333;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI@YAHOO.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#333333;"&gt;&lt;strong&gt;00-91-9414380969&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#333333;"&gt;&lt;strong&gt;CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2493069743826737829-649083613418863579?l=chanderksoni.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://chanderksoni.blogspot.com/feeds/649083613418863579/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/03/blog-post_05.html#comment-form' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/649083613418863579'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2493069743826737829/posts/default/649083613418863579'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://chanderksoni.blogspot.com/2010/03/blog-post_05.html' title=''/><author><name>चन्द्र कुमार सोनी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13890668378567100301</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_L5Yvos_EvOQ/Smd4UxTumSI/AAAAAAAAABA/vBBaccL9jFU/S220/15112008201.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2493069743826737829.post-6757630912860808272</id><published>2010-02-27T10:09:00.000+05:30</published><updated>2010-02-27T10:09:00.518+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:180%;color:#000000;"&gt;क़ानून के ऐसे सकारात्मक दुरूपयोग से मैं सहमत।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;हैरान रह गए ना, शीर्षक पढ़ कर। मैं किसी भी तरह के क़ानून का उल्ल्लंघन नहीं करता हूँ और ना ही किसी को ऐसा करने की सीख/प्रेरणा दे रहा हूँ। वैसे तो मैं नियम-कायदों और कानूनों का पालन करने वाला व्यक्ति हूँ, मैं जानबूझ कर क़ानून तोड़ने जैसा कार्य नहीं करता हूँ। जाने-अनजाने, भूलवश ऐसा हो तो और बात हैं। लेकिन इस बार बात ही कुछ ऐसी हैं, जो मैं कह रहा हूँ कि-"क़ानून के ऐसे सकारात्मक दुरूपयोग से मैं सहमत।" आप भी वाक्यांश जानेंगे तो आप भी कहेंगे-"क़ानून का ऐसा दुरूपयोग तो होना ही चाहिए।"&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;वाक्यांश यह हैं = हमारे किसी काफी दूर के रिश्तेदार की बेटी (जिसे मैं जानता तो नहीं, पर सुना हैं) की शादी कुछेक साल पहले हुई थी। उसका पति खूब शराब पीया करता था, वो अव्वल दर्जे का शराबी था। कमाई करने, बीवी और घरवालो की तरफ ध्यान देने की तरफ से लापरवाह था। बीवी बहुत समझाती पर कमाई करने और शराब छोड़ने की उसने रत्ती भर भी कोशिश नहीं की। कालान्तर में एक बेटी भी हो गयी, बेटी के होने के बाद उसके सुधरने की उम्मीद जगी थी। पर अफ़सोस, ऐसा ना हो सका, सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:78%;color:#ffccff;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#663300;"&gt;वो शराबी सारे दिन घर पर पडा रहता या मोहल्ले में इधर-उधर ताश-जुआ खेलता रहता। सारा का सारा पैसा शराब में उड़ा डालता, अगर थोड़े-बहुत रुपये बच जाते तो उसे जुए-सट्टे में बर्बाद कर आता। पत्नी बहुत समझाती पर उसके कान में
